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122 साल बाद अद्भुत संयोग, पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से और, पितृपक्ष का समापन सूर्यग्रहण से होगा। 

122 साल बाद अद्भुत संयोग, पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से और, पितृपक्ष का समापन सूर्यग्रहण से होगा। 

देहरादून :- इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर 2025 से आरंभ हो रहा है और इसका समापन 21 सितंबर को होगा। खास बात यह है कि 122 वर्षों बाद ऐसा अद्भुत संयोग बना है जब पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से हो रही है और समापन सूर्यग्रहण पर होगा। ग्रहण और श्राद्ध पक्ष का यह संयोग ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ज्योतिष गणना के अनुसार 7 सितंबर की रात को पूरे भारत में चंद्रग्रहण दिखाई देगा। ग्रहण का आरंभ रात 8 बजकर 58 मिनट पर होगा, इसका मध्य 11 बजकर 11 मिनट पर और समापन यानी मोक्ष 8 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट पर होगा। यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र और कुंभ राशि पर लग रहा है। भारत के अतिरिक्त एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, पूर्वी अटलांटिक महासागर और अंटार्कटिका से भी यह ग्रहण दिखाई देगा।

पितृपक्ष की पूर्णिमा पर पहला श्राद्ध और ग्रहण का प्रभाव

7 सितंबर को ही भाद्रपद पूर्णिमा का श्राद्ध भी है। सामान्यत इस दिन पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कार्य दिन में किया जाता है, लेकिन चूंकि उसी दिन रात को चंद्रग्रहण है, इसलिए श्राद्धकर्म दोपहर तक ग्रहण से पहले ही सम्पन्न करने की परंपरा बताई गई है। वहीं, जो लोग ग्रहण से पूर्व श्राद्ध नहीं कर पाएंगे, वे ग्रहण मोक्ष यानी 2:25 बजे के बाद भी स्नान-दान के साथ तर्पण कर सकते हैं।

सूतक काल कब से और क्या-क्या वर्जित है

चंद्रग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक लग जाता है। ऐसे में 7 सितंबर की सुबह 11 बजकर 58 मिनट से ही सूतक काल शुरू हो जाएगा और यह रात 2 बजकर 25 मिनट तक चलेगा। सूतक के दौरान बच्चों, रोगियों और वृद्धों को छोड़कर अन्य सभी लोगों के लिए भोजन करना, पकाना, जल ग्रहण करना और शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। मंदिरों के कपाट भी इस दौरान बंद कर दिए जाते हैं।

ग्रहण काल में क्या करना चाहिए

ग्रहण के समय धार्मिक दृष्टि से जप, ध्यान और पाठ को अत्यंत फलदायी माना गया है। भोजन की अशुद्धि से बचने के लिए परंपरा है कि ग्रहण से पूर्व पकाए भोजन में तुलसी पत्र या कुश रख दिया जाए। ग्रहण के समापन के बाद स्नान करके पवित्र जल का छिड़काव, दान-पुण्य और श्राद्धकर्म करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

21 सितंबर को लगेगा सूर्यग्रहण

पितृपक्ष का समापन 21 सितंबर को होगा और उसी दिन सूर्यग्रहण भी लग रहा है। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि सूर्यग्रहण का पितृपक्ष के कर्मकांडों पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, किंतु इसका असर विश्व की परिस्थितियों पर दिखाई दे सकता है। ग्रहण के बाद विश्व में शांति में कमी आने की संभावना जताई जा रही है, वहीं भारत की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति मजबूत रहने के योग बताए जा रहे हैं।

क्या खास है इस बार

122 साल बाद पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से और समापन सूर्यग्रहण पर।

7 सितंबर को चंद्रग्रहण : रात 8:58 बजे से 2:25 बजे तक सुबह 11:58 बजे से सूतक काल लागू।

उसी दिन भाद्रपद पूर्णिमा का पहला श्राद्ध, जो दोपहर तक या ग्रहण मोक्ष के बाद हो सकेगा।

21 सितंबर को पितृपक्ष समापन के दिन सूर्यग्रहण।

ग्रहण के दौरान रखें सावधानी 

गर्भवती महिलाएँ ग्रहण काल में घर से बाहर न निकलें और तेज़ रोशनी से बचें।

ग्रहण के समय भोजन पकाना और करना वर्जित है, भोजन पहले ही तैयार कर लें।

बच्चों और रोगियों को आवश्यकता अनुसार भोजन दिया जा सकता है।

ग्रहण काल में धार्मिक पाठ, जप और ध्यान करें, यह विशेष फलदायी होता है।

ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान करें और घर को गंगाजल या पवित्र जल से शुद्ध करें।

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