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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को, प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से किया अलंकृत।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, विकसित भारत का पहला पड़ाव होगा उत्तराखंड।
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हाथीबड़कला बाजार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को मिष्ठान वितरित कर दीपावली दी शुभकामनाएं।
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अमित शाह का देवभूमि दौरा अत्यंत प्रेरणादायी, महाराज।
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राज्योत्सव समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का किया स्वागत एवं अभिनंदन।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड फिल्म पुरस्कारों को दी मंजूरी।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह व मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, छह बच्चों को मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से किया सम्मानित।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री धामी ने, लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी और अभिनेता हेमंत पांडे को, लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार से किया सम्मानित।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एवं मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने किया, ₹1475.31 करोड़ की 62 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास।
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महिला आरक्षण बिल लोकसभा में अटका, दो-तिहाई बहुमत न मिलने से नहीं हो सका पारित।

महिला आरक्षण बिल लोकसभा में अटका, दो-तिहाई बहुमत न मिलने से नहीं हो सका पारित।

देहरादून/नई दिल्ली :- महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने से जुड़े बहुप्रतीक्षित महिला आरक्षण बिल को लोकसभा में शुक्रवार को झटका लगा। सदन में हुई वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में मतदान किया। बावजूद इसके, यह विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका, जिसके चलते इसे पारित नहीं किया जा सका।

संविधान संशोधन होने के कारण अटका बिल

महिला आरक्षण बिल एक संविधान संशोधन विधेयक है, जिसे पारित करने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की जरूरत होती है। इस महत्वपूर्ण आंकड़े तक सरकार नहीं पहुंच पाई, जिससे बिल पास होने से रह गया।

सदन में गरमाया माहौल

वोटिंग से पहले लोकसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई। विपक्षी दलों ने बिल के कुछ प्रावधानों, खासकर इसके लागू होने की समयसीमा और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना था कि महिलाओं को आरक्षण का लाभ तुरंत मिलना चाहिए, जबकि सरकार ने जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू करने की बात दोहराई। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच तीखा टकराव देखने को मिला।

राजनीतिक सहमति का अभाव

हालांकि महिला आरक्षण के मुद्दे पर लगभग सभी दल सिद्धांत रूप से सहमत नजर आते हैं, लेकिन व्यावहारिक और राजनीतिक मतभेद इसके पारित होने में बाधा बन गए। कई दलों ने वोटिंग के दौरान सरकार का साथ नहीं दिया, जिससे दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा अधूरा रह गया।

क्या है महिला आरक्षण बिल?

इस बिल का उद्देश्य संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना है। इसे महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जाता है।

लोकसभा में बिल पारित न होने के बाद अब सरकार के सामने इसे दोबारा पेश करने या सभी दलों के साथ व्यापक सहमति बनाने की चुनौती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस बिल पर सहमति बनती है, तो यह भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा दे सकता है।

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