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सीएम धामी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनीं समस्याएं, त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश। 
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दून में सेवा संकल्प अभियान का पुरकुल गांव से आगाज, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सुनी समस्याएं।
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रि हैं विभाग की मजबूत रीढ़, विषम परिस्थितियों में करती हैं अपने दायित्वों का निर्वहन, रेखा आर्या।
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मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखण्ड बनेगा, मुख्यमंत्री धामी।
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मुख्यमंत्री धामी से मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने की शिष्टाचार भेंट।
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खेल मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर दिया खेल में आगे बढ़ने का संदेश, कहा युवा है देश का भविष्य।
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धामी सरकार की दूरगामी सोच, धार्मिक और पर्यटन स्थलों व 51 रोपवे के साथ 160 किमी लंबा नेटवर्क जोड़ने की तैयारी।
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राजेन्द्र नगर में नवनिर्मित पार्क का किया लोकार्पण, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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देवभूमि की लोक संस्कृति हमारी पहचान, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी, मुख्यमंत्री धामी।
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उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र, मुख्यमंत्री धामी।

उत्तराखण्ड बनेगा भारतीय ज्ञान-विज्ञान और संस्कृति का वैश्विक केंद्र, मुख्यमंत्री धामी।

ऋषिकुल, हरिद्वार में श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान को विश्वस्तरीय स्वरूप दिया जाएगा, मुख्यमंत्री ।

देहरादून :- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में उच्च स्तरीय बैठक कर ऋषिकुल, हरिद्वार में मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास और विस्तार की योजनाओं की समीक्षा की। बैठक में संस्थान को भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन विज्ञान, संस्कृति और आधुनिक शोध के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड केवल आस्था और अध्यात्म की भूमि नहीं, बल्कि ऋषियों, ज्ञान और वैज्ञानिक चिंतन की भी भूमि रही है। ऋषिकुल, हरिद्वार में इस महत्वपूर्ण संस्थान को नई पहचान देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान का कार्य जल्द शुरू किया जाए। कुंभ शुरू होने से पहले यह कार्य पूर्ण किया जाए। पर्यटन विभाग इसमें नोडल विभाग के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु को निर्देश दिये कि इस संस्थान के कार्यों की नियमित प्रगति के लिए संबंधित विभागीय सचिवों के साथ पाक्षिक बैठकें की जाएं। इसमें विकास के साथ विरासत के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। राज्य के सभी जनपदों की लोक कला पर आधारित गतिविधियां भी इसमें शामिल की जाएं।

मुख्यमंत्री ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि संस्थान में वैदिक गणित, वेदों में निहित विज्ञान, उपनिषदों का दर्शन, भारतीय तर्कशास्त्र, पर्यावरण विज्ञान तथा जीवन मूल्यों पर आधारित शोध और अध्ययन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि भारत ने विश्व को शून्य, दशमलव प्रणाली, बीजगणित और त्रिकोणमिति जैसे महत्वपूर्ण गणितीय सिद्धांत दिए हैं। आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और वराहमिहिर जैसे महान विद्वानों के योगदान को शोध और शिक्षा से जोड़ा जाए। बैठक में संस्थान में खगोल विज्ञान, धातु विज्ञान, कृषि विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष अध्ययन केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन भारत में धातु विज्ञान, जल प्रबंधन, जैविक खेती और मौसम आधारित कृषि ज्ञान अत्यंत विकसित था, जिसे आधुनिक अनुसंधान से जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के समय में वेदों और उपनिषदों में वर्णित नैतिक शिक्षा, अनुशासन, कर्तव्यबोध और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाना आवश्यक है। यह संस्थान शिक्षा के साथ संस्कार और राष्ट्र निर्माण का भी केंद्र बने। उन्होंने कहा कि संस्थान में डिजिटल पांडुलिपि संरक्षण केंद्र, आधुनिक पुस्तकालय, शोध प्रयोगशालाएं, संगोष्ठी केंद्र, ई-लर्निंग सुविधाओं की व्यवस्था भी की जाए।

बैठक के दौरान संस्थान में भारतीय विद्या शाखाओं के गहन अध्ययन को प्रोत्साहित करने के साथ ही पर्यटन, आयुर्वेद ज्योतिष और योग शिक्षा के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जानकारी दी गई कि ज्ञान, योग, ध्यान और भारतीय अध्यात्म की समृद्ध परंपराओं को संस्थान में वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित किया जायेगा। जिसमें शैक्षणिक क्षेत्र के श्रुति केन्द्र में वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ज्ञान की परंपरा, दर्शन केन्द्र में भारतीय दर्शन और चेतना के गहन विचार, आयु केन्द्र में आयुर्वेद और समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के माध्यम से जीवन का संतुलन, विज्ञान केन्द्र में भारतीय ज्ञान प्रणालियों और पारंपरिक विज्ञान की विरासत और कला केन्द्र में भारतीय कला, संस्कृति एवं सौन्दर्य परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में विकसित किया जायेगा।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के.सुधांशु, डाॅ. आर.मीनाक्षी सुदंरम, सचिव धीराज गर्ब्याल, दीपक कुमार,डाॅ. आर. राजेश कुमार, श्रीमती रंजना राजगुरू, उपाध्यक्ष हरिद्वार-रूड़की विकास प्राधिकरण श्रीमती सोनिका, अपर सचिव बंशीधर तिवारी एवं वर्चुअल माध्यम से जिलाधिकारी हरिद्वार मयूर दीक्षित मौजूद रहे।

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