देहरादून :- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का पंचमुखी हनुमान मंदिर में दर्शन और “जय बजरंग बली” का उद्घोष केवल एक धार्मिक आस्था का सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह उस वैचारिक बहस में एक स्पष्ट हस्तक्षेप भी था, जो इन दिनों देश की राजनीति में सनातन बनाम सेकुलर बहस के मौसम में सरकार के मुखिया का इस अंदाज में हनुमान मंदिर जाना और पूजा करना खास अहमियत रखता है।
खास तौर पर कोटद्वार में बवाल के बाद सियासी नजरिए से उनका हनुमान मंदिर जाना बहुत महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। राजनीतिक नजरिए से आज मुख्यमंत्री ने साफ संदेश दिया कि वह प्रशासनिक फैसलों में स्पष्टता के साथ ही अपनी वैचारिक और सनातनी सोच को भी खुलकर रखने से नहीं हिचकते। उन्होंने ये भी कहा कि “सनातन संस्कृति को किसी टैग की ज़रूरत नहीं।
गुजरे सालों में ‘सनातन’ को कभी बहुसंख्यकवाद के फ्रेम में, तो कभी सेक्युलर मूल्यों के खिलाफ खड़ा करते रहने की प्रवृत्ति के मौसम में आज पुष्कर धामी ने ये साबित करने की मजबूत निजी कोशिश की कि सनातन परंपरा किसी राजनीतिक ठप्पे की मोहताज नहीं है। वह सनातन के मुद्दे पर तटस्थ रहने के बजाए अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखने में नहीं हिचकते हैं।
