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MDDA बोर्ड बैठक में 25 विकास प्रस्तावों को मिली मंजूरी, देहरादून-मसूरी के नियोजित विकास को मिलेगी रफ्तार।
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सीएम धामी के दिशा-निर्देशों में, पीएम आवास योजना को, 30 सितंबर तक सभी लंबित आवास पूरे करने के दिए निर्देश, डॉ. आर. राजेश कुमार।
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सीएम धामी ने भारी वर्षा को देखते हुए, दिए हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश, कहा सभी एजेंसियां रहें पूरी तरह सतर्क।
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ग्रामीण विकास मंत्री भारत सिंह चौधरी ने, PMGSY के कार्यों की प्रगति एवं वन स्वीकृति की समीक्षा की।
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डॉ. पंकज गर्ग एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया के निदेशक (शिक्षा), उत्तर क्षेत्र निर्वाचित।
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देहरादून में भारी से बहुत भारी वर्षा की चेतावनी के बीच, जिला प्रशासन अलर्ट, डीएम ने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के दिए निर्देश।
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देहरादून में 11 अगस्त को लगेगा रोजगार मेला, 559 पदों पर होगा चयन, प्रतिष्ठित कंपनियां लेंगी साक्षात्कार।
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विश्व संस्कृत दिवस से पूर्व, उत्तराखण्ड ने वैश्विक स्तर पर संस्कृत के प्रसार को दिया नया आयाम।
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सहकारिता में हरियाणा व उत्तराखंड मिलकर करेंगे काम, डाॅ. धन सिंह रावत।
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खास तोहफाः खूबसूरत गलियारा, हर किसी को प्यारा।

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दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे पर बने एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की बात ही निराली।

देहरादून :- यूं तो पूरा दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे ही शानदार है, लेकिन इसका 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर अपनी तमाम खूबियों के कारण ध्यान खींचता है। यह एक ऐसा गलियारा है, जो हर किसी को प्यारा है। बेरोक-टोक घूमते वन्य जीवों की लिए यहां सुरक्षा की ऐसी गारंटी बुनी गई है, जो आश्वस्त करती है। दिल्ली-दून एक्सप्रेस वे से गुजरते हर एक यात्री के लिए भी इस कॉरिडोर को निहारना सुखद अहसास करने जैसा है।

*तीन जोन में बंटा है वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर*

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे पर बनाए गए एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर को भारतीय वन्य जीव संस्थान ने तीन जोन में बांटा है। इसमे गणेशपुर, मोहंड और आसारोडी देहरादून तक के क्षेत्र को शामिल किया गया है। एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर की कुल लंबाई 12 किलोमीटर है।

*यूं निकली वन भूमि से कॉरिडोर की राह*

दिल्ली-दून एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट का आखिरी 20 किलोमीटर का भाग उत्तर प्रदेश के शिवालिक वन प्रभाग और उत्तराखंड के राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व व देहरादून वन प्रभाग के घने वन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। राष्ट्रीय राजमार्ग-72 ए में गणेशपुर से देहरादून तक इस प्रोजेक्ट में उत्तराखंड की 9.6224 हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण हुआ है, जबकि उत्तर प्रदेश के हिस्से वाली 47.7054 हेक्टेयर वन भूमि हस्तांतरित करनी पड़ी है। इसके लिए दोनों राज्यों में वर्ष 2019-20 में डीपीआर तैयार की गई थी। उत्तर प्रदेश में वन भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति 20 जुलाई 2021 को प्राप्त हुई, जबकि उत्तराखंड के लिए यह स्वीकृति 27 अप्रैल 2022 को प्रदान की गई।

 

*खूबियों की झलक, एक नहीं, कई सारे लाभ*

1- कॉरिडोर के निर्माण से वन्यजीवों का आवागमन अधिक सुरक्षित व सुगम हो गया है। वन्य जीवों की दुर्घटनाओं में होने वाली क्षति न्यून हो गई है। लगातार निरीक्षण में देखा गया है कि हाथी समेत नीलगाय, सांभर, लैपर्ड, जंगली सुअर और अन्य वन्य जीव इस कॉरिडोर का सहजता से उपयोग कर रहे हैं।

2- पहली बार विस्तृत भाग में नदी व वन क्षेत्र से एलिवेटेड मार्ग का निर्माण किया गया है। इस वजह से इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के दौरान किसी भी प्रकार का मानव विस्थापन नहीं हुआ है।

3- कॉरिडोर निर्माण से वन्य जीवों के विचरण का दायरा बढ़ने से उत्तम गुणवत्ता का वन्य जीव जीन पूल तैयार हो सकेगा।

4- पूर्व में स्थानीय लोगों द्वारा बंदरों को भोजन खिलाने की प्रवृत्ति से दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। वर्तमान में इस समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

5- वन्य जीवों के सुरक्षित आवागमन की सुविधा के लिए ध्वनि व वायु प्रदूषण को न्यून किया गया है।

6- अगले 20 वर्षों में 2 .44 मिलियन टन कार्बन डाईआक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। यह लगभग 65 लाख वृक्षों के समान है। लगभग 19 प्रतिशत ईंधन की बचत होगी। (स्रोत-सीएसआईआर-आईआईपी)

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