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मुख्यमंत्री धामी ने वीर जवानों को अपने हाथों से खिलाई मिठाई, उनके साथ बाँटी दीपावली की खुशियाँ।
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मुख्यमंत्री ने तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा कर, आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित सुनिश्चित करने के दिए निर्देश।
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जेनी ने हरक सिंह रावत पर लगाया दुष्कर्म का आरोप, बेटे का दोबारा DNA टेस्ट कराने की मांग की। 
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भारत स्काउट एवं गाइड स्थापना दिवस पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को, प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से किया अलंकृत।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, विकसित भारत का पहला पड़ाव होगा उत्तराखंड।
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हाथीबड़कला बाजार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को मिष्ठान वितरित कर दीपावली दी शुभकामनाएं।
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अमित शाह का देवभूमि दौरा अत्यंत प्रेरणादायी, महाराज।
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राज्योत्सव समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का किया स्वागत एवं अभिनंदन।
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ओपिनियन और एग्जिट पोल सब गलत साबित हुए

ओपिनियन और एग्जिट पोल सब गलत साबित हुए

हरिशंकर व्यास
सोशल मीडिया में लगभग सन्नाटा है। यूट्यूब चैनल्स पर भी कोई खास शोर-शराबा नहीं है। मीडिया समूहों ने अपने चैनलों पर झारखंड विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान के बाद ओपिनियन पोल्स प्रसारित किए लेकिन किसी ने उन पर ध्यान नहीं दिया और न किसी ने उनको गंभीरता से लिया। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के आधार पर कोई भी पार्टी जीत का दावा भी नहीं कर रही है। मीडिया समूह खुद ही अपने सर्वेक्षण को लेकर भरोसे में नहीं हैं। सबसे दिलचस्प यह है कि लोकसभा चुनाव के समय तक जो ओपिनियन और एक्जिट पोल में जो बड़े नाम माने जाते थे वे तस्वीर से बाहर हो गए हैं। असल में लोकसभा चुनाव और उसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव ने तमाम सर्वे एजेंसियों, मीडिया समूहों, सोशल मीडिया के योद्धाओं और यूट्यूब चैनल्स के पक्षपाती व अपेक्षाकृत निष्पक्ष पत्रकारों को भी गलत साबित कर दिया। किसी को समझ में नहीं आया कि आखिर क्या हुआ।

चार महीने में दूसरी बार ज्यादातर मीडिया समूह, सर्वे एजेंसियां और सोशल मीडिया के राजनीतिक विश्लेषक गलत साबित हुए। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में ज्यादातर मीडिया समूहों और सर्वे एजेंसियों ने भाजपा की जीत की भविष्यवाणी की थी। कई समूह तो ऐसे थे, जिन्होंने एक्जिट पोल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अबकी बार चार सौ पार’ के नारे को साकार होता देखा था। भाजपा को तीन सौ से चार या उससे भी ज्यादा सीटें मिलने की भविष्यवाणी की जा रही थी। हालांकि ‘नया इंडिया’ के इसी ‘गपशप’ कॉलम में चार जून के नतीजों से ठीक पहले वाले शनिवार यानी एक जून को संभावित नतीजों की टेबल छपी थी, जिसमें भाजपा को 235 सीटें  मिलने का अनुमान लगाया गया था।

ओपिनियन और एक्जिट पोल सब गलत साबित हुए। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने 204 सीटें जीत ली और भाजपा 240 सीट पर रह गई। उसके बाद हुए हरियाणा और जम्मू कश्मीर के चुनाव में तमाम सर्वे एजेंसियों और मीडिया समूहों ने सावधानी बरती। फिर भी सब गलत साबित हुए। लगभग सभी सर्वेक्षणों में कांग्रेस को जीतते हुए दिखाया गया था। लेकिन सारी अटकलों को गलत साबित करते हुए भाजपा तीसरी बार जीत गई। उसके बाद दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक प्रतिक्रिया में कांग्रेस पर जोरदार हमला हुआ। राहुल गांधी के करीबी नेताओं पर टिकट बेचने और 10 तरह की गड़बड़ी के आरोप लगे। दूसरी प्रतिक्रिया ईवीएम के जरिए भाजपा के जीत जाने की थी।

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