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धामी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में, 28 हजार से अधिक युवाओं को मिली सरकारी नौकरी।
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डीएम सविन बंसल की संवेदनशील पहल, नारी निकेतन की संवासिनियों को मिला आत्मीयता व स्नेह का अनुभव।
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‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में सभी विद्यालयों की भागीदारी अनिवार्य, डाॅ. धन सिंह रावत।
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केन्द्रीय बजट 2026-27 विकसित भारत-2047 और, आत्मनिर्भर उत्तराखंड का सशक्त रोडमैप, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी। 
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गढ़वाल और कुमाऊँ में एक-एक, स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना की दिशा में तेजी से कार्य, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, जमरानी बहुउद्देशीय बांध परियोजना के अंतर्गत चल रहे, निर्माण कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण। 
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जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देशन में, भिक्षावृत्ति के विरुद्ध कार्रवाई दो बालकों का रेस्क्यू।
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गणेश गोदियाल की अध्यक्षता में, कांग्रेस नेताओं की अहम बैठक, 16 फरवरी को लोक भवन घेराव को लेकर हुई चर्चा। 
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मनसा देवी की भूस्खलन प्रभावित पहाड़ियों का अध्ययन, देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने किया निरीक्षण।
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नेपाल में भारतीय हिंदुओं की स्थितियां बहुत खराब

नेपाल में भारतीय हिंदुओं की स्थितियां बहुत खराब

हरिशंकर व्यास
नेपाल एक समय हिंदू राष्ट्र था। दोनों देशों के लोगों के बीच रोटी, बेटी का संबंध था। जनकपुर धाम नेपाल में है, जिसे भगवान राम की ससुराल मानते हैं। पुराने मिथिला राज की राजधानी जनकपुर मानी जाती है। भारत के हजारों हिंदुओं का कारोबार नेपाल में है। सीमावर्ती शहरों का लगभग सारा कारोबार भारत के हिंदुओं के हाथ में है। नेपाल की 80 फीसदी आबादी हिंदू है। लेकिन पहले नीतिगत कारणों से भारतीय लोग नेपाली नागरिकों के निशाने पर आए और उसके बाद भारत के हिंदुओं को भी निशाना बनाया जाने लगा। स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि भारत में हिंदू, मुस्लिम का विभाजन वहां भी पहुंच गया है। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच पिछले साल अक्टूबर में एक बड़ा विवाद हुआ था, जिसकी वजह से कई दिन तक उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे नेपालगंज के बांके शहर में कर्फ्यू लगा। असल में किसी व्यक्ति ने इंटरनेट पर इस्लाम के प्रति कोई आपत्तिजनक कंटेंट डाल दिया था। इसके विरोध में मुसलमानों ने प्रदर्शन किया। अगले दिन हिंदुओं ने शांति जुलूस निकाला तो जुलूस के ऊपर हमला हो गया। जम कर पथराव हुआ और गोलियां चलीं। वीडियो वायरल हुआ, जिसमें हिंदू भगवा ध्वज लिए हुए भाग रहे हैं और उन पर पत्थरों की बौछार हो रही है।

नेपाल में भले 80 फीसदी आबादी हिंदुओं की है लेकिन वहां भारतीय हिंदुओं की स्थितियां बहुत खराब है। भारत के लोगों के साथ भेदभाव हो रहा है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। भू राजनीतिक कारणों से नेपाल की एक के बाद एक सरकारों ने भारत के प्रति विद्वेष की नीति अपनाई है। सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है तो चीन की दखल की वजह से भी नेपाल में भारत विरोधी भावनाएं भडक़ी हैं। भारत के हिंदू, जो वहां कारोबार किसी तरह से अपने को बचाए हुए हैं वे कारोबार बंद करके भारत लौट रहे हैं।

पिछले साल दो हजार रुपए का नोट बंद किए जाने के बाद अचानक ऐसी स्थितियां बनीं, जिनसे भारतीयों, हिंदुओं को बड़ा नुकसान हुआ। नेपाल ने एकतरफा तरीके से भारतीय मुद्रा पर पाबंदी लगा दी। एक सौ रुपए से ऊपर के मूल्य की सारी मुद्राएं प्रतिबंधित कर दी गईं। सौ रुपए से ऊपर की खरीदारी पर नजर रखी जा रही है और टैक्स लगाया जा रहा है। भारतीय मुद्रा रुपए का नेपाली रूपए के मुकाबले तेजी से अवमूल्यित हो रहा है। भारत के कानून के मुताबिक कोई भारतीय नागरिक 25 हजार रुपए नकद लेकर नेपाल जा सकता है लेकिन नेपाल अब इस नियम को भी नहीं मान रहा है। 25 हजार रुपए नकद रखने पर नेपाल में गिरफ्तार किया जा सकता है। नेपाल के इस रवैए से सीमा के आसपास के लोगों का सैकड़ों करोड़ रुपए का प्रतिदिन का कारोबार प्रभावित हो रहा है। नवंबर 2016 की नोटबंदी के समय से ही ऐसी स्थिति बनी हुई है। दोनों देशों के बीच इसे लेकर बातचीत भी हुई, लेकिन कोई रास्ता नहीं निकल सका। दूसरी ओर नेपाल के इस रवैए से तस्करी में बढ़ोतरी है। ड्रग्स और हथियारों से लेकर सोना और रोजमर्रा की जरुरत की चीजों की तस्करी हो रही है।

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