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राष्ट्रपति निकेतन देहरादून में, परिवहन विभाग द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, 2026 के अंतर्गत ऐतिहासिक जनजागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न।
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मुख्यमंत्री धामी ने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी, विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स, इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड का किया फ्लैग ऑफ।
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गौमाता में बसती है सनातन की आत्मा, महाराज।
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वनाग्नि रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, डीएम सविन बंसल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, दिए ये निर्देश।

वनाग्नि रोकथाम को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, डीएम सविन बंसल की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक, दिए ये निर्देश।

ग्राम व ब्लॉक पंचायत समितियों को सक्रिय रखने, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश।

वनाग्नि रोकथाम में पटवारी चौकियां बने त्वरित क्रू-स्टेशन-डीएम।

वनाग्नि सूचना आदान-प्रदान के लिए 24×7 कंट्रोल रूम और क्रू-स्टेशन रहे सक्रिय।

डीएम के निर्देशः वन प्रभाग में प्रत्येक रेंज स्तर पर हो मॉकड्रिल, जागरूकता और प्रशिक्षण शिविर।

वनाग्नि पर नियंत्रण की बड़ी पहलः डीएम ने 45 लाख की उपकरण खरीद को मौके पर दी मंजूरी।

वन हमारी अमूल्य धरोहर, वनाग्नि रोकथाम को मिलेगा पूरा वित्तीय सहयोग-डीएम।

देहरादून :- जिलाधिकारी सविन बंसल की अध्यक्षता में शुक्रवार को ऋषिपर्णा सभागार में जनपद स्तरीय वनाग्नि प्रबंधन समिति की बैठक हुई। बैठक में फायर सीजन के दौरान वनाग्नि घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण एवं रोकथाम हेतु विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए गए। वनाग्नि प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा उपकरणों की खरीद हेतु मौके पर ही 45 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम में वन पंचायतों एवं स्थानीय समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जन सहभागिता के माध्यम से वनाग्नि पर प्रभावी नियंत्रण हेतु एक ठोस एवं व्यवहारिक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर गठित समितियों को सक्रिय करते हुए उन्हें वनाग्नि रोकथाम की जिम्मेदारी के साथ नियमित रूप से क्रियाशील रखा जाए।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर वन पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों, युवाओं एवं महिला स्वयं सहायता समूहों की सहभागिता से व्यापक जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, जिससे आमजन को वनाग्नि के दुष्परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। आरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित गुज्जर बस्तियों में विशेष जागरूकता एवं सतर्कता बरतने के भी निर्देश दिए गए।

वनाग्नि सुरक्षा को लेकर जिलाधिकारी ने विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए, ताकि छात्र-छात्राओं में प्रारंभ से ही पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित हो सके। इसके साथ ही वनाग्नि से संबंधित सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान हेतु आपदा प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत प्रत्येक स्तर पर वायरलेस संचार व्यवस्था, क्रू-स्टेशन एवं नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) को 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि वन हमारी अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं, जिनका संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। वनों की रक्षा हेतु हर संभव प्रयास किए जाएंगे तथा वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम के लिए आवश्यकतानुसार पूर्ण वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने राजस्व, पुलिस, फायर, जल संस्थान, लोक निर्माण विभाग, विद्युत, आपदा प्रबंधन एवं दूरसंचार विभागों को फायर सीजन के दौरान आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। प्रत्येक क्रू-स्टेशन पर वनाग्नि नियंत्रण उपकरण, वाहन, संचार व्यवस्था तथा फायर वॉचर की तैनाती सुनिश्चित करने के साथ ही पटवारी चौकियों को भी क्रू-स्टेशन के रूप में सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। वन प्रभागों में प्रत्येक रेंज स्तर पर प्रशिक्षण शिविर एवं मॉक ड्रिल आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने कहा कि वनाग्नि रोकथाम में सहयोग करने वाले वन पंचायतों, समुदायों एवं व्यक्तियों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उन्होंने जनसामान्य से अपील की कि वन संरक्षण के इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाएं तथा भावी पीढ़ियों के लिए हरे-भरे एवं सुरक्षित वन सुनिश्चित करने में सहयोग करें।

बैठक में प्रभागीय वनाधिकारी ने अवगत कराया कि देहरादून जनपद के अंतर्गत कुल 2,25,853.27 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र है, जिसमें साल, चीड़, देवदार, बांज एवं स्प्रूस के वन शामिल हैं। जनपद में कुल पांच वन प्रभाग कालसी, चकराता, मसूरी, राजाजी टाइगर रिजर्व एवं देहरादून हैं, जिनमें कालसी एवं मसूरी वनाग्नि की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं। विगत पांच वर्षों में वर्ष 2021 में सर्वाधिक 189 एवं वर्ष 2024 में 183 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि वर्ष 2022 में 59, वर्ष 2023 में 50 तथा वर्ष 2025 में अब तक 21 घटनाएं घटित हुई हैं।

वनाग्नि रोकथाम हेतु प्रत्येक वन प्रभाग में अग्नि सुरक्षा पट्टियों, अश्व मार्गों, अग्नि बटिया, मोटर मार्गों का निर्माण तथा संवेदनशील एवं अति संवेदनशील क्षेत्रों में सफाई एवं कंट्रोल बर्निंग का कार्य किया जा रहा है। जनपद में कुल 127 क्रू-स्टेशन स्थापित किए गए हैं। किसी भी वन क्षेत्र में आग दिखाई देने पर तत्काल निकटस्थ वन चौकी, वन रेंज कार्यालय अथवा अग्नि क्रू-स्टेशन को हेल्पलाइन नंबर 1926 पर सूचना देने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त “फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड” मोबाइल एप और आपदा कंट्रोल रूम के दूरभाष 1077 के माध्यम से भी सूचना दी जा सकती है।

प्रभागीय वनाधिकारी द्वारा वनाग्नि प्रबंधन हेतु वाहनों, ईंधन, क्रू-स्टेशन के लिए फर्स्ट एड बॉक्स, लीफ ब्लोअर, वाटर बोतल, टॉर्च आदि उपकरणों की खरीद हेतु बजट की मांग रखी, जिस पर जिलाधिकारी ने वनों को आग से बचाने के लिए हर संभव वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, डीएफओ देहरादून नीरज कुमार, डीएफओ कालसी मयंक गर्ग, डीएफओ चकराता वैभव कुमार, डीएफओ मसूरी अमित कंवर, अपर जिलाधिकारी कृष्ण कुमार मिश्र, ओसी सीलिंग स्मृता परमार, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग राजीव कुमार, क्षेत्राधिकारी पुलिस अंकित कंडारी, एसी एसडीआरएफ सुशील रावत, एससीएफ सरिता भट्ट, एसीएफ अभिषेक मैठाणी, डीडीएओ ऋषभ कुमार सहित अन्य संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

 

 

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