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धामी सरकार की झीलों को नई पहचान देने की तैयारी।
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जनपद में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार, घबराने की आवश्यकता नहीं-जिला पूर्ति अधिकारी।
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विकसित भारत 2047 सरकार का सपना ही नहीं बल्कि, 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है, नितिन नबीन।
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पूरे क्षेत्र की तस्वीर तकदीर बदललेगी सतपुली झील, महाराज।
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संघर्ष और समर्पण के सीख देता है खेल, रेखा आर्या।
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टपकेश्वर महादेव मंदिर में, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ की पूजा अर्चना, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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गंगा संरक्षण एवं स्वच्छता कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, प्रजेंटेशन में ही न ही बल्कि धरातल पर दिखें सकरात्मक परिणाम, डीएम।
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पार्टी विचार बढ़ाने के लिए सांसद और विधायक निभाए अहम योगदान, नवीन।
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उत्तराखंड में जंगल की आग होने लगी बेकाबू, चारों तरफ धुआं फैलने से परेशानी में लोग 

उत्तराखंड में जंगल की आग होने लगी बेकाबू, चारों तरफ धुआं फैलने से परेशानी में लोग 
लोगों के घरों तक पहुंच रही जंगलों की राख
वन संपदा का हुआ भारी नुकसान 
धुआं फैलने से श्वास रोगियों को हो रही समस्या 

देहरादून। उत्तराखंड में जंगल की आग अब बेकाबू होने लगी है। वहीं, आग लगने से जंगलों में धुआं फैलने लगा है। उत्तरकाशी, श्रीनगर सहित क्षेत्र के आसपास के जंगलों में लगी आग के कारण घाटी में धुआं फैलने से लोग खासे परेशान हैं, जबकि जंगलों की राख लोगों के घरों तक पहुंच रही है। श्रीनगर के पास डांग के जंगल में बृहस्पतिवार रात को आग लग गई थी, जिससे वन संपदा का भारी नुकसान हुआ है। नगर की ऊपरी पहाड़ियों के जंगल जलने से वहां की राख हवा में उड़कर लोगों के घरों तक पहुंच रही है।

वहीं जंगल की आग से देवप्रयाग क्षेत्र में धुआं फैला है। सीएचसी बागी के डॉ. नूतन प्रकाश पांडे का कहना है कि धुआं से सबसे अधिक समस्या श्वास के रोगियों को हो रही है। वहीं अस्पताल में बुखार, सरदर्द, खांसी, आंखों में जलन, घुटन आदि के रोगी भी बढ़ गए हैं। जनवरी माह से धधक रहे जंगलों से उठ रहा धुंआ पर्यावरण के साथ मानव व मवेशियों को बीमार रहा है। वातावरण में फैला घनी धुंध से दो सौ मीटर की दूरी तक साफ नहीं दिख रहा है।

वनाग्नि का कहर इस कदर है कि बच्छणस्यूं, रानीगढ़, धनपुर, क्यूंजा घाटी, तुंगनाथ घाटी, मद्महेश्वर घाटी, केदारघाटी, कालीमठ घाटी, भरदार, बड़मा, सिलगढ़, तल्लानागपुर में चीड़ बाहुल्य क्षेत्र में शायद ही कोई वन क्षेत्र हो, जो आग की चपेट में न आया हो। आग अब बांज, बुरांश के जंगलों को भी अपनी चपेट में लेने लगी है।

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