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आंगन का मिलन” कार्यक्रम को महज कार्यक्रम नहीं, जनसेवा के महत्वपूर्ण अभियान के रूप में लें अधिकारी, रेखा आर्या।
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श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में पहुंची, दुनिया की सबसे छोटी नस्ल की नैनो गाय।
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बद्रीनाथ में बना आस्था का नया कीर्तिमान, धाम में पहली बार पहुंचे 17.79 लाख से अधिक श्रद्धालु। 
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पतंजलि आयुर्वेद गुरुकुलम् भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा के समन्वय का बनेगा सशक्त केंद्र, मुख्यमंत्री धामी।
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15 अक्टूबर तक गड्ढामुक्त होंगी उत्तराखंड की सड़कें, हर जिले में युद्धस्तर पर काम शुरू।
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नंदा-सुनंदा की भक्ति में सराबोर हुआ नैनीताल, मुख्यमंत्री धामी ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना।
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मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी में, एसजीआरआरयू के योग विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन।
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प्रदेश के 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलेगी आउट ऑफ टर्न नियुक्ति, जारी हुआ शासनादेश, रेखा आर्या।
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मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की, विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए, ₹ 16.88 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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हताश युवा क्या करें?

हताश युवा क्या करें?

भारत सरकार ने मान लिया है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए रूसी सेना ने कई भारतीय युवाओं की भर्ती की है। इस प्रकरण में उठा मुख्य मुद्दा यह है कि आखिर भारतीय नौजवान कहीं भी, कैसा भी काम पाने के लिए इतने व्यग्र क्यों हैं? भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की सेना ने कई भारतीय युवाओं की भर्ती की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे कम-से-कम 100 भारतीय नौजवान रूसी सेना में नौकरी कर रहे हैं। उनमें से कम-से-कम तीन को रूस ने मोर्चे पर तैनात किया है। यानी वे रूस की तरफ से युद्ध लड़ रहे हैं।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह संभवत: पहला मौका है, जब भारतीयों के सामूहिक रूप से भाड़े के सैनिक बनने की खबर आई है। सामने आईं जानकारियों के मुताबिक रूस की सेना ने दुबई के जरिए इन भारतीयों को अनुबंधित किया। रूस के गए नौजवानों के परिजनों का दावा है कि इन लोगों की नियुक्ति रूसी सेना की सहायता के लिए की गई थी, लेकिन यूक्रेन सीमा के पास ले जाकर उन्हें बताया गया कि उन्हें लड़ाई भी लडऩी है। मुद्दा उछलने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए भारत सरकार रूस की सेना के साथ संपर्क में है।

विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को आगाह किया है कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध से अपने आपको दूर रखें। लेकिन यह सलाह बेमतलब है। जब ये नौजवान रूस चले गए, तब वहां के हालात उनके अपने हाथ में नहीं होंगे। इसलिए विचारणीय प्रश्न यह है कि आखिर भारतीय नौजवान विदेशों में कहीं भी, कैसा भी काम पाने के लिए इतने व्यग्र क्यों हैं? आखिर खुद भारत सरकार ने युद्ध-ग्रस्त इजराइल में मेहनत-मजदूरी करने के लिए हजारों युवाओं को भेजने का करार किया है।

वहां जाने के लिए जुटी भीड़ में शामिल नौजावनों ने मीडिया से कहा था कि उन्हें इजराइल जाने का जोखिम मालूम है, लेकिन उन्हें लगता है कि ‘यहां भूखों मरने से बेहतर वहां काम करते हुए मरना है।’ असल मुद्दा युवाओं में समा गई यही मायूसी है। उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा में जो नजारा दिखा है, उससे आसानी से समझा जा सकता है कि ऐसी हताशा क्यों पैदा हो रही है। अगर यह स्थिति आज सार्वजनिक विमर्श में सर्व-मुख्य मुद्दा नहीं है, तो रूस गए नौजवानों की तमाम चिंताएं निरर्थक समझी जाएंगी।

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