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विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा को लेकर, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी एवं जिलाधिकारी ने, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ की बैठक।
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मतदाताओं द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का हो तय समय पर सत्यापन, सीईओ।
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मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं, निर्माण कार्यों के लिए ₹ 150 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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उत्तराखण्ड : आध्यात्मिक राजधानी की दिशा में बढ़े कदम, चारधाम के साथ ही अन्य मंदिरों में भी भक्तों की संख्या बढ़ी।
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समाधान दिवस में डीएम ने 109 फरियादियों की सुनी समस्याएं, अधिकांश मामलों का मौके पर किया निस्तारण।
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कुमाऊँ में भी शिक्षा-स्वास्थ्य की नई अलख जगाए एसजीआरआर ग्रुप, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा।
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कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों को निःशुल्क बीज किए वितरित, सेब-कीवी बागानों और पॉलीहाउस को बढ़ावा देने के दिए निर्देश।
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प्रदेश में खुलेगी सहकारी बैंक की 34 नई शाखाएं, डाॅ. धन सिंह रावत।
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ग्राम खैनूरी की क्षतिग्रस्त सड़क का मुख्यमंत्री धामी ने लिया तत्काल संज्ञान, अधिकारियों को शीघ्र आवागमन सुचारु करने के दिए निर्देश।
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आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के दिशा-निर्देशों में, अवैध दवाओं पर सख़्त प्रहार, कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण पर तत्काल रोक।

आयुक्त खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के दिशा-निर्देशों में, अवैध दवाओं पर सख़्त प्रहार, कोडीन युक्त कफ सिरप के निर्माण पर तत्काल रोक।

उत्तराखण्ड में कोडीन युक्त कफ सिरप पर बड़ी कार्रवाई, जन स्वास्थ्य सर्वोपरि।

देहरादून :- खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (उत्तराखण्ड) ने सचिव स्वास्थ्य व आयुक्त सचिन कुर्वे के दिशा-निर्देशों एवं मार्गदर्शन में अवैध, घटिया एवं दुरुपयोग की आशंका वाली औषधियों के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। जन स्वास्थ्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि औषधि गुणवत्ता, लाइसेंस शर्तों और वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में औषधि निरीक्षक शाखा के अधिकारियों द्वारा एक औषधि निर्माण इकाई का गहन निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान औषधि सिरप के निर्माण की प्रक्रिया, कच्चे माल की गुणवत्ता, भंडारण व्यवस्था, अभिलेखों के रख-रखाव एवं निर्धारित मानकों की विस्तार से जांच की गई। जांच में यह सामने आया कि संबंधित फर्म द्वारा निर्मित कुछ औषधियों की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, जो जन स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती थी।

*जनहित में त्वरित और कठोर निर्णय*

गंभीर अनियमितताओं को दृष्टिगत रखते हुए विभाग ने बिना विलंब किए कोडीन युक्त कफ सिरप के विनिर्माण पर तत्काल रोक लगा दी। इसके साथ ही संबंधित औषधि का अनुज्ञापन अग्रिम आदेशों तक निलम्बित कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि औषधियों के निर्माण और आपूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे आम नागरिकों के स्वास्थ्य से जुड़ी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में सख़्ती अनिवार्य है।

*स्पष्ट नीति : नियमों से समझौता नहीं*

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि औषधि गुणवत्ता से कोई समझौता स्वीकार्य नहीं है। विशेष रूप से कोडीन युक्त कफ सिरप जैसी औषधियों के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए निगरानी और प्रवर्तन को और अधिक सशक्त किया गया है। विभाग का मानना है कि सख़्त नियंत्रण और निरंतर निगरानी ही नशीली एवं मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगा सकती है।

*न्यायिक स्तर पर भी सख़्त संदेश*

प्रवर्तन के साथ-साथ न्यायिक मोर्चे पर भी विभाग को बड़ी सफलता मिली है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (उत्तराखण्ड) के अंतर्गत जनपद नैनीताल में एन.डी.पी.एस. अधिनियम के तहत वर्ष 2019 और 2020 में दर्ज मामलों में माननीय सत्र न्यायालय द्वारा 04 अभियुक्तों को 12 वर्ष की कठोर कारावास की सजा तथा 1,20,000 रुपये के जुर्माने से दण्डित किया गया है। यह फैसला न केवल कानून की प्रभावशीलता को दर्शाता है, बल्कि अवैध नशीली दवाओं के कारोबार से जुड़े तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी है।

*पूरे प्रदेश में अलर्ट*

सचिव/आयुक्त के निर्देश पर राज्य के सभी जनपदों के औषधि अधिकारियों को कोडीन सिरप एवं अन्य मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग की रोकथाम हेतु विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मेडिकल स्टोर्स, थोक विक्रेताओं, निर्माण इकाइयों और वितरण नेटवर्क पर नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण तेज़ कर दिए गए हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।

*निगरानी, प्रवर्तन और जागरूकता—तीनों पर ज़ोर*

विभाग की रणनीति केवल कार्रवाई तक सीमित नहीं है। अवैध दवाओं के नेटवर्क को जड़ से समाप्त करने के लिए निगरानी, प्रवर्तन और जन-जागरूकता—इन तीनों स्तंभों पर एक साथ काम किया जा रहा है। आम नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर्स से ही दवाएं खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना विभाग को दें।

*अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का बयान*

अपर आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (उत्तराखण्ड) ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता स्पष्ट है—जनता को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक अनुरूप औषधियां उपलब्ध कराना। औषधियों की गुणवत्ता से समझौता सीधे जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। कोडीन युक्त कफ सिरप एवं मनःप्रभावी औषधियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए ज़ीरो टॉलरेंस की नीति लागू की गई है। जहां भी अनियमितता, लाइसेंस उल्लंघन या अवैध गतिविधि पाई जाएगी, वहां बिना किसी दबाव के सख़्त कार्रवाई की जाएगी। जिला स्तर पर विशेष टीमें गठित की गई हैं और एन.डी.पी.एस. मामलों में मिली सजा यह प्रमाणित करती है कि कानून पूरी सख़्ती से लागू किया जा रहा है।

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