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महासू देवता मंदिर में पूजा अर्चना कर, करोड़ो देशवासियों के प्रेरणास्रोत नरेन्द्र मोदी को दी लम्बे कार्यकाल की बधाई, मंत्री खजानदास।
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जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने चलाया, “सडक सुरक्षा जीवन रक्षा” अभियान जागरूकता अभियान।
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परमपूज्य ब्रह्मलीन श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज के, महानिर्वाण दिवस पर किया गुरु का सिमरन।
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सीएम धामी ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर, उनके सफल नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने पर दी शुभकामनाएं।
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उत्तराखंड विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति जारी, विज्ञान आधारित विकास, नवाचार और आत्मनिर्भर उत्तराखंड को मिलेगा नया आधार।
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कैंचीधाम मेले की तैयारियां को लेकर, मुख्य सचिव ने रूट प्लान और पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने के दिए निर्देश।
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मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए प्रदान की, ₹ 89 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान में 11 व 12 जून को दालचीनी विषयक अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनार, गणेश जोशी।
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विश्वविद्यालयों में शुरू होगी ‘विकसित भारत @2047’ मुहिम, डाॅ. धन सिंह रावत। 
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उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश बढ़ाएंगे आपसी सहयोग, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक दूसरे के अनुभवों का लेंगे लाभ। 

उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश बढ़ाएंगे आपसी सहयोग, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक दूसरे के अनुभवों का लेंगे लाभ। 

हिमाचल के अपर मुख्य सचिव ने किया यूएसडीएमए का भ्रमण।

देहरादून :- पर्वतीय राज्यों की समान भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक संरचना एवं आपदाओं की एक जैसी प्रवृत्ति को देखते हुए उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों राज्य एक-दूसरे के अनुभवों, नवाचारों एवं कार्य प्रणालियों से सीखते हुए भविष्य में आपसी सहयोग से कार्य करेंगे। 

हिमाचल प्रदेश के अपर मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने सोमवार को उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का भ्रमण किया। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने उत्तराखण्ड में आपदा न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया, जोखिम आकलन तथा जनजागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी की। कमलेश कुमार पंत ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखण्ड दोनों ही राज्य भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील हैं, जहां भूस्खलन, अतिवृष्टि, बादल फटना, बाढ़ एवं भूकंप जैसी आपदाएं बार-बार सामने आती हैं। ऐसी परिस्थितियों में दोनों राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है, जिससे आपदाओं के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके।

उन्होंने उत्तराखण्ड में स्थापित उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र जैसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की सराहना करते हुए हिमाचल प्रदेश में भी इसी प्रकार की व्यवस्था स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की तथा इसके लिए उत्तराखण्ड से तकनीकी सहयोग का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने भूस्खलन प्रबंधन एवं रोकथाम के क्षेत्र में उत्तराखण्ड द्वारा विकसित प्रणालियों का लाभ लेने की बात कही। भूदेव एप की भी सराहना की। बैठक में यह भी उल्लेख किया गया कि आपदा के समय प्रभावी संचार एवं त्वरित सूचना आदान-प्रदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस संदर्भ में रुद्रप्रयाग जनपद में विकसित डीडीआरएन प्रणाली की सराहना करते हुए इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।

कमलेश पंत ने हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ते हिमनद झील विस्फोट बाढ़ के जोखिम को देखते हुए हिमाचल प्रदेश में इस दिशा में किए जा रहे कार्यों को साझा किया गया। सचिव श्री विनोद कुमार सुमन ने हिमनद झीलों की निगरानी, समय रहते चेतावनी जारी करने तथा जोखिम न्यूनीकरण के उपायों को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु आपसी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का सहयोग भविष्य में बड़ी आपदाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसके अतिरिक्त, पहाड़ों में भूकंपरोधी भवन निर्माण के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश के अनुभवों का लाभ उत्तराखण्ड द्वारा लिए जाने पर भी सहमति बनी। दोनों राज्यों ने यह माना कि सुरक्षित एवं सुदृढ़ निर्माण तकनीकों को बढ़ावा देकर जन-धन की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए समझौता ज्ञापन किए जाएंगे, जिससे ज्ञान, तकनीक, प्रशिक्षण एवं संसाधनों का प्रभावी आदान-प्रदान सुनिश्चित हो सके।

इस अवसर पर अपर सचिव महावीर सिंह चैहान, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर सचिव राजस्व हिमाचल प्रदेश निशांत ठाकुर, जेसीईओ मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार, एचपीएसडीएमए के पीयूष रौतेला, एसके बिरला आदि उपस्थित रहे।

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