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उत्तराखंड के ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ बनने पर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने दी बधाई।
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मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं, निर्माण कार्यों के लिए ₹ 5 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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पुष्पवर्षा, चरण प्रक्षालन के साथ ही, सीएम धामी ने अपने हाथों से भोजन परोसकर किया कांवड़ियों का स्वागत। 
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने मसूरी विधानसभा में, विभिन्न विकास योजनाओं का किया लोकार्पण शिलान्यास। 
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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में दिया संदेश, अंगदान: मृत्यु के बाद भी जीवन का उपहार।
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विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा को लेकर, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी ने, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक।
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मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का हो तय समय पर सत्यापन, सीईओ।
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मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं, निर्माण कार्यों के लिए ₹ 150 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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उत्तराखण्ड : आध्यात्मिक राजधानी की दिशा में बढ़े कदम, चारधाम के साथ ही अन्य मंदिरों में भी भक्तों की संख्या बढ़ी।
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महालेखाकार उत्तराखंड ने जीपीएफ अदालत का किया आयोजन, लगभग 45,000 अभिदाताओं से संबंधित मामलों के, त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण पर केंद्रित पहल।

महालेखाकार उत्तराखंड ने जीपीएफ अदालत का किया आयोजन, लगभग 45,000 अभिदाताओं से संबंधित मामलों के, त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण पर केंद्रित पहल।

पारदर्शिता, लोककल्याण और उत्तरदायी प्रशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जी.पी.एफ. अदालत का सफल आयोजन।

शिकायतों के मौके पर समाधान हेतु सहायता काउंटर स्थापित, अभिदाताओं को प्रमाणपत्र वितरण।

देहरादून :- महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तराखंड, देहरादून के कार्यालय गुरुवार को कौलागढ़ स्थित ऑडिट भवन में सामान्य भविष्य निधि (जी.पी.एफ.) अदालत का आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य जनकल्याण, पारदर्शिता एवं उत्तरदायी प्रशासन को प्रोत्साहित करना तथा जी.पी.एफ. से संबंधित शिकायतों का त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करना था। महालेखाकार कार्यालय राज्य के लगभग 45,000 अभिदाताओं के जी.पी.एफ. अभिलेखों का संधारण करता है, और उनके हितों से संबंधित समस्याओं के समाधान हेतु यह अदालत आयोजित की गई।

अदालत का उद्घाटन मो० परवेज़ आलम, महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी), उत्तराखंड द्वारा किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने बताया कि यह पहल महालेखाकार कार्यालय, कर्मचारियों तथा प्रशासन के बीच एक साझा मंच प्रदान करती है, जहाँ सामान्य भविष्य निधि से संबंधित विषयों का संयुक्त रूप से समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि सामान्य भविष्य निधि केवल एक वित्तीय साधन नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों के लिए विश्वास एवं सुरक्षा का प्रतीक है, और यह अदालत उनके कठिन परिश्रम से अर्जित बचत से संबंधित मामलों के समाधान में संवेदनशीलता, सटीकता एवं दक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक सक्रिय कदम है।

इस अवसर पर लगभग 300 आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डीडीओ), 200 अभिदाता, तथा वित्त विभाग, निदेशालय कोषागार, कोषागार देहरादून एवं साइबर कोषागार के अधिकारी उपस्थित रहे। शिकायतों के प्रभावी निराकरण हेतु विभिन्न सहायता काउंटर स्थापित किए गए, जहाँ अधिकांश समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया गया तथा शेष मामलों में आवश्यक कार्यवाही तत्काल प्रारंभ की गई।

समाधान प्रमाणपत्र मौके पर ही परवेज़ आलम, महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) तथा लोकेश दताल, वरिष्ठ उप-महालेखाकार द्वारा संबंधित अभिदाताओं को प्रदान किए गए, जिससे शिकायतों के त्वरित एवं प्रभावी निस्तारण के प्रति कार्यालय की प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई।

महालेखाकार महोदय ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की पहलें भविष्य में भी तंत्र में विश्वास, दक्षता एवं पारदर्शिता को और सुदृढ़ करेंगी।

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