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मिलेट्स और कृषि गतिविधियां बन रहे सहकारिता के मजबूत आधार।
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चौत्र नवरात्रि के अवसर पर किया कन्या पूजन, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, रेस्टोरेंट में पहुंच लिया गैस आपूर्ति का जायजा।
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परेडग्राउंड आटोमेटेड पार्किंग जनमानस को विधिवत् समर्पित, मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण।
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11वें स्मार्ट सिटी कन्वर्जेंस एक्सपो में, देहरादून स्मार्ट सिटी को जल प्रबंधन में उत्कृष्टता के लिए किया गया सम्मानित।
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मुख्यमंत्री आवास परिसर में किया गया शहद निष्कासन कार्य, पहले चरण में निकला 60 किलोग्राम शहद।
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जिला प्रशासन का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट, आधुनिक इंटेंसिवकेयर सेंटर जनमानस को विधिवत समर्पित, मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण।
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मोदी की रूस यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई

मोदी की रूस यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई

रूस के लिए मोदी की यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई। रूस का खास प्रयास पश्चिम के इस प्रचार को झुठलाने का है कि उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया गया है। इस लिहाज से इस यात्रा का महत्त्व स्पष्ट है।

भारत-रूस दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा को सफल बताया है। लेकिन सफलता को मापने के दोनों के संभवत: अलग-अलग पैमाने हैं। भारत की नजर में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में हुए समझौतों से देश को फायदा होगा। दोनों देशों ने 2030 तक सालाना आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का इरादा जताया है, जो फिलहाल 65 बिलियन डॉलर के करीब है। खबरों के मुताबिक रूस भारत को रियायती दर पर कच्चा तेल देते रहने पर राजी हुआ है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में तकनीक ट्रांसफर जारी रखने पर भी रजामंदी हुई। मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के सामने भारतीय नौजवानों को जबरन रूसी सेना में शामिल करने का मुद्दा उठाया, जिस पर पुतिन उन्हें जल्द वहां से मुक्ति देने पर सहमत हुए।

इसके अलावा भारत के नजरिए एक सफलता यह भी है कि रूस ने अपने प्रतिष्ठित सम्मान- ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्र्यू द अपोस्टल से मोदी को सम्मानित किया। विदेश में मोदी के ऊंच कद की छवि बनाना गुजरे दस साल में भारतीय विदेश नीति का एक खास प्रयास रहा है। इस सम्मान से इस कथा में एक नया पहलू जुड़ा है। उधर रूस के लिए यह यात्रा दूरगामी रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई। पिछले सवा दो साल में रूस का खास प्रयास पश्चिम के इस प्रचार को झुठलाने का है कि उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया गया है। जिस भारत में अमेरिका ने गुजरे वर्षों में खास रणनीतिक निवेश किया है, उसके प्रधानमंत्री मास्को जाकर पुतिन के गले लगें, तो उसका प्रतीकात्मक महत्त्व स्पष्ट है। रूस और चीन की फिलहाल कोशिश यह है कि भारत को जितना संभव है तटस्थ रखने का प्रयास किया जाए, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पश्चिमी रणनीति ऊहापोह की शिकार बनी रहे। इसीलिए चीन में मोदी की मास्को यात्रा का दिल खोल कर स्वागत किया गया है।

बेशक, इस यात्रा से अमेरिका की तल्खी बढ़ी है, जो उसके विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया से जाहिर हुआ है। तो कुल मिला कर दोनों पक्षों ने अपने हित साधे। फिलहाल इसमें वे सफल रहे हैं।

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