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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, अनधिकृत डंपिंग व मानकविहीन प्लांटों पर होगी कड़ी कार्रवाई, डीएम।
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औचक निरीक्षणः कोरोनेशन अस्पताल की बदहाली पर भड़के डीएम आशीष चौहान, व्यवस्थाएं सुधारने के दिए सख्त निर्देश।
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धामी सरकार का बड़ा फैसला, उत्तराखण्ड में मदरसा बोर्ड खत्म, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण शुरु, नई शिक्षा व्यवस्था लागू।
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डॉक्टर्स डे के अवसर पर प्रदेश के, 37 प्रतिष्ठित डॉक्टरों को किया गया सम्मानित।
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प्रधानमंत्री आवास योजना के कार्यों में तेजी, 45 दिन में आधारभूत सुविधाएं पूरी करने के निर्देश, डॉ. आर. राजेश कुमार।
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सुगम कर व्यवस्था, सशक्त भारत थीम पर, देहरादून में मनाया गया जीएसटी दिवस।
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मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं, आपदा राहत कार्यों के लिए प्रदान की ₹ 8.61 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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मानसून में लापरवाही नहीं होगी बर्दाश्त, जनसुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता, डीएम डॉ0 आशीष चौहान। 
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मानसून आपदा से निपटने की तैयारियों का होगा व्यापक परीक्षण, 2 जुलाई को जनपद के सात स्थानों पर मॉक ड्रिल।
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औचक निरीक्षणः कोरोनेशन अस्पताल की बदहाली पर भड़के डीएम आशीष चौहान, व्यवस्थाएं सुधारने के दिए सख्त निर्देश।

औचक निरीक्षणः कोरोनेशन अस्पताल की बदहाली पर भड़के डीएम आशीष चौहान, व्यवस्थाएं सुधारने के दिए सख्त निर्देश।

आईसीयू में एसी बंद, रजिस्टर अधूरे, वार्डों में गंदगी; डीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश।

लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी, तत्काल मिली इमरजेंसी चिकित्सा।

देहरादून :- जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बुधवार की रात ठीक 8ः00 बजे जिला कोरोनेशन अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लापरवाही, गंदगी और घोर अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं, जिस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ब्डव्) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (ब्डै) की एक संयुक्त समिति गठित कर तत्काल रिपोर्ट तलब की है।

*आईसीयू में उमस, रजिस्टर खाली और पीआरओ पर गिरी गाज*

जिलाधिकारी जब सबसे पहले आईसीयू वार्ड में पहुंचे, तो वहां की स्थिति बेहद चौंकाने वाली थी। जीवन रक्षक माने जाने वाले आईसीयू में मानक के विपरीत एयर कंडीशन बंद पड़ा था, जिससे मरीज उमस और सफोकेशन (घूटन) से बेहाल थे। हैरान करने वाली बात यह रही कि अस्पताल के पीआरओ (च्त्व्) को कई बार कहने के बाद भी एसी चालू नहीं कराया गया, जिस पर डीएम ने पीआरओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए सीएमएस से जवाब मांगा है। इसके अलावा, आईसीयू के स्टॉक रजिस्टर में 29 जून से दवाओं का कोई विवरण नहीं था और सिस्टर इंचार्ज आकस्मिक अवकाश पर पाई गईं। कार्मिकों के उपस्थिति रजिस्टर में भी भारी खामियां मिलीं।

*गंभीर मरीज को अनावश्यक रेफर करने पर जताई नाराजगी*

अस्पताल के बाल रोग कक्ष, पुरुष, महिला और सर्जरी वार्डों का हाल भी बदतर मिला। पुरुष वार्ड में लीवर की बीमारी से पीड़ित एक ऐसे मरीज को रेफर करने की तैयारी थी, जो अस्पताल में ही रिकवर हो सकता था। इस अनावश्यक रेफरल पर डीएम ने सख्त आपत्ति जताई। यही नहीं, मरीज को ओढ़ने के लिए फटी हुई कंबल दी गई थी, जिस पर अस्पताल मैटर्न से स्पष्टीकरण मांगते हुए सभी फटे कंबलों को तत्काल कंडम (नष्ट) करने का आदेश दिया गया।

अस्पताल की लिफ्ट में चारों तरफ पान की पीक और गंदगी पसरी थी, जबकि सुरक्षा के लिहाज से लिफ्ट में सीसीटीवी कैमरा तक नहीं लगा था। महिला शौचालय में पुरुष यूरिनल लगा देख जिलाधिकारी ने व्यवस्था पर भारी नाराजगी व्यक्त की।

*लावारिस मरीज के लिए देवदूत बने जिलाधिकारी*

सर्जरी वार्ड में जिलाधिकारी एक लावारिस मरीज के लिए साक्षात देवदूत बनकर पहुंचे। उस वक्त मरीज की हालत बेहद नाजुक थी और उसका शुगर लेवल 40ः से भी कम हो चुका था, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। मरीज के पास गंदगी का अंबार था और बासी खाने की प्लेटें छूटी हुई थीं। जिलाधिकारी की सक्रियता के चलते मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई। प्रशासनिक अमले के पहुंचने की भनक लगते ही डीएम के आने से महज पांच मिनट पहले वार्ड में आनन-फानन में पोछा लगाया जा रहा था।

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सीएमओ और सीएमएस को संयुक्त रूप से अस्पताल की इन सभी परिलक्षित कमियों और व्यवस्थागत खामियों को तत्काल दूर करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं, ताकि आम जनता को बेहतर और सम्मानजनक स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

इस दौरान जिलाधिकारी ने वार्ड में मरीजों से बात करते हुए उनका हाल जाना और अस्पताल से मिल रही सुविधाओं का फीडबैक भी लिया। निरीक्षण के दौरान आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी मनीष शर्मा सहित अस्पताल के अन्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे।

 

 

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