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मुख्यमंत्री धामी ने पंचमुखी बजरंग बली के सामने झुकाया सिर, किया बजरंग बली का उद्घोष।
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धामी सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का किया गठन।
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धामी सरकार के नाम एक और कीर्तिमान, उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड।
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कोडीन युक्त कफ़ सिरप बिक्री पर, औषधि विभाग की सख्त कार्यवाही।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने, विधवा शांति राणा की 8वीं में पढ रही बेटी की, कक्षा 12 तक की एकमुश्त 1.62 लाख फीस कराई स्कूल प्रबन्धन के खाते में जमा।  
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शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 2364 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, आउटसोर्स के माध्यम से प्रत्येक विद्यालयों में होंगे तैनात।   
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केंद्रीय बजट, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व और नवाचार को नई दिशा देने वाला दस्तावेज, रुचि भट्ट। 
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जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर, पिटकुल को किया बैन XEN, ठेकेदार पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज।
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योजनाओं के क्रियान्वयन में लाएं तेजी, रेखा आर्या।
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ओपिनियन और एग्जिट पोल सब गलत साबित हुए

ओपिनियन और एग्जिट पोल सब गलत साबित हुए

हरिशंकर व्यास
सोशल मीडिया में लगभग सन्नाटा है। यूट्यूब चैनल्स पर भी कोई खास शोर-शराबा नहीं है। मीडिया समूहों ने अपने चैनलों पर झारखंड विधानसभा के लिए पहले चरण के मतदान के बाद ओपिनियन पोल्स प्रसारित किए लेकिन किसी ने उन पर ध्यान नहीं दिया और न किसी ने उनको गंभीरता से लिया। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के आधार पर कोई भी पार्टी जीत का दावा भी नहीं कर रही है। मीडिया समूह खुद ही अपने सर्वेक्षण को लेकर भरोसे में नहीं हैं। सबसे दिलचस्प यह है कि लोकसभा चुनाव के समय तक जो ओपिनियन और एक्जिट पोल में जो बड़े नाम माने जाते थे वे तस्वीर से बाहर हो गए हैं। असल में लोकसभा चुनाव और उसके बाद हरियाणा विधानसभा चुनाव ने तमाम सर्वे एजेंसियों, मीडिया समूहों, सोशल मीडिया के योद्धाओं और यूट्यूब चैनल्स के पक्षपाती व अपेक्षाकृत निष्पक्ष पत्रकारों को भी गलत साबित कर दिया। किसी को समझ में नहीं आया कि आखिर क्या हुआ।

चार महीने में दूसरी बार ज्यादातर मीडिया समूह, सर्वे एजेंसियां और सोशल मीडिया के राजनीतिक विश्लेषक गलत साबित हुए। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में ज्यादातर मीडिया समूहों और सर्वे एजेंसियों ने भाजपा की जीत की भविष्यवाणी की थी। कई समूह तो ऐसे थे, जिन्होंने एक्जिट पोल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘अबकी बार चार सौ पार’ के नारे को साकार होता देखा था। भाजपा को तीन सौ से चार या उससे भी ज्यादा सीटें मिलने की भविष्यवाणी की जा रही थी। हालांकि ‘नया इंडिया’ के इसी ‘गपशप’ कॉलम में चार जून के नतीजों से ठीक पहले वाले शनिवार यानी एक जून को संभावित नतीजों की टेबल छपी थी, जिसमें भाजपा को 235 सीटें  मिलने का अनुमान लगाया गया था।

ओपिनियन और एक्जिट पोल सब गलत साबित हुए। विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने 204 सीटें जीत ली और भाजपा 240 सीट पर रह गई। उसके बाद हुए हरियाणा और जम्मू कश्मीर के चुनाव में तमाम सर्वे एजेंसियों और मीडिया समूहों ने सावधानी बरती। फिर भी सब गलत साबित हुए। लगभग सभी सर्वेक्षणों में कांग्रेस को जीतते हुए दिखाया गया था। लेकिन सारी अटकलों को गलत साबित करते हुए भाजपा तीसरी बार जीत गई। उसके बाद दो तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। एक प्रतिक्रिया में कांग्रेस पर जोरदार हमला हुआ। राहुल गांधी के करीबी नेताओं पर टिकट बेचने और 10 तरह की गड़बड़ी के आरोप लगे। दूसरी प्रतिक्रिया ईवीएम के जरिए भाजपा के जीत जाने की थी।

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