देहरादून :- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड द्वारा 12 योगाचार्य को सम्मानित किया गया। ब्राह्मण महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन शर्मा प्रेस को जानकारी देते हुए कहा कि आज ऋषि कल्प आश्रम चंद्रमणि में ब्राह्मण एकत्र हुए और अखिल भारतवर्षित ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करने से पहले भगवान परशुराम जी की जय घोष से हुई,साथ ही इस अवसर पर 12 योगाचार्य को भी सम्मानित किया गया।
सभी सम्मानित हुए योगाचार्य निम्नवत है, योगाचार्य एवं आयुर्वेदाचार्य अरुण कुमार, आचार्य विपिन जोशी, आचार्य शशिकांत दुबे, सुधीर आर्य, एलएस रावत, सीता रानी, माहेश्वरी पवार, कुसुम रावत, पुष्पा डंगवाल, विनीता गोसाई, रमेश शर्मा, श्रीमती मंजू शर्मा को सम्मानित किया गया।
उसके उपरांत सभी वक्ताओं ने अपने अपने विचारों से योग के बारे में सभी को संबोधित करते हुए बताया कि प्रत्येक दिन अगर योग साधक नित्य प्रतिदिन योग करता है तो उसकी कई सारी बीमारियां दूर हो जाती है और कहा कि करो योग रहो निरोग।
इस अवसर पर लालचंद शर्मा ने कहा की योग हमारी पुरानी पद्धति है, जिसको हम भूलते जा रहे हैं अगर आज उसको अपने जीवन में अपना ले तो हमें किसी डॉक्टर के पास जाने की आवश्यकता नहीं है। प्रत्येक दिन अगर हम योग करते हैं तो योग करने से हमारी काफी बीमारियां दूर हो जाती है हम अपने जीवन को बचा सकते हैं।
पंडित मनमोहन शर्मा ने बताया कि अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड ने योग पर एक गाना भी लॉन्च किया। जिसको विभु शर्मा ने गया है और गाने के बोल हैं तन का मंथन मां का मंथन आचार्य अरुण कुमार जी ने गाने का शुभारंभ किया। और मनमोहन शर्मा ने कहा कि समाज में जो भी जनमानस समाज की सेवा में समर्पित है उनको सम्मानित करने का काम भी अखिल भारत वर्षीय ब्राह्मण महासभा उत्तराखंड कर रही है। साथ ही कहा कि शास्त्रों को सीखने के लिए पहले योग फिर हवन और फिर शास्त्र का ज्ञान प्रत्येक रविवार को दिया जाएगा और शाम को शास्त्र की विद्या निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी यह व्यवस्था ऋषि कल्प आश्रम में की जा रही है।
इस अवसर पर सम्मान समारोह में मुख्य रूप से आचार्य अरुण कुमार, सुधीर आर्य, पंडित मनमोहन शर्मा, वि डी झा, उमाशंकर, शशिकांत दुबे, पीयूष गॉड, इंदु शर्मा, अरुण बाला शर्मा, नीलू रावत, कमलजीत शर्मा, सोनू शर्मा, विनोद,आनंद सरस्वती, सुधीर आर्य आदि उपस्थित रहे।
