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मुख्यमंत्री धामी ने गोरखा दशैं-दीपावली महोत्सव एवं राजकीय मेले में किया प्रतिभाग।
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खिलाड़ियों की मेहनत और प्रतिभा उत्तराखंड को खेलभूमि के रूप में दिलाएगी नई पहचान, रेखा आर्या।
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त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, 83 खाद्य पदार्थों की जांच में 15 मानकों पर नहीं उतरे खरे।
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वीर केसरी चन्द के 107वे जन्मदिवस पर श्रद्धा-सुमन किए अर्पित, मंत्री खजानदास।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी कौथिग 2026’ में हुए शामिल, लोकसंस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर।
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क्षेत्र पंचायत निधि पुनः प्रारंभ करने तथा क्षेत्र पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए की जाएगी कार्यवाही, मुख्यमंत्री।
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मुख्यमंत्री ने खेल महाकुम्भ एवं मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी के समापन समारोह में किया प्रतिभाग।
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मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं, निर्माण कार्यों के लिए ₹ 805 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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राजपुर वार्ड में विकास योजनाओं का किया शिलान्यास, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
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उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) में, संशोधन अध्यादेश 2026 लागू।

उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) में, संशोधन अध्यादेश 2026 लागू।

देहरादून :- उत्तराखण्ड सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता, उत्तराखण्ड 2024 में आवश्यक संशोधनों हेतु समान नागरिक संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति के उपरांत लागू कर दिया गया है। यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 213 के अंतर्गत माननीय राज्यपाल उत्तराखण्ड लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा जारी किया गया है तथा यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।अध्यादेश के माध्यम से संहिता के विभिन्न प्रावधानों में प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक एवं दंडात्मक सुधार किए गए हैं, जिससे समान नागरिक संहिता के प्रभावी, पारदर्शी एवं सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके।

*प्रमुख बिंदु —*

1- आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 के स्थान पर अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय न्याय संहिता, 2023 को लागू किया गया है।

2- धारा 12 के अंतर्गत ‘‘सचिव’’ के स्थान पर ‘‘अपर सचिव’’ को सक्षम प्राधिकारी नामित किया गया है।

3- उप-पंजीयक द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्यवाही न किए जाने की स्थिति में प्रकरण स्वतः पंजीयक एवं पंजीयक जनरल को अग्रेषित किए जाने का प्रावधान किया गया है।

4- उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के विरुद्ध अपील का अधिकार प्रदान किया गया है तथा दंड की वसूली भू-राजस्व की भांति किए जाने का प्रावधान जोड़ा गया है।

5- विवाह के समय पहचान से संबंधित गलत प्रस्तुति को विवाह निरस्तीकरण का आधार बनाया गया है।

6- विवाह एवं लिव-इन संबंधों में बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा विधि-विरुद्ध कृत्यों के लिए कठोर दंडात्मक प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

7- लिव-इन संबंध की समाप्ति पर पंजीयक द्वारा समाप्ति प्रमाण पत्र जारी किए जाने का प्रावधान किया गया है।

8- अनुसूची-2 में ‘‘विधवा’’ शब्द के स्थान पर ‘‘जीवनसाथी’’ शब्द का प्रतिस्थापन किया गया है।

9- विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध एवं उत्तराधिकार से संबंधित पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति पंजीयक जनरल को प्रदान की गई है।

*उद्देश्य —*

इन संशोधनों का उद्देश्य समान नागरिक संहिता के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी एवं व्यावहारिक बनाना, प्रशासनिक दक्षता को सुदृढ़ करना तथा नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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