Breaking News
अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, गणेश गोदियाल।
अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़, गणेश गोदियाल।
एसजीआरआरयू में छात्रों के समग्र स्वास्थ्य विकास को लेकर हुआ प्रेरणादायी कार्यक्रम।
एसजीआरआरयू में छात्रों के समग्र स्वास्थ्य विकास को लेकर हुआ प्रेरणादायी कार्यक्रम।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने महिला स्पोर्ट्स कॉलेज व स्टेडियम का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के दिए निर्देश।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने महिला स्पोर्ट्स कॉलेज व स्टेडियम का किया निरीक्षण, व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के दिए निर्देश।
हर काम देश के नाम, औली में भारत और अमरीका के जवानों ने किया, आतंकवाद-विरोधी युद्ध अभ्यास।
हर काम देश के नाम, औली में भारत और अमरीका के जवानों ने किया, आतंकवाद-विरोधी युद्ध अभ्यास।
परिवार की प्रताड़ना से शिक्षा से वंचित रुद्र प्रताप नेगी का सहारा बना जिला प्रशासन।
परिवार की प्रताड़ना से शिक्षा से वंचित रुद्र प्रताप नेगी का सहारा बना जिला प्रशासन।
बाल संरक्षण एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाएं अधिकारी, डीएम डॉ0 आशीष चौहान।  
बाल संरक्षण एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाएं अधिकारी, डीएम डॉ0 आशीष चौहान।  
मुख्य सचिव से देवप्रयाग क्षेत्र के टॉपर विद्यार्थियों ने की मुलाकात, मुख्य सचिव ने तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की दी सीख।
मुख्य सचिव से देवप्रयाग क्षेत्र के टॉपर विद्यार्थियों ने की मुलाकात, मुख्य सचिव ने तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की दी सीख।
सीएम धामी 18 सितंबर को, 140 चयनित विद्यार्थियों से करेंगे सीधे संवाद, सुनेंगे विकसित उत्तराखण्ड का विजन।
सीएम धामी 18 सितंबर को, 140 चयनित विद्यार्थियों से करेंगे सीधे संवाद, सुनेंगे विकसित उत्तराखण्ड का विजन।
सीएम धामी के जन्मदिवस में उमड़ा आत्मीयता का माहौल, मंत्रीगण, अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं।
सीएम धामी के जन्मदिवस में उमड़ा आत्मीयता का माहौल, मंत्रीगण, अधिकारी-कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों ने दी शुभकामनाएं।

भेदभाव मन का विषय, शक्ति और संस्कार से होगा समाज परिवर्तन, मोहन भागवत।

भेदभाव मन का विषय, शक्ति और संस्कार से होगा समाज परिवर्तन, मोहन भागवत।

देहरादून :- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में “संघ यात्रा – नये क्षितिज, नये आयाम” विषय पर प्रमुख जन गोष्ठी एवं विविध क्षेत्र समन्वित संवाद का आयोजन हिमालयन कल्चरल सेंटर के सभागार में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में संघ के सरसंघचालक माननीय मोहन भागवत जी का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ सरसंघचालक द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण एवं सामूहिक वंदेमातरम् गायन से हुआ। कार्यक्रम का संचालन विभाग प्रचार प्रमुख गजेन्द्र खंडूड़ी जी ने किया।

प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल जी ने अपने प्रारंभिक संबोधन में संघ के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत उत्तराखंड में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों—विजयदशमी पर पथ संचलन, घोष संचलन, व्यापक गृह संपर्क अभियान, परिवारों में प्रत्यक्ष संपर्क तथा हिंदू सम्मेलनों—की जानकारी दी तथा आगामी योजनाओं का भी विस्तार से उल्लेख किया।

“ऊपर से जो दिखता है, वह सदैव सत्य नहीं”

सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने कहा कि संघ को बाहर से देखकर उसकी वास्तविकता को नहीं समझा जा सकता। पथ संचलन देखकर कुछ लोग उसे अर्धसैनिक संगठन समझ लेते हैं, राष्ट्रप्रेम के गीत सुनकर संगीत मंडली मान लेते हैं, सेवा कार्य देखकर सेवा क्षेत्र का संगठन समझ लेते हैं, किंतु संघ इन सीमाओं से परे एक व्यापक सामाजिक शक्ति है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे चीनी की मिठास को जानने के लिए उसे चखना पड़ता है, वैसे ही संघ को समझने के लिए संघ के कार्य में आना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का किसी संगठन से प्रतिस्पर्धा नहीं है। राष्ट्र सशक्त होगा तो राष्ट्रवासी भी सशक्त होंगे। यदि राष्ट्र दुर्बल होगा तो व्यक्ति अपने ही देश में सुरक्षित नहीं रह पाएगा। संघ का उद्देश्य व्यक्ति निर्माण है, क्योंकि सशक्त व्यक्ति से ही सशक्त समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है।

डॉ. हेडगेवार के प्रसंग

संघ संस्थापक डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए भागवत जी ने कहा कि वे जन्मजात देशभक्त और विलक्षण प्रतिभा के धनी थे। बाल्यकाल में महारानी विक्टोरिया के जन्मदिवस पर विद्यालय में वितरित मिठाई लेने से उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया था कि वे अपने देश पर शासन करने वाले के उत्सव में भाग नहीं लेंगे। वे अनुशीलन समिति के सक्रिय सदस्य रहे तथा वंदेमातरम् गान के कारण अंग्रेजों द्वारा देशद्रोह का मुकदमा भी झेला। उनका संकल्प था कि भारत बार-बार पराधीन न हो, इसी उद्देश्य से संघ की स्थापना की गई।

“2000 वर्षों की यात्रा के बाद विश्व की आशा भारत से”

भागवत जी ने कहा कि लम्बी ऐतिहासिक यात्रा के पश्चात आज विश्व भारत को पुनः नेतृत्वकारी भूमिका में देखने की आशा कर रहा है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से संघ की गतिविधियों से जुड़कर समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का आह्वान किया।

संघ के “पंच परिवर्तन” सिद्धांतों के माध्यम से भारत को परम वैभव तक ले जाने का संकल्प लेने का आग्रह भी उन्होंने किया।

प्रश्नोत्तर सत्र के प्रमुख बिंदु

भेदभाव और सामाजिक परिवर्तन उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव का मूल कारण व्यवस्था नहीं, बल्कि मन है। अंधकार को पीटने से नहीं, प्रकाश जलाने से समाप्त किया जाता है। व्यवहार में परिवर्तन से ही भेदभाव मिटेगा। संघ में कई स्वयंसेवक दशकों तक कार्य करते हैं, पर पहचान की अपेक्षा नहीं रखते—क्योंकि कार्य ही प्रधान है।

तकनीक और संस्कार

डिजिटल युग पर उन्होंने कहा कि तकनीक साधन है, साध्य नहीं। उसका उपयोग संयम और अनुशासन से होना चाहिए। परिवार में आत्मीयता और समय देना आवश्यक है; तकनीक के लिए मनुष्य की बलि नहीं चढ़ाई जा सकती।

सांस्कृतिक पहचान और शक्ति

उन्होंने कहा कि जो जोड़ने का कार्य करे वही हिंदू है। मातृभूमि के प्रति भक्ति अनिवार्य है। विश्व सत्य से अधिक शक्ति को समझता है, इसलिए शक्ति अर्जित करना आवश्यक है, किंतु उसका उपयोग मर्यादित होना चाहिए।

महिलाओं की भूमिका

भागवत जी ने कहा कि महिलाएं पूर्णतः स्वतंत्र हैं। देश संचालन में उनकी भागीदारी 33 प्रतिशत ही नहीं, 50 प्रतिशत तक होनी चाहिए। प्रतिबंध काल में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

पर्यावरण, शिक्षा और सामाजिक सद्भाव

उत्तराखंड की नदियों और पर्यावरण संरक्षण पर उन्होंने समन्वित नीति और स्थानीय सहभागिता पर बल दिया। शिक्षा में पाठ्यक्रम से अधिक शिक्षकों के संस्कारों को महत्वपूर्ण बताया। आरक्षण, वर्गीकरण और समान नागरिक संहिता जैसे विषयों पर उन्होंने कहा कि समाज को प्रमाणिकता और सद्भाव से कार्य करना चाहिए। विभाजन की मानसिकता से बाहर आना होगा।

राजनीति और जनसंख्या

उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ हिंदुत्व की राजनीति नहीं करता, बल्कि व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज उत्थान का कार्य करता है। भ्रष्टाचार मन से प्रारंभ होता है और वहीं समाप्त किया जा सकता है। जनसंख्या को उन्होंने बोझ और संसाधन—दोनों दृष्टियों से देखने की आवश्यकता बताई तथा समान रूप से लागू होने वाली विचारपूर्ण नीति पर बल दिया।

कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रबुद्धजन, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, उद्योगजगत से जुड़े प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम राष्ट्रगान के साथ सम्पन्न हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top