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मुख्य सचिव ने दलहन के एमएसपी पर, क्रय का प्रस्ताव केंद्र को भेजने के दिए निर्देश।
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श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन।
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दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को मिलेंगे निःशुल्क सहायक उपकरण, 21 से 26 सितंबर तक लगेंगे 11 शिविर, डीएम।
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मंत्री रेखा आर्या ने “आंगन का मिलन”कार्यक्रम की समीक्षा कर, अधिकारियो को दिए आवश्यक दिशा निर्देश।
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मुख्यमंत्री धामी ने GPS/GIS मैपिंग एवं, तकनीकी सर्वेक्षण के लिए अभियान दल को किया फ्लैग ऑफ।
मुख्यमंत्री धामी ने GPS/GIS मैपिंग एवं, तकनीकी सर्वेक्षण के लिए अभियान दल को किया फ्लैग ऑफ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर, मुख्यमंत्री धामी ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर, मुख्यमंत्री धामी ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया।
पीएम मोदी के जन्मदिवस पर 2100 दीपों से जगमगाया यमुना तट, सीएम धामी ने 7.52 करोड़ के स्नान घाट का किया लोकार्पण।
पीएम मोदी के जन्मदिवस पर 2100 दीपों से जगमगाया यमुना तट, सीएम धामी ने 7.52 करोड़ के स्नान घाट का किया लोकार्पण।
प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर, “आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम मे की शिरकत, प्रधानमंत्री के दीर्घायु जीवन की कामना की। 
प्रभारी मंत्री रेखा आर्या ने पीएम नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर, “आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम मे की शिरकत, प्रधानमंत्री के दीर्घायु जीवन की कामना की। 
आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में बोले कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर सेवा और राष्ट्र निर्माण का लें संकल्प।
आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में बोले कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर सेवा और राष्ट्र निर्माण का लें संकल्प।

अंबानी-अडानी, खरबपतियों का चंदा कहां?

अंबानी-अडानी, खरबपतियों का चंदा कहां?

हरिशंकर व्यास
कैसी हैरानी की बात है कि मोदी राज में सबसे ज्यादा धंधा खरबपतियों का बढ़ा। अडानी जगत सेठ हुआ। अंबानी कुबेरपति हुआ। पैसे से भारत की संस्कृति का ढिंढोरा करता है। इनके साथ टाटा, बिड़ला सहित टॉप के बीस खरबपति दिन-दुनी, रात-चौगुनी की रफ्तार से भारत के लोगों से पैसा कमाते हुए हैं लेकिन वे इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीददारों की लिस्ट से लगभग गायब। यों कुछ जानकार शेल याकि खोखा कंपनियों से बॉन्डस लेन-देन की बारीकी तलाश रहे हैं। लेकिन मोटा मोटी मोदी सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड योजना में जुआरियों, सटोरियों, काला बाजारियों और ठेकेदारों से ही चुनाव और राजनीति के नाम पर वसूली हुई दिखती है। और यह हैरानी की बात है।

तभी अपना सवाल है कि सरकारी प्रोजेक्टों और मुंबई, दिल्ली आदि महानगरों के ठेकेदारों, बिल्डरों की इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदने-देने के साथ सौदेबाजी का यदि सीक्वेंस है तो भला विनिवेश, खान आवंटन से लेकर अंतरराष्ट्रीय सौदों, खरीद-फरोख्त के खरबपतियों के कारोबार की वसूली का क्या रूप है? जब चिंदीमार, खोखा कंपनियों को ईडी, सीबीआई, आईटी से लाइन हाजिर करा वसूली हुई है तो खरबपतियों के लेवल का चंदा कहां गया? क्या इस रीति-नीति पर चला गया कि छोटे कारोबारी भाजपा पार्टी के लिए और वैश्विक खरबपति किसी और काम के लिए?

भला और क्या काम हो सकता है? आप ही अनुमान लगाएं। लुटियन दिल्ली में जितने मुंह उतनी बात है। मगर इतना तय है कि भारत के टॉप सौ अरबपतियों की कंपनियों में बिना इलेक्टोरल बॉन्ड्स के कई नाम निकल आएंगे। और फिर यदि इनकों नौ वर्षों में मिली सरकारी कंपनियों, विनिवेश, लाइसेंसों की पूरी सूची के साथ तुलना करें तो वह क्या आंख खोल देने वाली नहीं होगी?

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