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पार्टी विचार बढ़ाने के लिए सांसद और विधायक निभाए अहम योगदान, नवीन।
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नीट परीक्षा की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह

नीट परीक्षा की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह

अजय दीक्षित
देश के प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एन.टी.ए) नीट परीक्षा आयोजित कराती है । (नेशनल एलिजिबिलिटी और इन्टरैंस टेस्ट) । इस वर्ष यह परीक्षा 7 मई को आयोजित हुई थी । परीक्षा के तत्काल बाद अनेक शहरों के छात्र-छात्राओं ने परीक्षा रद्द करके पुन: परीक्षा की मांग की । शुरू में तो केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने परीक्षा की पवित्रता पर प्रश्नचिन्ह उठाने वालों को नकारा । पर जैसे-जैसे समय बीतता गया मालूम हुआ कि वास्तव में पेपर लीक हुआ था । पिछले दिन बिहार में पकड़े गये एक छात्र ने बतलाया कि परीक्षा से पहली रात उसे जिन प्रश्नों के उत्तर रटवाये गये थे, अगले दिन परीक्षा में हू-ब-हू वही प्रश्न आये । इस छात्र का कहना है कि उसके फूफा ने उसे एक रात पहले कोटा से पटना बुलाया और उसे बिचौलिए ने लगभग 25-30 लाख रुपये लिये । अब पुलिस को धरपकड़ में और भी छात्र-छात्राओं ने स्वीकारा कि उन्हें पर्चा पहले से मालूम था ।

असल में टेस्ट की पूरी प्रक्रिया क्या है ? किसी एक व्यक्ति से पहले पेपर बनवाया जाता है । अब कहा जा रहा है कि कई व्यक्ति पेपर बनाते हैं और फिर कोई एक वरिष्ठ इन सभी प्रश्न पत्रों को मिलाकर एक नया पेपर तैयार करता है । इस व्यक्ति की विश्वसनीयता पर कोई शक नहीं कर सकता क्योंकि यह व्यक्ति बहुत वरिष्ठ और निष्ठावान होता है । अब प्रश्न पत्र टाइपकिया जाता है । कहा जाता है कि जो इसे टाइप करता है उसे परीक्षा होने तक एक प्रकार से कैद में रखा जाता है । या उस पर पूरी निगरानी रखी जाती है । अब प्रश्न पत्र छपने के लिए किसी प्रिंटिंग प्रेस को भेजा जाता है । इस प्रेस का नाम भी कोई नहीं जान सकता ।

फिर पेपर कहां से लीक होता है? कहते हैं कि विभिन्न केन्द्रों में जो पेपर पहले भेज दिये जाते हैं, उन केन्द्रों से कहीं पेपर पहले खोल कर उसे लीक किया जाता है । यद्यपि यह भी असंभव लगता है क्यों कि परीक्षा के दिन पेपर पर पर्यवेक्षकों के सामने खोल जाता है और उनके हस्ताक्षर लिये जाते हैं । फिर हर सेंटर पर एन.टी.ए. का एक प्रतिनिधि भी रहता है ? शायद पेपर बनाने वाले या टाइप करने वाले या केन्द्र से पेपर लीक होता है । इसकी जो जांच हो रही है वह गोपनीय है । अत: विश्वास पूरक यह कहना कठिन है कि पेपर कहीं से लीक होता है । बिहार, गुजरात और अन्यत्र पकड़े गये लडक़े और लड़कियों ने स्वीकारा है कि उन्हें परीक्षा की पहली रात पेपर रटाया गया था, अब कहते हैं कि इस माफिया ग्रुप को कई करोड़ का लेन-देन प्रकट हुआ है ।

यह प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है । 20 जून को हुई सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद अब आगामी तारीख 7 जुलाई को दी गई है । सुप्रीम कोर्ट ने चयन के लिए होने वाले साक्षात्कार पर रोक लगाने से अभी मना कर दिया है । पर जिस तरह से कुछ छात्रों ने पेपर लीक को स्वीकारा है तो क्या यह परीक्षा रद्द होगी । चलते-चलते खबर आई है कि यू.जी.सी. की नेट परीक्षा जो 16 जून को हुई थी उसे यू.जी.सी. ने निरस्त कर दिया है क्योंकि मंत्रालय को शक है कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई है ।

असल में इस परीक्षा के लिए विद्यार्थी बहुत मेहनत करता है । जो ज्यादा अंक पाते हैं उन्हें सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जाता है । यहां फीस भी कम लगती है और पढ़ाई का स्तर भी काफी ऊंचा है । प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फीस कई गुना ज्यादा है और वहां की फैकल्टी भी उतनी अच्छी नहीं होती । इससे आगे चलकर उस विद्यार्थी को पी.जी. में प्रवेश भी नहीं मिल पाता । सरकारी मेडिकल कॉलेज में पढ़े हुए को नौकरी भी अच्छे अस्पतालों में मिल जाती है ।

कुल प्रश्न बच्चों की मेहनत का है । कोटा या अन्यत्र इतना पैसा खर्च करके विद्यार्थी जो तैयारी करता है, वह व्यर्थ जाती है यदि परीक्षा रद्द कर दी जाती है । आगे आने वाले दिनों में ही पता चलेगा कि सरकार क्या निर्णय लेती है और सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाता है । परन्तु कुल मिलाकर देश के युवाओं के साथ नीट परीक्षा में खिलवाड़ ही हुआ है? शायद भविष्य में सरकार और सख्त कदम उठाये क्यों कि मोदी जी किसी भी भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टोलरेंस रखते हैं ।

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