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सीएम धामी ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सुनीं समस्याएं, त्वरित एवं समयबद्ध समाधान के दिए निर्देश। 
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दून में सेवा संकल्प अभियान का पुरकुल गांव से आगाज, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सुनी समस्याएं।
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आंगनबाड़ी कार्यकत्रि हैं विभाग की मजबूत रीढ़, विषम परिस्थितियों में करती हैं अपने दायित्वों का निर्वहन, रेखा आर्या।
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मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखण्ड बनेगा, मुख्यमंत्री धामी।
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मुख्यमंत्री धामी से मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला ने की शिष्टाचार भेंट।
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खेल मंत्री रेखा आर्या ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन कर दिया खेल में आगे बढ़ने का संदेश, कहा युवा है देश का भविष्य।
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धामी सरकार की दूरगामी सोच, धार्मिक और पर्यटन स्थलों व 51 रोपवे के साथ 160 किमी लंबा नेटवर्क जोड़ने की तैयारी।
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राजेन्द्र नगर में नवनिर्मित पार्क का किया लोकार्पण, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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देवभूमि की लोक संस्कृति हमारी पहचान, नई पीढ़ी को जड़ों से जोड़ना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी, मुख्यमंत्री धामी।
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ऑपरेशन RAGEPILL’ के बाद एफडीए अलर्ट।

ऑपरेशन RAGEPILL’ के बाद एफडीए अलर्ट।

सहसपुर की कथित यूनिट के पास नहीं था एफडीए या एफएसएसएआई लाइसेंस, विभाग ने अवैध इकाइयों पर सख्ती बढ़ाने के दिए संकेत।

देहरादून :- देशभर में चर्चा में आए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के “ऑपरेशन RAGEPILL” के बाद उत्तराखंड का खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) भी पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ चलाए गए इस बड़े अभियान में करीब 182 करोड़ रुपये कीमत की प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग “कैप्टागन” बरामद की गई है। इस कार्रवाई में एक विदेशी नागरिक समेत दो लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स में देहरादून जनपद के सहसपुर क्षेत्र स्थित “ग्रीन हर्बल्स” नामक इकाई का नाम सामने आने के बाद खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि संबंधित संस्थान विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं था। विभाग के अनुसार उक्त यूनिट को न तो औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत कोई निर्माण लाइसेंस जारी किया गया था और न ही एफएसएसएआई के तहत किसी प्रकार की अनुमति प्रदान की गई थी।

एफडीए ने स्पष्ट किया कि यह मामला एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत प्रतिबंधित एवं कंट्रोल्ड सब्सटेंस से जुड़ा है, जिसका नियमन विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। विभाग ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है तथा राज्य स्तर पर भी संबंधित सूचनाओं को गंभीरता से लिया जा रहा है।

*क्या है ‘कैप्टागन’*

कैप्टागन एक सिंथेटिक साइकोट्रॉपिक ड्रग है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फेनेथाइलीन आधारित उत्तेजक पदार्थ माना जाता है। पश्चिम एशिया के कई संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में आतंकी संगठनों और अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क के उपयोग के कारण इसे “जिहादी ड्रग” के नाम से भी जाना जाता है। यह लंबे समय तक जागे रहने, भय कम करने और शरीर को अत्यधिक सक्रिय बनाए रखने के लिए कुख्यात रही है। भारत में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में इसकी बरामदगी ने केंद्रीय एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया है।

*एफडीए ने दी स्थिति स्पष्ट*

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कहा कि कैप्टागन किसी वैध औषधि की श्रेणी में नहीं आती और इसका विनियमन एफडीए के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। विभाग के अनुसार यह एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित पदार्थ है, जिसकी अवैध सप्लाई और तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। विभाग ने यह भी कहा कि प्रदेश में बिना अनुमति संचालित निर्माण इकाइयों और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। निरीक्षण अभियान नियमित रूप से चलाए जा रहे हैं और आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन एवं केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जाएगी।

*उत्तराखंड कनेक्शन की जांच तेज*

एनसीबी की शुरुआती जांच में मामला अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार बरामद खेप को पश्चिम एशिया भेजने की तैयारी थी। केंद्रीय एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि सहसपुर स्थित कथित यूनिट को किन माध्यमों से संचालित किया जा रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

*अवैध इकाइयों पर बढ़ेगी सख्ती*

मामले के सामने आने के बाद प्रदेश में बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों और अवैध निर्माण प्रतिष्ठानों पर निगरानी और सख्ती बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कहा है कि प्रदेश में वैधानिक अनुमति के बिना संचालित इकाइयों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

*अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी का बयान*

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि सहसपुर क्षेत्र में संचालित जिस “ग्रीन हर्बल्स” इकाई का नाम मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है, वह विभाग के रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं है। उक्त संस्थान को न तो औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के अंतर्गत कोई लाइसेंस जारी किया गया था और न ही एफएसएसएआई के तहत अनुमति दी गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैप्टागन जैसी प्रतिबंधित सामग्री का विभाग से कोई नियामकीय संबंध नहीं है, क्योंकि यह एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत कंट्रोल्ड सब्सटेंस की श्रेणी में आती है। उन्होंने कहा कि विभाग प्रदेश में बिना लाइसेंस संचालित इकाइयों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा है तथा आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन एवं केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर कार्रवाई की जाएगी।

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