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सीएम धामी ने सिंचाई परियोजनाओं के अन्तर्गत, रिवर प्रोटक्शन कार्य एवं डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा की।
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निराश्रित, बेसहारा गोवंश संरक्षण के लिए, डीएम सविन बंसल ने स्वीकृत किए नए आश्रय। 
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से शिष्टाचार भेंट कर जाना कुशलक्षेम।
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सीएम पुष्कर धामी ने पद्म भूषण सम्मान हेतु चयनित होने पर, भगत सिंह कोश्यारी को उनके आवास पर पहुंच कर दी बधाई।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को, ज़मीन पर उतारने में जुटा आवास विभाग।
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रूद्रपुर व पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज का शीघ्र शुरू होगा संचालन, डॉ. धन सिंह रावत। 
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रंग ला रही डीएम सविन बंसल की पहल, प्रथम राजकीय नशा मुक्ति केंद्र से 7 व्यक्ति हुए नशामुक्त।
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सेवा सप्ताह के तहत मंत्री गणेश जोशी ने, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को, श्रम-न्यूनीकरण उपकरण एवं पशु सखियों को स्मार्टफोन किए वितरित।
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मुख्यमंत्री द्वारा अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए, रु. 195 करोड़ की धनराशि की मंजूरी।
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उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, आरक्षण को लेकर सरकार से मांगा जवाब।

उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, आरक्षण को लेकर सरकार से मांगा जवाब।

देहरादून /नैनीताल :- उत्तराखंड में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों पर नैनीताल हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। यह रोक आरक्षण व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार द्वारा स्थिति स्पष्ट न कर पाने के चलते लगाई गई है। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक पंचायत चुनावों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक चुनाव प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार पंचायत चुनावों में आरक्षण को लेकर न तो स्पष्ट नीति प्रस्तुत कर सकी और न ही न्यायालय को भरोसेमंद विवरण दे सकी। इस पर कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार को निर्देश दिए कि वह जल्द से जल्द आरक्षण संबंधी नीति स्पष्ट करे।

राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल ही में पंचायत चुनावों की तैयारी शुरू कर दी थी और 12 जिलों में पंचायत चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला राज्य की सियासत और पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष पहले से ही सरकार पर पंचायतों में आरक्षण को लेकर मनमानी और अनियमितता के आरोप लगा रहा था, जिसे अब न्यायालय की टिप्पणी से बल मिल सकता है। अब सबकी निगाहें सरकार की अगली रणनीति और अदालत में उसकी प्रस्तुति पर टिकी हैं।

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