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कल पांच जनपदों के लिए ऑरेंज अलर्ट, सचिव आपदा प्रबंधन ने अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने के दिए निर्देश।
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मुख्यमंत्री धामी ने यूपीसीएल व पिटकुल की समीक्षा बैठक में, वित्तीय स्थिति में सुधार और लंबित देनदारियों के भुगतान में तेजी लाने के दिए निर्देश।
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मुख्य सचिव की अध्यक्षता में व्यय वित्त समिति की हुई बैठक, पांच प्रस्तावों को मिली मंजूरी।
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सीएम धामी के निर्देश पर चलाए गए नामांतरण अभियान से, प्रदेश के आमजन को मिली राहत।
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 बुक्सा जनजाति के 46 गांवों के परिवारों को मिलेगा आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाओं का लाभ, डीएम डा. आशीष चौहान। 
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मुख्यमंत्री धामी ने लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव के समापन समारोह में किया प्रतिभाग।
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त्योहारी सीजन में खाद्य संरक्षा विभाग का बड़ा अभियान, मिठाइयों से मिड-डे मील तक 32 नमूने जांच को भेजे।
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मुख्यमंत्री ने भराड़ीसैंण विधानसभा में की प्रेस वार्ता, कहा विपक्ष को सदन की गरिमा और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का करना चाहिए सम्मान।
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मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं, निर्माण कार्यों के लिए ₹ 36 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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उत्तराखंड में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने हटाई रोक – राज्य निर्वाचन आयोग जल्द जारी करेगा नई तारीखें।

उत्तराखंड में पंचायत चुनाव का रास्ता साफ, हाईकोर्ट ने हटाई रोक – राज्य निर्वाचन आयोग जल्द जारी करेगा नई तारीखें।

देहरादून/नैनीताल :-  उत्तराखंड में लंबे समय से अटके त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर अब स्थिति स्पष्ट हो गई है।लगभग एक सप्ताह की कशमकश के बाद उत्तराखण्ड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। नौकरशाही की लापरवाही से संकट में फंसी धामी सरकार को आज हाईकोर्ट ने बहुत भारी राहत दे दी है।

शुक्रवार को नैनीताल हाईकोर्ट में सरकार की ओर से पेश किये गए आरक्षण रोस्टर समेत अन्य दस्तावेजों पर चली सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर सहमति दे दी।

गौरतलब है कि 21 जून को पंचायत चुनाव की घोषणा के बाद 23 जून को हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए सरकार से आरक्षण समेत कई बिंदुओं पर जवाब तलब कर तगड़ा झटका दे दिया था। बहरहाल, उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर आज उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अहम सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने राज्य सरकार को अंतरिम राहत देते हुए पंचायत चुनाव संपन्न कराने की अनुमति प्रदान की है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ताओं ने कोर्ट को अवगत कराया कि पंचायत चुनाव की पूरी तैयारी की जा चुकी है और कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने कुछ तकनीकी एवं संवैधानिक मुद्दों को उठाया।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने फिलहाल चुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। हाईकोर्ट के इस फैसले से सरकार को जहां बड़ी राहत मिली है, वहीं राज्य निर्वाचन आयोग को अब चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। यह फैसला राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायती व्यवस्था को समयबद्ध रूप से लागू करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उच्च न्यायालय ने पंचायत चुनावों पर स्थगन आदेश किया था

23 जून 2025 को हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जी. नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाई, क्योंकि सरकार ने आरक्षण की नई रोटेशन प्रणाली के लिए चाहिए गज़ट नोटिफिकेशन जारी नहीं किया था।अदालत ने सरकार से जवाब तलब किया, और कहा कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन है तब कैसे चुनाव की तिथियाँ घोषित की गईं?

आरक्षण को लेकर विवाद – रोटेशन सिस्टम बदलने का मुद्दा

याचिकाकर्ता गणेश दत्त कांडपाल ने तर्क दिया कि पुरानी रोटेशन नीति तीन कार्यकालों के बाद सीटें बदलती थी, लेकिन सरकार ने इसे रद्द करके कुछ सीटों को चौथे कार्यकाल के लिए भी आरक्षित कर दिया—यह ‘रोटेशन के मूल सिद्धांत’ के खिलाफ है।

सरकार ने गज़ट नोटिफिकेशन हाई कोर्ट में पेश किया

राज्य सरकार द्वारा कहा गया कि गज़ट नोटिफिकेशन 14 जून 2025 को हुआ था, लेकिन “कम्युनिकेशन गैप” के कारण अदालत को समय पर सूचना नहीं मिली। गज़ट की प्रतिलिपि अदालत को सौंपी गई।

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