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मुख्यमंत्री धामी ने मसूरी रोड स्थित शिव मंदिर के, निर्माणाधीन पुल का स्थलीय निरीक्षण कर अधिकारियों को दिए निर्देश।
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केदारनाथ धाम को 51 क्विंटल फूलों से मंदिर का हो रहा श्रृंगार, 22 अप्रैल सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ, मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे।
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उत्तराखण्ड और हिमाचल प्रदेश बढ़ाएंगे आपसी सहयोग, आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक दूसरे के अनुभवों का लेंगे लाभ। 
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जिला प्रशासन के जनदर्शन में न्याय का भरोसा, डीएम सविन बंसल का हर शिकायत पर तुरंत एक्शन।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0 कार्यक्रम में किया प्रतिभाग।
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आईआईटी रुड़की और उत्तराखंड स्पेस एप्लीकेशन सेंटर के बीच हुआ एमओयू, अंतरिक्ष विज्ञान एवं जियोस्पेशियल तकनीक में सहयोग को बढ़ावा।
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महिला आरक्षण पर विरोध करने वालों को जनता सिखाएगी सबक, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या।
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मुख्यमंत्री धामी ने वानप्रस्थ आश्रम में आयोजित, श्रीमद्भागवत कथा में किया प्रतिभाग।
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कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने, स्वयं स्वगणना कर प्रदेशवासियों से 24 अप्रैल तक जुड़ने की अपील की।
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खास तोहफाः खूबसूरत गलियारा, हर किसी को प्यारा।

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दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे पर बने एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की बात ही निराली।

देहरादून :- यूं तो पूरा दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे ही शानदार है, लेकिन इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर अपनी तमाम खूबियों के कारण ध्यान खींचता है। यह एक ऐसा गलियारा है, जो हर किसी को प्यारा है। बेरोक-टोक घूमते वन्य जीवों की लिए यहां सुरक्षा की ऐसी गारंटी बुनी गई है, जो आश्वस्त करती है। दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे से गुजरते हर एक यात्री के लिए भी इस कॉरिडोर को निहारना सुखद अहसास करने जैसा है।

*तीन जोन में बंटा है वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर*

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बनाए गए एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर को भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तीन जोन में बांटा है। इसमे गणेशपुर, मोहंड और आसारोडी देहरादून तक के क्षेत्र को शामिल किया गया है। एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की कुल लंबाई 12 किलोमीटर है।

*यूं निकली वन भूमि से कॉरिडोर की राह*

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट का आखिरी 20 किलोमीटर का भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजमार्ग-72 ए में गणेशपुर से देहरादून तक इस प्रोजेक्ट में उत्तराखंड की 9.6224 हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश के हिस्से वाली 47.7054 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करनी पड़ी है। इसके लिए दोनों राज्यों में वर्ष 2019-20 में डीपीआर तैयार की गई थी। उत्तर प्रदेश में वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति 20 जुलाई 2021 को प्राप्त हुई, जबकि उत्तराखंड के लिए यह स्वीकृति 27 अप्रैल 2022 को प्रदान की गई।

 

*खूबियों की झलक, एक नहीं, कई सारे लाभ*

1- कॉरिडोर के निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन अधिक सुरक्षित व सुगम हो गया है। वन्य जीवों की दुर्घटनाओं में होने वाली क्षति न्यून हो गई है। लगातार निरीक्षण में देखा गया है कि हाथी समेत नीलगाय, सांभर, लैपर्ड, जंगली सुअर और अन्य वन्य जीव इस कॉरिडोर का सहजता से उपयोग कर रहे हैं।

2- पहली बार विस्तृत भाग में नदी व वन क्षेत्र से एलिवेटेड मार्ग का निर्माण किया गया है। इस वजह से इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के दौरान किसी भी प्रकार का मानव विस्थापन नहीं हुआ है।

3- कॉरिडोर निर्माण से वन्य जीवों के विचरण का दायरा बढ़ने से उत्तम गुणवत्ता का वन्य जीव जीन पूल तैयार हो सकेगा।

4- पूर्व में स्थानीय लोगों द्वारा बंदरों को भोजन खिलाने की प्रवृत्ति से दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। वर्तमान में इस समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

5- वन्य जीवों के सुरक्षित आवागमन की सुविधा के लिए ध्वनि व वायु प्रदूषण को न्यून किया गया है।

6- अगले 20 वर्षों में 2 .44 मिलियन टन कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह लगभग 65 लाख वृक्षों के समान है। लगभग 19 प्रतिशत ईंधन की बचत होगी। (स्रोत-सीएसआईआर-आईआईपी)

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