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विश्व कैंसर दिवस पर, श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल ने, चलाया जनजागरूकता अभियान।
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धामी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में, 28 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी।
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डीएम सविन बंसल की संवेदनशील पहल, नारी निकेतन की संवासिनियों को मिला आत्मीयता व स्नेह का अनुभव।
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‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में सभी विद्यालयों की भागीदारी अनिवार्य, डाॅ. धन सिंह रावत।
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केन्द्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत-2047 और, आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सशक्त रोडमैप, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। 
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गढ़वाल और कुमाऊँ में एक-एक, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के अंतर्गत चल रहे, निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण। 
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जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में, भिक्षावृत्ति के विरुद्ध कार्रवाई दो बालकों का रेस्क्यू।
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गणेश गोदियाल की अध्यक्षता में, कांग्रेस नेताओं की अहम बैठक, 16 फरवरी को लोक भवन घेराव को लेकर हुई चर्चा। 
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आतंकी हमला प्रशासन के लिए चिंता का विषय

आतंकी हमला प्रशासन के लिए चिंता का विषय

जम्मू के कठुआ में सोमवार को सेना के गश्ती दल पर आतंकियों ने घात लगाकर हमला किया जिसमें पांच जवान शहीद हो गए। एक महीने के भीतर कठुआ में दूसरी बार आतंकी हमला हुआ है जो सरकार, सुरक्षा बल और प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। पिछली कुछ आतंकी घटनाओं का ट्रेंड बता रहा है कि दहशतगर्दों ने अपनी रणनीति में बदला किया है। अब जम्मू और विशेषकर कठुआ आतंक का नया गढ़ बनता दिख रहा है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद के शुरुआती दिनों में यह इलाका आतंकवादियों का अच्छा खासा ठिकाना बन गया था।

लेकिन सुरक्षा बलों ने विशेष अभियान चलाकर कठुआ और उसके आसपास के इलाके को आतंक से मुक्त करा लिया था। संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में अमन-चैन बहाल हो रहा था लेकिन जब से विधानसभा चुनाव की आहट तेज हुई है, अचानक आतंकवादी सक्रिय हो गए हैं। हाल के महीनों में आतंकियों ने सीमावर्ती जिले पूंछ, राजौरी, डोडा और रियासी में एक के बाद एक हमले किए हैं। अब आतंकी घाटी की ओर से जम्मू की ओर रुख करने लगे हैं। इसकी बड़ी वजह कठुआ की प्रकृति और बनावट है।

यह क्षेत्र पहाडिय़ों और घनघोर जंगलों से भरा-पूरा है और इसके एक ओर पाकिस्तान की सीमा लगती है और दूसरी ओर पंजाब और हिमाचल है। सीमा पार से आने वाले आतंकवादी वारदात को अंजाम देकर जंगलों के रास्ते पाकिस्तान वापस चले जाते हैं। इस जिले की जनसांख्यिकी भी कश्मीर घाटी से अलग है। यहां हिन्दुओं की आबादी अधिक है। ऐसा हो सकता है कि चुनाव से पहले सांप्रदायिक माहौल खराब करना भी पाक प्रायोजित आतंकवादियों का एक राजनीतिक लक्ष्य हो। इस तथ्य से इंकार नहीं किया जा सकता कि रियासी में इसी इरादे से श्रद्धालुओं की बस को निशाना बनाया गया हो।

यह कहा जाता है कि आतंकवाद की कोई निश्चित उम्र नहीं होती। देखा गया है कि कभी-कभी यह एक समय बाद स्वत: ही खत्म हो जाता है। लेकिन कश्मीर में जारी आतंकवाद के पीछे पाकिस्तान की बड़ी भूमिका से कोई भी इंकार नहीं कर सकता। शायद इसलिए भी यहां आतंकवाद लंबे समय से जीवित है। अब यह देखने वाली बात होगी कि यहां आतंकवाद के विरुद्ध जारी निर्णायक युद्ध में केंद्र सरकार का पाकिस्तान के प्रति क्या रुख रहता है।

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