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सीएम धामी का सख्त एक्शन जारी, जन स्वास्थ्य की अनदेखी पर नपे छह इंजीनियर। 
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सतपाल महाराज का व्यक्तित्व हम सबके लिए प्रेरणादायक, मुख्यमंत्री धामी।
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के जन्मदिवस समारोह में किया प्रतिभाग।
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सरकारी भूमि पर कब्जे और प्लॉटिंग की शिकायत पर जांच के निर्देश, जन समाधान दिवस में 137 से अधिक फरियाद।
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सीएम धामी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनीं समस्याएं, त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश। 
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दून में सेवा संकल्प अभियान का पुरकुल गांव से आगाज, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सुनी समस्याएं।
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रि हैं विभाग की मजबूत रीढ़, विषम परिस्थितियों में करती हैं अपने दायित्वों का निर्वहन, रेखा आर्या।
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मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखण्ड बनेगा, मुख्यमंत्री धामी।
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मुख्यमंत्री धामी से मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने की शिष्टाचार भेंट।
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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में, डाॅक्टरों  की मेहनत सेे मरीज़ ने मौत को दी मात। 

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में, डाॅक्टरों  की मेहनत सेे मरीज़ ने मौत को दी मात। 

गर्दन में छड़ घुसने से गम्भीर घायल मरीज़ की डाॅक्टरों ने बचाई जान। 

दुर्घटना में गर्दन के आर पार हो गई थी लोहे की छड़। 

ईएनटी विभागाध्यक्ष डाॅ त्रिप्ती ममगाईं व उनकी टीम द्वारा की जटिल सर्जरी रंग लाई। 

देहरादून :- श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ईएनटी और हेड-नेक सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने एक मरीज़ को नया जीवन दिया है। नाक कान गला रोग विभाग के डाॅक्टरों ने मरीज़ का जीवन रक्षक शल्य चिकित्सा कर एक मरीज को दूसरी जिंदगी दी। उत्तर प्रदेश के मंगलौर निवासी 45 वर्षीय पुरुष मरीज़ दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं। एक निर्माण स्थल पर ट्रक से सामान उतारते समय दुर्घटनावश लोहे की छड़ मरीज़ की गर्दन के आर-पार हो गई। 4 मई 2025 को सहकर्मियों द्वारा उन्हें तुरंत पास के एक स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। लेकिन सर्जरी की जटिलता और संभावित जटिलताओं को देखते हुए मरीज़ को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में रैफर कर दिया गया। 

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नाक कान गला रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. डाॅ त्रिप्ती ममगाईं ने जानकारी दी कि मरीज को अत्यधिक रक्तस्राव के कारण शॉक की अवस्था में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया और भर्ती किया गया। मरीज की आपातकालीन आधार पर ‘नेक एक्सप्लोरेशन’ सर्जरी की योजना बनाई गई। प्रक्रिया के दौरान सर्जनों ने पाया कि गर्दन की सामान्य संरचना विकृत हो चुकी थी। त्वचा और गर्दन की मांसपेशियाँ फटी हुई थीं और अंदर एक बड़ा खून का थक्का जमा हुआ था। जब यह थक्का हटाया गया तो पाया गया कि इंटरनल जुग्युलर वेन (जो मस्तिष्क से हृदय तक रक्त संचारित करती है) में लगभग 5 सेमी फट चुकी थी। इसके साथ ही रिकरंट लैरिंजियल नर्व भी क्षतिग्रस्त पाई गई।

विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिप्ती एम. ममगाईं ने जानकारी दी कि गर्दन में गंभीर चोट और प्रमुख रक्त वाहिकाओं की क्षति के मामले अत्यंत दुर्लभ होते हैं और इनका प्रबंधन अत्यंत कुशल सर्जिकल विशेषज्ञता की मांग करता है। अगर समय रहते इलाज न हो तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण यह जीवनघातक सिद्ध हो सकता है और स्ट्रोक, पल्मोनरी एम्बोलिज्म या मरीज की मृत्यु जैसी जटिलताएं हो सकती हैं। डॉ. त्रिप्ती ममगाईं एवं प्रोफेसर डॉ. अरविंद वर्मा ने स्थिति को कुशलता से संभालते हुए आवश्यक सर्जरी की और रक्त वाहिका व तंत्रिका का उपचार किया।

डॉ. त्रिप्ती एम. ममगाईं (प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष), डॉ. अरविंद वर्मा (प्रोफेसर) और उनकी टीम की साझा मेहनत और चिकित्सकीय दक्षता के चलते ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस टीम में डॉ. शरद हरनोट, डॉ. ऋषभ डोगरा, डॉ. फात्मा अंजुम, डॉ. हर्षित गुप्ता, डॉ. आरुषि कोठारी शामिल रहे। एनेस्थीसिया टीम से डॉ. रुबिना मक्कर और डॉ. तमिश (जूनियर रेजिडेंट) स्टाफ में सिस्टर डोलमा और पिंकी शामिल रहीं। डॉ. त्रिप्ती ममगाईं द्वारा समय पर की गई पहल और विशेषज्ञता के चलते मरीज अब सुरक्षित, स्थिर है और गहन निरीक्षण के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है।

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