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दो बूंद जिंदगी की- हर बच्चे की सुरक्षा का संकल्प, उत्तराखण्ड में पल्स पोलियो अभियान का आगाज़।
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खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने, हिमाद्रि आइस रिंक पहुंची खेल मंत्री रेखा आर्या।
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SIR अभियान को सफल बनाने के लिए, बूथ स्तर तक सक्रिय रहें कार्यकर्ता, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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सीएम धामी ने रुड़की में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के, मन की बात कार्यक्रम के 135वें संस्करण को सुना।
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धाकड़ व धुरंधर के बाद “धैर्यवान धामी, दो दिन तक हाई अलर्ट के बीच खुद संभाली कमान।
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भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ से मिले, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा व मुख्यमंत्री पुष्कर धामी पहुंचे शांतिकुंज हरिद्वार, श्रद्धेया शैलदीदी का लिया आशीर्वाद।
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हेमकुंड यात्रा मार्ग पर हुए विवाद में,  चारों गिरफ्तार निहंगों को मिली जमानत, वार्ता के बाद शांति बनाए रखने पर सहमति। 
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अंगदान मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ।
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धाकड़ व धुरंधर के बाद “धैर्यवान धामी, दो दिन तक हाई अलर्ट के बीच खुद संभाली कमान।

धाकड़ व धुरंधर के बाद “धैर्यवान धामी, दो दिन तक हाई अलर्ट के बीच खुद संभाली कमान।

दिल्ली, पंजाब व सिख प्रतिनिधियों से निरंतर संपर्क में रहे धामी।

देहरादून :- उत्तराखंड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अब तक अपने तेज फैसलों और सख्त प्रशासनिक शैली के कारण “धाकड़” और “धुरंधर” जैसे विशेषणों से पहचाने जाते रहे हैं। लेकिन कर्णप्रयाग विवाद के दौरान जिस संयम, धैर्य और संवाद आधारित रणनीति के साथ उन्होंने पूरे घटनाक्रम को संभाला, उससे उनकी एक नई पहचान “धैर्यवान धामी” के रूप में भी उभरकर सामने आई।

दो दिनों तक प्रदेश हाई अलर्ट पर रहा, लेकिन मुख्यमंत्री ने पूरी स्थिति की कमान स्वयं संभाले रखी। वे लगातार पुलिस मुख्यालय, शासन, केंद्र सरकार, पंजाब सरकार तथा सिख समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों के संपर्क में रहे। अकाल तख्त के साथ भी संवाद के सभी माध्यम खुले रखे गए, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न पनपे और धार्मिक भावनाएं आहत न हों। सरकार का स्पष्ट संदेश था कि कानून अपना काम करेगा, लेकिन किसी भी समुदाय की आस्था और सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

धामी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह भी थी कि कर्णप्रयाग की घटना का असर चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पर किसी भी रूप में न पड़े। दोनों यात्राएं उत्तराखंड की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का महत्वपूर्ण आधार हैं। इसी कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के साथ-साथ संवाद की प्रक्रिया भी लगातार जारी रखी गई।

सूत्रों के अनुसार, इसी रणनीति के तहत सिख समुदाय से जुड़े प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निहंग प्रतिनिधियों से वार्ता की विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई। उद्देश्य था तनाव को बढ़ने से रोकना, विश्वास बनाए रखना और पूरे मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने मुख्यमंत्री धामी की नेतृत्व शैली का एक अलग पक्ष सामने रखा। सख्त प्रशासनिक फैसलों के लिए चर्चित धामी ने इस बार धैर्य, संवाद और संतुलन के जरिए हालात संभालते हुए यह संदेश देने का प्रयास किया कि संकट की घड़ी में दृढ़ता और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं।

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