Breaking News
चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ कालिका मंदिर में की पूजा-अर्चना। 
चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ कालिका मंदिर में की पूजा-अर्चना। 
स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने के लिए, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ और राज्य सरकार एकजुट।
स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने के लिए, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ और राज्य सरकार एकजुट।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, चार वर्ष के कार्यकाल पर दी राज्य सरकार को बधाई।  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, चार वर्ष के कार्यकाल पर दी राज्य सरकार को बधाई।  
शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में पदयात्रा का आयोजन।
शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में पदयात्रा का आयोजन।
कृषि मंत्री गणेश जोशी के सख्त निर्देश, किसानों के खातों में ससमय मिले एप्पल मिशन का बजट।
कृषि मंत्री गणेश जोशी के सख्त निर्देश, किसानों के खातों में ससमय मिले एप्पल मिशन का बजट।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने किया, दून अस्पताल का निरीक्षण व्यवस्थाओं की ली जानकारी।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने किया, दून अस्पताल का निरीक्षण व्यवस्थाओं की ली जानकारी।
चार साल बेमिसालः परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री धामी ने विभागीय स्टॉलों का किया अवलोकन।
चार साल बेमिसालः परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री धामी ने विभागीय स्टॉलों का किया अवलोकन।
मुख्यमंत्री ने किया ‘‘उत्तराखण्ड़ की मिट्टी से – नायक से जन नायक पुष्कर सिंह धामी’’ पंचाग टेबल कैलेंडर का विमोचन।
मुख्यमंत्री ने किया ‘‘उत्तराखण्ड़ की मिट्टी से – नायक से जन नायक पुष्कर सिंह धामी’’ पंचाग टेबल कैलेंडर का विमोचन।
पूरा हो रहा देवभूमि का गौरव पुनर्स्थापित करने का संकल्प, सीएम धामी।
पूरा हो रहा देवभूमि का गौरव पुनर्स्थापित करने का संकल्प, सीएम धामी।

हताश युवा क्या करें?

हताश युवा क्या करें?

भारत सरकार ने मान लिया है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए रूसी सेना ने कई भारतीय युवाओं की भर्ती की है। इस प्रकरण में उठा मुख्य मुद्दा यह है कि आखिर भारतीय नौजवान कहीं भी, कैसा भी काम पाने के लिए इतने व्यग्र क्यों हैं? भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए रूस की सेना ने कई भारतीय युवाओं की भर्ती की है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ऐसे कम-से-कम 100 भारतीय नौजवान रूसी सेना में नौकरी कर रहे हैं। उनमें से कम-से-कम तीन को रूस ने मोर्चे पर तैनात किया है। यानी वे रूस की तरफ से युद्ध लड़ रहे हैं।

स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह संभवत: पहला मौका है, जब भारतीयों के सामूहिक रूप से भाड़े के सैनिक बनने की खबर आई है। सामने आईं जानकारियों के मुताबिक रूस की सेना ने दुबई के जरिए इन भारतीयों को अनुबंधित किया। रूस के गए नौजवानों के परिजनों का दावा है कि इन लोगों की नियुक्ति रूसी सेना की सहायता के लिए की गई थी, लेकिन यूक्रेन सीमा के पास ले जाकर उन्हें बताया गया कि उन्हें लड़ाई भी लडऩी है। मुद्दा उछलने के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन भारतीयों को स्वदेश लाने के लिए भारत सरकार रूस की सेना के साथ संपर्क में है।

विदेश मंत्रालय ने भारतीय नागरिकों को आगाह किया है कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध से अपने आपको दूर रखें। लेकिन यह सलाह बेमतलब है। जब ये नौजवान रूस चले गए, तब वहां के हालात उनके अपने हाथ में नहीं होंगे। इसलिए विचारणीय प्रश्न यह है कि आखिर भारतीय नौजवान विदेशों में कहीं भी, कैसा भी काम पाने के लिए इतने व्यग्र क्यों हैं? आखिर खुद भारत सरकार ने युद्ध-ग्रस्त इजराइल में मेहनत-मजदूरी करने के लिए हजारों युवाओं को भेजने का करार किया है।

वहां जाने के लिए जुटी भीड़ में शामिल नौजावनों ने मीडिया से कहा था कि उन्हें इजराइल जाने का जोखिम मालूम है, लेकिन उन्हें लगता है कि ‘यहां भूखों मरने से बेहतर वहां काम करते हुए मरना है।’ असल मुद्दा युवाओं में समा गई यही मायूसी है। उत्तर प्रदेश में पुलिस भर्ती परीक्षा में जो नजारा दिखा है, उससे आसानी से समझा जा सकता है कि ऐसी हताशा क्यों पैदा हो रही है। अगर यह स्थिति आज सार्वजनिक विमर्श में सर्व-मुख्य मुद्दा नहीं है, तो रूस गए नौजवानों की तमाम चिंताएं निरर्थक समझी जाएंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top