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विकास भी, विरासत भी: निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और उपलब्धियों से उत्तराखण्ड ने रचा नया इतिहास।
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सम्मान और सेवा का संगम: धामी सरकार ने आंदोलनकारियों, सैनिकों और आमजन को दिया सशक्त सहारा।
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चार साल बेमिसाल: सशक्त नेतृत्व में बदला उत्तराखण्ड का स्वरूप, ऐतिहासिक फैसलों से विकास को नई दिशा।
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डीएम सविन बसंल LPG गैस की कालाबाजारी को लेकर सख्त, 90 हजार सिलेंडर बैकलॉग, 37 शिकायतों पर प्रशासन अलर्ट।
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मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेला के कार्यो के साथ ही, प्रदेश की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए प्रदान की वित्तीय स्वीकृति।
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केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने की, सीएम धामी की जमकर तारीफ, कहा धाकड़ धामी से बने अब “धुरंधर धामी। 
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भाजपा सबको अपनाती है, कांग्रेस अपनों को भी नहीं स्वीकारती, महेंद्र भट्ट।
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डीएम सविन बसंल ने नवरात्र के पावन पर्व पर, देवियों की स्तुति कर की 10 बालिकाओं की शिक्षा पुनर्जीवित। 
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वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना भी जरूरी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव। 
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उत्तराखंड में पहली बार प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार, 24 अप्रैल को टिहरी जनपद से होगी इसकी शुरूआत।

उत्तराखंड में पहली बार प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार, 24 अप्रैल को टिहरी जनपद से होगी इसकी शुरूआत।

उत्तराखं में पहली बार प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार की गई है। 24 अप्रैल को टिहरी से इसकी शुरूआत होगी। पैतृक गांव लौटने के इच्छुक प्रवासियों के साथ संवाद होगा।

देहरादून :- राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों व दूसरे राज्यों में रह रहे प्रवासियों को वापस अपने पैतृक गांव लौटने के लिए उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग ने प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार कर ली है। पहली बार प्रदेश के हर जिले में प्रवासी पंचायतें होंगी। इसकी शुरूआत 24 अप्रैल को टिहरी जिले से की जाएगी।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की सर्वे के अनुसार 6282 प्रवासी अपने गांव लौटे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हर जिले में प्रवासी पंचायत कराने के निर्देश दिए थे। पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी की अध्यक्षता में पौड़ी में हुई बैठक में प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तैयार की है। प्रवासी पंचायतों में राज्य के दूसरे जिलों या बाहरी राज्यों में रहने वाले उन प्रवासियों को आमंत्रित किया जाएगा, जो अपने गांव लौटने के इच्छुक हैं।

प्रवासी स्वरोजगार क्षेत्र में अनुभवों को साझा करेंगे

कोविड काल में अपने गांव लौटे प्रवासियों ने अनुभव के आधार पर स्वरोजगार को अपनाया है। कई प्रवासी कृषि, बागवानी, मसाले की खेती, सगंध फसलें, मधुमक्खी पालन, पुष्प उत्पादन, मशरूम उत्पादन के अलावा होमस्टे, होटल, रेस्टोरेंट, पशुपालन, डेयरी में अच्छा काम कर रहे हैं। ऐसे प्रवासी स्वरोजगार क्षेत्र में अनुभवों को साझा करेंगे। प्रवासी पंचायतों की रूपरेखा तय हो गई है। नवंबर तक प्रदेश के सभी जिलों में प्रवासी पंचायतों का आयोजन कर लिया जाएगा। जिला स्तर पर विभागीय अधिकारियों की ओर से सरकार की स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। *डॉ. एसएस नेगी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग*

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