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सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी से मिले, गढ़वाल राइफल्स के कर्नल ऑफ द् रेजिमेंट लेफ्टिनेंट जनरल दिनेश सिंह राणा।
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28 मार्च को रात 8:30 से 9:30 बजे तक, मनाया जाएगा ‘अर्थ ऑवर’।
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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने, सभी 13 जिलों के प्रभारी मंत्री किए नियुक्त।
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1 अप्रैल से चलेगा प्री-एसआईआर में मैपिंग का सघन अभियान, 85% मैपिंग लक्ष्य पूरा, कम मैपिंग वाले बूथ पर स्पेशल फोकस।
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शिक्षकों के वार्षिक स्थानांतरण का होमवर्क करे विभाग, डाॅ. धन सिंह रावत।
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आपदा प्रबंधन को लेकर जिला प्रशासन सक्रिय, संवेदनशील इलाकों में आपदा न्यूनीकरण कार्यो को मिली मंजूरी।
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कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने की, 22 लाख रुपये की घोषणाएं।
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राज्य में विकास को मिली नई गति, नियोजन विभाग की संस्तुति के उपरांत, मुख्यमंत्री ने बहु-क्षेत्रीय परियोजनाओं को दी स्वीकृति।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले सीएम पुष्कर धामी, उत्तराखंड आगमन का दिया निमंत्रण।
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महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के, नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में लगी भीषण आग, 10 मासूमों की मौत।

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के, नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में लगी भीषण आग, 10 मासूमों की मौत।
15 दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची
नवजातों को खिड़की के कांच तोड़कर निकाला बाहर 
देहरादून/झांसी :- महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एसएनसीयू) में देर रात भीषण आग लगने से 10 नवजात की मौत हो गई। जिस वार्ड में आग लगी थी, वहां 55 नवजात भर्ती थे। हादसे की सूचना मिलते ही करीब 15 दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। सेना को भी बुला लिया। रास्ता नहीं मिलने पर नवजातों को खिड़की के कांच तोड़कर बाहर निकाला गया। नवजातों को बचाने के लिए परिजन के बीच अफरातफरी मच गई। वे बच्चों को लेकर जाने लगे। नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष (एसएनसीयू) से आग की लपटें बाहर आतीं देख परिजन चीखते वार्ड को ओर दौड़ पड़े। कई परिजन लपटों की परवाह किए बगैर अंदर जा घुसे। फायरकर्मियों ने उनको बाहर किया। अफरातफरी के बीच दमकलकर्मी वार्ड के भीतर पहुंच सके।
उसके बाद वार्ड से भर्ती नवजात बाहर निकाले जाने लगे। नवजातों को बाहर निकालते ही कई परिजन बदहवास हाल में उनको उठाकर अपने साथ ले गए। एसएनसीयू वार्ड में जन्म के बाद पीलिया, निमोनिया से पीड़ित नवजात रखे जाते हैं। महज चंद घंटे की उम्र होने के नाते पहचान के लिए इनके हाथ में सिर्फ मां के नाम की स्लिप अथवा पांव में रिबन लगी होती है लेकिन, आगजनी के बाद अफरातफरी में अधिकांश नवजातों के हाथ की स्लिप निकल गई। इनको बाहर निकाला गया तो इनके पास कोई पहचान चिह्न नहीं था। अधिकांश परिजनों को जो नवजात मिला, उसे उठाकर वह ले गए।

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