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मुख्यमंत्री धामी ने गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेले में किया प्रतिभाग।
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खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिभा उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में दिलाएगी नई पहचान, रेखा आर्या।
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त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, 83 खाद्य पदार्थों की जांच में 15 मानकों पर नहीं उतरे खरे।
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वीर केसरी चन्द के 107वे जन्मदिवस पर श्रद्धा-सुमन किए अर्पित, मंत्री खजानदास।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी कौथिग 2026’ में हुए शामिल, लोकसंस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर।
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क्षेत्र पंचायत निधि पुनः प्रारंभ करने तथा क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए की जाएगी कार्यवाही, मुख्यमंत्री।
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मुख्यमंत्री ने खेल महाकुम्भ एवं मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी के समापन समारोह में किया प्रतिभाग।
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मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं, निर्माण कार्यों के लिए ₹ 805 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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राजपुर वार्ड में विकास योजनाओं का किया शिलान्यास, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना भी जरूरी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव। 

वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना ही नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना भी जरूरी, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव। 

देहरादून :- वन दिवस 2026 के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। “वन-आधारित सतत जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना: मुद्दे और चुनौतियाँ” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में देशभर से वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों और वन प्रबंधकों ने भाग लिया।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि प्रकृति सर्वोपरि है और मानव अस्तित्व के लिए उसके साथ सह-अस्तित्व में रहना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वन संरक्षण का अर्थ केवल पेड़ लगाना नहीं, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण करना है। उन्होंने वानिकी के क्षेत्र में समग्र दृष्टिकोण अपनाने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम और कार्बन क्रेडिट जैसी पहल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वन केवल आर्थिक समृद्धि के लिए ही नहीं, बल्कि शांति और संतुलन के लिए भी आवश्यक हैं।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस “वन और अर्थव्यवस्थाएँ” विषय के तहत मनाया जा रहा है, जो आर्थिक विकास और आजीविका में वनों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। इसी क्रम में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) द्वारा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सहयोग से 21-22 मार्च तक इस राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यशाला में वन-आधारित जैव-उत्पादों के व्यावसायीकरण, सतत वन प्रबंधन, नीतिगत ढांचे, उद्यमिता तथा नवाचार की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। तकनीकी सत्रों में कृषि-वानिकी, गैर-काष्ठ वन उत्पाद, इंजीनियर्ड काष्ठ, वन उद्योग, कार्बन बाजार, वन्यजीव संरक्षण, इको-टूरिज्म और डिजिटल निगरानी जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

इस अवसर पर ICFRE की महानिदेशक कंचन देवी ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को पिथौरागढ़ के मुनस्यारी क्षेत्र की पारंपरिक पायरोग्राफी कला से निर्मित उत्तराखंड के राजकीय पक्षी मोनाल का चित्र भेंट किया। यह कार्यशाला देश में वन-आधारित जैव-अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने, स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के लिए ठोस नीतिगत दिशा तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार, वनों के महानिदेशक एवं विशेष सचिव सुशील कुमार अवस्थी, वनों के अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव) रमेश कुमार पांडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

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