Breaking News
सीएम घोषणाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, डीएम डॉ. आशीष चौहान ने दिए कड़े निर्देश।
सीएम घोषणाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, डीएम डॉ. आशीष चौहान ने दिए कड़े निर्देश।
महासू देवता मंदिर में पूजा अर्चना कर, करोड़ो देशवासियों के प्रेरणास्रोत नरेन्द्र मोदी को दी लम्बे कार्यकाल की बधाई, मंत्री खजानदास।
महासू देवता मंदिर में पूजा अर्चना कर, करोड़ो देशवासियों के प्रेरणास्रोत नरेन्द्र मोदी को दी लम्बे कार्यकाल की बधाई, मंत्री खजानदास।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने चलाया, “सडक सुरक्षा जीवन रक्षा” अभियान जागरूकता अभियान।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने चलाया, “सडक सुरक्षा जीवन रक्षा” अभियान जागरूकता अभियान।
परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के, महानिर्वाण दिवस पर किया गुरु का सिमरन।
परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के, महानिर्वाण दिवस पर किया गुरु का सिमरन।
सीएम धामी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर, उनके सफल नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर दी शुभकामनाएं।
सीएम धामी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर, उनके सफल नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर दी शुभकामनाएं।
उत्तराखंड विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति जारी, विज्ञान आधारित विकास, नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार।
उत्तराखंड विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति जारी, विज्ञान आधारित विकास, नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार।
कैंचीधाम मेले की तैयारियां को लेकर, मुख्य सचिव ने रूट प्लान और पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए निर्देश।
कैंचीधाम मेले की तैयारियां को लेकर, मुख्य सचिव ने रूट प्लान और पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए निर्देश।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए प्रदान की, ₹ 89 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए प्रदान की, ₹ 89 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में 11 व 12 जून को दालचीनी विषयक अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार, गणेश जोशी।
परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में 11 व 12 जून को दालचीनी विषयक अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार, गणेश जोशी।

अंबानी-अडानी, खरबपतियों का चंदा कहां?

अंबानी-अडानी, खरबपतियों का चंदा कहां?

हरिशंकर व्यास
कैसी हैरानी की बात है कि मोदी राज में सबसे ज्यादा धंधा खरबपतियों का बढ़ा। अडानी जगत सेठ हुआ। अंबानी कुबेरपति हुआ। पैसे से भारत की संस्कृति का ढिंढोरा करता है। इनके साथ टाटा, बिड़ला सहित टॉप के बीस खरबपति दिन-दुनी, रात-चौगुनी की रफ्तार से भारत के लोगों से पैसा कमाते हुए हैं लेकिन वे इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीददारों की लिस्ट से लगभग गायब। यों कुछ जानकार शेल याकि खोखा कंपनियों से बॉन्डस लेन-देन की बारीकी तलाश रहे हैं। लेकिन मोटा मोटी मोदी सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड योजना में जुआरियों, सटोरियों, काला बाजारियों और ठेकेदारों से ही चुनाव और राजनीति के नाम पर वसूली हुई दिखती है। और यह हैरानी की बात है।

तभी अपना सवाल है कि सरकारी प्रोजेक्टों और मुंबई, दिल्ली आदि महानगरों के ठेकेदारों, बिल्डरों की इलेक्टोरल बॉन्ड्स खरीदने-देने के साथ सौदेबाजी का यदि सीक्वेंस है तो भला विनिवेश, खान आवंटन से लेकर अंतरराष्ट्रीय सौदों, खरीद-फरोख्त के खरबपतियों के कारोबार की वसूली का क्या रूप है? जब चिंदीमार, खोखा कंपनियों को ईडी, सीबीआई, आईटी से लाइन हाजिर करा वसूली हुई है तो खरबपतियों के लेवल का चंदा कहां गया? क्या इस रीति-नीति पर चला गया कि छोटे कारोबारी भाजपा पार्टी के लिए और वैश्विक खरबपति किसी और काम के लिए?

भला और क्या काम हो सकता है? आप ही अनुमान लगाएं। लुटियन दिल्ली में जितने मुंह उतनी बात है। मगर इतना तय है कि भारत के टॉप सौ अरबपतियों की कंपनियों में बिना इलेक्टोरल बॉन्ड्स के कई नाम निकल आएंगे। और फिर यदि इनकों नौ वर्षों में मिली सरकारी कंपनियों, विनिवेश, लाइसेंसों की पूरी सूची के साथ तुलना करें तो वह क्या आंख खोल देने वाली नहीं होगी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top