देहरादून :- कॉंग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने कहा कि मसूरी स्थित ऐतिहासिक जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट में एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देने के नाम पर उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश की जनता के साथ खुला विश्वासघात किया है। यह केवल टेंडर नहीं, बल्कि प्रदेश की जमीन और संसाधनों को बाबा रामदेव और उनके खास साझेदार आचार्य बालकृष्ण के हवाले करने की साजिश है।
एक मीडिया जांच ने साफ़ कर दिया है कि इस परियोजना के लिए बोली लगाने वाली तीनों कंपनियाँ – राजस एयरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स प्रा. लि., प्रकृति ऑर्गेनिक्स इंडिया लि., और भरुवा एग्री साइंस प्रा. लि. – सीधे तौर पर आचार्य बालकृष्ण से जुड़ी हुई हैं। जब तीनों कंपनियों का मालिकाना हक़ एक ही व्यक्ति के पास हो, तो यह टेंडर प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि धांधली है।
* लालचंद शर्मा ने किए सवाल :*
सरकार ने “एंटी-कोल्यूजन क्लॉज” की धज्जियाँ उड़ाकर यह टेंडर क्यों पास किया?
जब हारी हुई दो कंपनियों में आचार्य बालकृष्ण की हिस्सेदारी 99% से अधिक थी और विजेता कंपनी राजस में उनकी हिस्सेदारी टेंडर के समय 25% से बढ़कर 69.43% कर दी गई, तो क्या यह सीधे-सीधे नियमों और पारदर्शिता का उल्लंघन नहीं है?
हजारों करोड़ की संभावित कीमत वाली इस परियोजना को मात्र 1 करोड़ रुपये सालाना किराए पर 15 साल के लिए क्यों दे दिया गया? क्या यह जनता के खजाने को लूटने का तरीका नहीं है?
यह धामी सरकार का एक और काला अध्याय है, जहाँ उत्तराखंड की धरोहरों को औने-पौने दामों में बाबा रामदेव और उनके सहयोगियों को सौंपा जा रहा है।
लालचंद शर्मा का स्पष्ट कहना है कि यह सीधा-सीधा घोटाला है। प्रदेश की जनता पूछ रही है—क्या सरकार पतंजलि के कारोबार को फायदा पहुँचाने के लिए काम कर रही है या जनता की सेवा के लिए?
हम मांग करते हैं कि इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाई जाए और जांच होने तक इस टेंडर को रद्द किया जाए। यदि सरकार ने कार्रवाई नहीं की तो कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर जनांदोलन करेगी।
