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मुख्यमंत्री धामी ने वीर जवानों को अपने हाथों से खिलाई मिठाई, उनके साथ बाँटी दीपावली की खुशियाँ।
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मुख्यमंत्री ने तृतीय प्रवासी उत्तराखण्डी सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा कर, आयोजन भव्य, सुव्यवस्थित सुनिश्चित करने के दिए निर्देश।
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जेनी ने हरक सिंह रावत पर लगाया दुष्कर्म का आरोप, बेटे का दोबारा DNA टेस्ट कराने की मांग की। 
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भारत स्काउट एवं गाइड स्थापना दिवस पर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखण्ड पुलिस को, प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से किया अलंकृत।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, विकसित भारत का पहला पड़ाव होगा उत्तराखंड।
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हाथीबड़कला बाजार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को मिष्ठान वितरित कर दीपावली दी शुभकामनाएं।
हाथीबड़कला बाजार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने, व्यापारियों और स्थानीय लोगों को मिष्ठान वितरित कर दीपावली दी शुभकामनाएं।
अमित शाह का देवभूमि दौरा अत्यंत प्रेरणादायी, महाराज।
अमित शाह का देवभूमि दौरा अत्यंत प्रेरणादायी, महाराज।
राज्योत्सव समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का किया स्वागत एवं अभिनंदन।
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चुनाव से ठीक पहले

चुनाव से ठीक पहले

सीएए को सिर्फ सीमित चुनावी नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। बल्कि यह भाजपा की वैचारिक परियोजना का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसके जरिए भारतीय नागरिकता को तय करने वाली कसौटियों में अब धर्म एक पहलू बन गया है। केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू कर दिया है। इसके लिए जरूरी नियम जारी कर दिए गए हैँ। जाहिर है, ये कदम 18वें आम चुनाव से ठीक पहले उठाया गया है। खबरों के मुताबिक हफ्ते भर के अंदर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होने वाली है। उस पृष्ठभूमि में इसे सरकार और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के एक चुनावी कदम के रूप में देखा जा सकता है। महजबी आधार पर ध्रुवीकरण भाजपा की एक प्रमुख राजनीतिक ताकत है।

अगर चार साल पहले की घटनाओं पर- जब सीएए पारित हुआ था- गौर करें, तो तब इस कानून के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसमें मुस्लिम समुदाय ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। उसी सिलसिले में दिल्ली में दंगा भी हुआ। इससे सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हवा मिली थी। कानून लागू होने के साथ उन सारी घटनाएं की याद ताजा हो सकती है। इसके अलावा अगर फिर से इस कानून का विरोध हुआ, तो ऐसा माहौल और अधिक गरमा सकता है। बहरहाल, इस कानून को सिर्फ इस सीमित नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। बल्कि यह भाजपा की वैचारिक परियोजना का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

इसके जरिए भारतीय नागरिकता को तय करने वाली कसौटियों में अब धर्म एक पहलू बन गया है। इस कानून के तहत अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से भारत आने वाले गैर-मुस्लिम व्यक्ति भारतीय नागरिकता के लिए अर्जी दे सकेंगे। इस तरह मजहब नागरिकता तय करने की एक कसौटी बन जाएगा। समझा जा सकता है कि यही व्यवस्था करना इस कानून का मुख्य मकसद है।

वरना, अगर उद्देश्य पड़ोसी देशों में उत्पीडि़त व्यक्तियों को राहत देना होता, तो फिर इस कानून के दायरे में श्रीलंका और म्यांमार को भी शामिल किया जाता- जहां अधिकतर उत्पीडि़त व्यक्ति हिंदू धर्म को मानने वाले होते हैं। जाहिर है, कानून उत्पीडि़त शरणार्थियों को राहत देने के लिए नहीं, बल्कि भारतीय राज्य के मूलभूत स्वरूप में परिवर्तन के लिए बनाया गया है। भाजपा का हमेशा से यह एक वैचारिक उद्देश्य रहा है। इस बीच चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने इसके खिलाफ दायरे याचिकाओं को लटका रखा है, इसलिए सरकार के इस ओर बढऩे का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

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