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गुरु रविदास जयंती की पूर्वसंध्या पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का संदेश।
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जन सुरक्षा व सुविधा सर्वोपरि, मानकों की अनदेखी हुई तो एजेंसियों के विरुद्ध जब्ती व विधिक कार्रवाई तय, डीएम सविन बंसल।
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शिक्षा ही एक ऐसा टूल, हथियार जिससे निकलते हैं सशक्तिकरण, सफलता के रास्ते, डीएम सविन बसंल।
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कोटद्वार में मुख्यमंत्री की बड़ी सौगात, 326 करोड़ से अधिक की 61 योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास।
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सीएम धामी के विकास विजन को, धरातल पर उतारने में जुटे आवास सचिव, हरिद्वार में हुई एचआरडीए के कार्यों की अहम समीक्षा बैठक।
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लोक संस्कृति को विकास से जोड़ने की दिशा में सरकार निरंतर कार्यरत, मुख्यमंत्री धामी। 
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शीतकालीन यात्राः आस्था के पथ पर नया अध्याय।
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मार्शल आर्ट में उत्तराखंड का भविष्य उज्जवल, रेखा आर्या।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को मुख्यमंत्री धामी और, पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने दी जन्मदिन की बधाई।
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भैया दूज पर बंद हुए श्री यमुनोत्री धाम के कपाट, अब छह महीने खरसाली में होगी माँ यमुना की पूजा अर्चना।

भैया दूज पर बंद हुए श्री यमुनोत्री धाम के कपाट, अब छह महीने खरसाली में होगी माँ यमुना की पूजा अर्चना।

देहरादून/उत्तरकाशी :- भैया दूज के पावन पर्व पर आज गुरुवार दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ विश्व प्रसिद्ध श्री यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए विधिवत बंद कर दिए गए।

कपाट बंद होने के अवसर पर सुबह से ही धाम में विशेष पूजा-अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम चलता रहा। परंपरा के अनुसार, प्रातः काल मां यमुना के भाई शनिदेव महाराज की डोली वाद्य यंत्रों की गूंज और जयकारों के बीच खरसाली गांव से यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई। कपाट बंद होने के उपरांत मां यमुना की भोग मूर्ति को डोली में विराजमान कर शनिदेव समेश्वर महाराज की अगुवाई में वापस खरसाली लाया गया। अब अगले छह माह तक श्रद्धालु वहीं मां यमुना के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

इस पावन क्षण के साक्षी देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालु और तीर्थ पुरोहित बने। श्री यमुनोत्री धाम मंदिर समिति ने इस वर्ष यात्रा के सफल संचालन के लिए तीर्थयात्रियों, प्रशासन, पुलिस बल और स्थानीय लोगों का आभार व्यक्त किया।

इस वर्ष कपाटोद्घाटन से कपाटबंदी तक 6,44,366 तीर्थयात्रियों ने मां यमुना के दर्शन किए। वहीं जनपद उत्तरकाशी के दोनों धामों, श्री यमुनोत्री और श्री गंगोत्री में कुल 14,01,218 श्रद्धालु पहुंचे, जो उत्तराखंड की धार्मिक आस्था और पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता का प्रतीक है।

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