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सख्त नकल विरोधी कानून पर, आधारित शॉर्ट फिल्म ‘आखिरी कोशिश’ रिलीज। 
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Wings India 2026 में उत्तराखंड को, “Best State for Promotion of Aviation Ecosystem” सम्मान।
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सूबे के 544 नये विद्यालयों में संचालित होंगे व्यावसायिक पाठ्यक्रम।
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उत्तराखंड कांग्रेस का भ्रष्टाचार, अपराध और बेरोज़गारी के खिलाफ, 16 फरवरी को राजभवन घेराव का ऐलान। 
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राष्ट्रपति निकेतन देहरादून में, परिवहन विभाग द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, 2026 के अंतर्गत ऐतिहासिक जनजागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न।
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मुख्यमंत्री धामी ने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी, विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स, इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड का किया फ्लैग ऑफ।
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गौमाता में बसती है सनातन की आत्मा, महाराज।
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मोदी-शाह राज में सब मुमकिन

मोदी-शाह राज में सब मुमकिन

हरिशंकर व्यास
इस सप्ताह नीतीश कुमार को भारत रत्न देने का कयास सुना तो वही उद्धव ठाकरे ने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की। जबकि सरकार ने सर्वत्र अंबेडकर, अंबेडकर, अंबेडकर का कीर्तन बनाया हुआ है। तो क्यों नहीं मोदी सरकार अपने दिल में बसे डॉ. भीमराव अंबेडकर को दिखाने के लिए इस जनवरी उनके पोते प्रकाश अंबेडकर को भारत रत्न से नवाज देती है? हालांकि कांशीराम, मायावती भी दलितों के आईकॉन हैं!

हां, मोदी-शाह राज में सब मुमकिन है। आखिर यथा राजा तथा प्रजा के सत्य में टके सेर भाजी टके सेर खाजा भी तो हम हिंदुओं का इतिहासजन्य अनुभव है। कुछ भी संभव है! बस, राजा के कान में हेडलाइन’ का मंत्र फूंक जाए। सोचें, अंबेडकर शब्द के मंत्र पर! भाजपा जन्म से आज तक कभी भी अंबेडकर के नाम पर, दलित वोटों से नहीं जीती। हमेशा रामजी, हिंदू वोट, हिंदू राजनीति से जीती। नरेंद्र मोदी और अमित शाह को न गुजरात में, न बनारस में कभी थोक दलित वोट मिले और न हाल में महाराष्ट्र, झारखंड के चुनावों में मिले। यह भी सत्य है कि संविधान पर हुई बहस में अमित शाह के कहे में कुछ भी गलत नहीं था।

अमित शाह का कहना था- हमारे संविधान को कभी भी अपरिवर्तनशील नहीं माना गया। समय के साथ साथ देश भी बदलना चाहिए। समय के साथ कानून भी बदलने चाहिए और समय के साथ साथ समाज भी बदलना चाहिए।ज्अब ये एक फ़ैशन हो गया है। आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकरज् इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।

भाषण का यह अंश संसद कार्यवाही का हिस्सा है। तब नरेंद्र मोदी और अमित शाह के कान में किसने यह मंत्र फूंका कि राहुल गांधी के इस ट्विट (मनुस्मृति मानने वालों को अंबेडकर जी से तकलीफ़ बेशक होगी ही) से दलित भडक़ेंगे? और भविष्य में प्रधानमंत्री बनने का आपका सपना बिखर जाएगा इसलिए जरूरी है कि कांग्रेस को अंबेडकर विरोधी करार देने के लिए भाजपा पिल पड़े! तभी संसद परिसर मानों आर-पार की लडाई का पानीपत हुआ। सोचें, बैठक खाने में सावरकर, चाणक्य की तस्वीर लगाए अमित शाह की अंबेडकर पर पहले स्पष्टवादिता, फिर रक्षात्मक, आक्रामक होने की इस राजनीति पर। भला राहुल गांधी, खडग़े के मनुस्मृति के जुमले से भाजपा का क्या कोई वोट खराब होता है? अंबेडकर का पोता प्रकाश अंबेडकर दशकों की दलित राजनीति के बावजूद आज भी जीरो है। मायावती जब तक तिलक, तराजू और तलवार इनको मारो जूते चार का नारा लगाती थी तब तक सडक़ पर रही और मनुस्मृति के वंशज ब्राह्मणों को हाथी नहीं गणेश का नारा लगा पटाया तो सत्ता में आईं!
ऐसे ही आरएसएस के लाठीधारियों के लिए हमेशा पूजनीय यदि सावरकर, हेडगेवार और गोलवलकर थे और उन्हीं की बदौलत अंतत: हिंदू राजनीति को केंद्र का शासन मिला तो मोदी-शाह को सावरकर के सत्य पर अटल रहना चाहिए था या कांग्रेस पर यह पलट वार करना था कि हम असली अंबेडकरवादी हैं और कांग्रेस ने उन्हें धोखा किया जबकि हमने अंबेडकर को भारत रत्न दिया!

तभी नैरेटिव के अधबीच उद्धव ठाकरे का संघ परिवार को यह थप्पड़ है जो (सावरकर पर राहुल गांधी की टिप्पणी के ताजा संदर्भ में) उन्होंने सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने देश-दुनिया को बताया है कि मोदी राज अंबेडकर, अंबेडकर तो कर रहा है लेकिन जिस हिंदुवाद तथा संघ परिवार की बदौलत मोदी-शाह सत्ता भोग रहे हैं उसके पितामह सावरकर को अभी तक इस मोदी राज ने भारत रत्न क्यों नहीं दिया? अंबेडकर को दिया और उन्हें नहीं दिया तो यह कथित हिंदुत्व, हिंदू राजनीति की अहसानफरामोशी है या नहीं? जब प्रणब मुखर्जी से कर्पूरी ठाकुर तक तमाम लोगों को भारत रत्न बांट दिए तो आरएसएस के हेडगेवार, गोलवलकर को भी बांट देते? ये क्या अंबेडकर, अंबेडकर कर उनसे अपनी वफादारी दिखा रहे हैं? वही यदि अपने सावरकर, हेडगेवार, गोलवलकर का ही नाम ले लिया होता तो कम से कम अपने वंश, अपनी विचारधारा के तो सगे कहलाते!

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