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स्वदेशी एलईडी लड़ियों की रोशनी और मिलेट्स उत्पादों का स्वाद बढ़ाएगा दीपावली की खुशियां।
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मुख्यमंत्री धामी ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के, विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित।
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श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में गोल्डन कार्ड पर मिल रहीं अनुमन्य चिकित्सा सुविधाएं।
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मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए, ₹22.15 करोड़ से अधिक की वित्तीय स्वीकृति का किया अनुमोदन।
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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन मंत्री से की भेंट, हल्द्वानी में उच्च न्यायालय के स्थायी परिसर निर्माण के प्रस्ताव पर की चर्चा।
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त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग का शिकंजा, मिठाई की दुकानों पर छापेमारी तेज।
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नाम पट मामले में पुनर्विचार करे धामी सरकार, राजीव महर्षि।

नाम पट मामले में पुनर्विचार करे धामी सरकार, राजीव महर्षि।

देहरादून :- उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रभारी राजीव महर्षि ने कांवड़ यात्रा के मद्देनजर पारित किए गए नाम पट अनिवार्यता के आदेश पर पुनर्विचार की मांग करते हुए इस तुगलकी फरमान को तत्काल वापस लेने की मांग की है। एक बयान में महर्षि ने कहा कि कारोबार कर रहे किसी भी व्यक्ति को नाम बताने में क्या हर्ज हो सकता है लेकिन अगर कांवड़ जैसी पवित्र और श्रद्धाभक्ति पूर्ण यात्रा के मार्ग पर गलत मंशा से ऐसा करने का आदेश जारी किया जा रहा है तो यह गलत है। उन्होंने कहा कि सरकार का आदेश समझ से परे है और यह समाज की समरसता को खंडित करने का प्रयास प्रतीत हो रहा है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह देखने में आ रहा है कि पिछले कुछ वर्षों से एक समुदाय विशेष का आर्थिक बहिष्कार करने के बयान कुछ छोटे बड़े नेताओं के आते रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि नाम जानने के पीछे सरकार का उद्देश्य क्या है। उन्होंने कहा कि क्या सरकार यही नियम जम्मू कश्मीर अथवा उत्तर पूर्व में लागू करना चाहेगी? इस मुद्दे पर भी लोग भाजपा की मंशा जानना चाहते हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर यूसीसी की बात करने वाले अलग – अलग प्रदेश में अलग अलग नीति कैसे अपना सकते हैं? उन्होंने पूछा है कि क्या नार्थ ईस्ट के लिए भी यह नियम लागू किया जायेगा?

मीडिया प्रभारी महर्षि ने पूछा है कि सरकार यह भी स्पष्ट करे कि यदि नाम बताने के नियम से समुदाय विशेष के व्यापार को नुकसान होता है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी? क्या सरकार इसकी जिम्मेदारी लेगी?

उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों बुनियादी मुद्दों से ध्यान भटका कर देश को गैर जरुरी मुद्दों की ओर धकेला जा रहा है?

महर्षि ने कहा कि उत्तराखंड इस समय गंभीर परिस्थिति से गुजर रहा है। आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है, सैकड़ों मार्ग अवरुद्ध हैं लेकिन आलवेदर रोड का नारा देने वाली सरकार का ध्यान पीड़ितों की ओर न होकर इस गैर जरूरी मुद्दे पर केंद्रित है। सरकार की प्राथमिकता आपदा पीड़ित प्रदेश के लोगों को राहत पहुंचाने की होनी चाहिए लेकिन इस गैर जरूरी मुद्दे को आगे बढ़ा रही है जबकि यह समाज के लिए विभाजनकारी आदेश है। उन्होंने समय रहते सरकार से तुगलकी फरमान को वापस लेने की मांग की है।

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