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विश्वविद्यालयों में शुरू होगी ‘विकसित भारत @2047’ मुहिम, डाॅ. धन सिंह रावत। 
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निकायों की समस्याओं के समाधान को सरकार प्रतिबद्ध, विकास कार्यों में नहीं आने दी जाएगी कोई बाधा, मंत्री राम सिंह कैड़ा।
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मानसून से पहले जलभराव वाले संवेदनशील स्थलों पर, समस्या का करें त्वरित समाधान, डीएम डॉ0 आशीष चौहान।
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कराटे चैंपियनशिप के विजेताओं को, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने किया सम्मानित।
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मानसून से पहले सभी तैयारियां पूरी करें अधिकारी, मुख्यमंत्री धामी।
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मोदी युग में चारधाम ऑल वेदर रोड से लेकर, दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर तक, सड़क संपर्क में ऐतिहासिक विस्तार। 
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया, ‘मेरी योजना’ पुस्तक ऑडियो क्लिप का अनावरण।
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने विभिन्न विभागों से चयनित, 221 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र किए वितरित। 
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ब्लूबेरी फार्मिंग को बनाया जाएगा सफल मॉडल, किसानों के साथ खड़ा रहेगा प्रशासन, डीएम डॉ. आशीष चौहान।
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उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा, नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का हुआ भव्य समापन।

उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा, नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का हुआ भव्य समापन।

देहरादून :- माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के तत्वाधान में उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, नैनीताल द्वारा आयोजित दो दिवसीय नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का आज भव्य समापन हुआ। इस वर्ष सम्मेलन का विषय “Enhancing Access to Justice” तथा मुख्य थीम “Justice Beyond Barriers: Rights, Rehabilitation & Reform for the Most Vulnerable” रही।

समापन अवसर पर माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं नालसा के संरक्षक-प्रधान न्यायमूर्ति सूर्यकांत, भारत सरकार के कानून एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह तथा माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। उत्तराखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत किया गया तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मेलन में उत्तराखंड राज्य के समस्त जनपदों के जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सचिव एवं न्यायिक अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की। विभिन्न तकनीकी सत्रों के माध्यम से न्याय तक पहुँच को सशक्त बनाने, वंचित वर्गों के अधिकारों के संरक्षण तथा न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं सुलभ बनाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन के दौरान वन अधिकार अधिनियम, 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन, जेल सुधार, विचाराधीन बंदियों के अधिकार, एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास एवं महिलाओं व बच्चों के विधिक अधिकारों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर माननीय भारत के मुख्य न्यायाधीश द्वारा “न्याय मित्र पोर्टल” का शुभारंभ किया गया, जिससे आमजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर त्वरित न्याय प्राप्त कर सकेंगे। नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ द्वारा ई-बुकलेट का विमोचन भी किया गया।

माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा एंटी-ड्रग जागरूकता वीडियो का शुभारंभ करते हुए युवाओं को नशे के दुष्प्रभाव से बचाने हेतु किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला गया। सम्मेलन में लोक अदालत, मध्यस्थता, नालसा पोर्टल एवं हेल्पलाइन सेवाओं के माध्यम से न्याय को आमजन तक पहुँचाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया। इसके अतिरिक्त, दूरस्थ क्षेत्रों में विधिक सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करने हेतु उत्तराखंड राज्य के समस्त जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों के लिए यूटिलिटी वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।

यह सम्मेलन न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ एवं मानव-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ है, जो समाज के वंचित एवं कमजोर वर्गों तक न्याय की प्रभावी पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्य को सुदृढ़ करता है।

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