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धामी सरकार की झीलों को नई पहचान देने की तैयारी।
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जनपद में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त भंडार, घबराने की आवश्यकता नहीं-जिला पूर्ति अधिकारी।
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उच्च शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं है, बल्कि विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत के निर्माण की आधारशिला, मुख्यमंत्री धामी।
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विकसित भारत 2047 सरकार का सपना ही नहीं बल्कि, 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है, नितिन नबीन।
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पूरे क्षेत्र की तस्वीर तकदीर बदललेगी सतपुली झील, महाराज।
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संघर्ष और समर्पण के सीख देता है खेल, रेखा आर्या।
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टपकेश्वर महादेव मंदिर में, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ की पूजा अर्चना, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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गंगा संरक्षण एवं स्वच्छता कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, प्रजेंटेशन में ही न ही बल्कि धरातल पर दिखें सकरात्मक परिणाम, डीएम।
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पार्टी विचार बढ़ाने के लिए सांसद और विधायक निभाए अहम योगदान, नवीन।
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SGRRU में शोध लेखन एवं एआई के प्रयोग पर, कार्यशाला का हुआ आयोजन।

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देहरादून :- श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के इंटरनल क्वालिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में लाइब्रेरी इन्फार्मेशन रिसोर्स सेंटर एवं एलसेवियर संस्थान के संयुक्त प्रयास से फैकल्टी सदस्यों एवं शोधार्थियों के लिए “साइंस डाइरेक्ट ऑनबोर्डिंग एंड ऑथर” विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें एलसेवियर में प्रकाशन संबंधी विभिन्न जानकारियां दी गई। एलसेवियर की ओर से कस्टमर सक्सेस मैनेजर साउथ एसिया डॉ. नितिन घोसाल ने उपस्थित शोधकर्ताओं एवं फैकल्टी सदस्यों को बताया कि साइंस डायरेक्ट क्या है। इसमें नए फीचर क्या क्या हैं और यह किस तरह से शोधकर्ताओं के लिए फायदमंद है। उन्होंने कहा कि एलसेवियर की तरह अन्य प्रकाशन भी एआई का प्रयोग कर रहे हैं परंतु एलसेवियर के रेफरेंस ज्यादा भरोसेमंद होते हैं। शोधकर्ताओं के लिए साइंस डायरेक्ट एआई की मदद से संबंधित साहित्य भी खोजना अब आसान हो गया है। डॉ. नितिन ने कहा कि एआई की मदद लेना अच्छा है लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहा जा सकता। इस पर नियंत्रण भी जरूरी है। कार्यक्रम का उद्घाटन एसबीएएस ऑडीटोरियम पटेलनगर में दीप प्रज्जवलित कर किया गया। अंत में शोध से संबंधित एक क्विज का भी आयोजन किया गया जिसमें डा. भवना का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ रहा।

इस मौके आईक्यूएसी डायरेक्टर प्रो. सोनिया गंभीर, लाईब्रेरियन डॉ. अमिता सकलानी, प्रो. विपुल जैन, प्रो. अरूण कुमार, प्रो. ओम नारायण तिवारी सहित कई फैकल्टी सदस्य एवं शोधार्थी मौजूद रहे।

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