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विदेशी रोजगार का सपना कर रही साकार, धामी सरकार की योजना से 123 युवाओं को मिला ग्लोबल करियर।
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आपदा से निपटने की तैयारियों को परखा, देहरादून के 7 संवेदनशील स्थानों पर एक साथ हुई मॉकड्रिल।
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पदक विजेता खिलाड़ियों को तय समय के अंदर, सरकारी सेवा में करें समायोजित, मुख्यमंत्री धामी। 
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मदरसा बोर्ड समाप्ति से, अल्पसंख्यक बच्चों को मिलेगा तरक्की का रास्ता, महेंद्र भट्ट।
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लाल पुल बस दुर्घटना की होगी मजिस्ट्रियल जांच, एक सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के डीएम आशीष चौहान ने दिए निर्देश।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने, खालागांव में बरसात से क्षतिग्रस्त मार्ग का किया निरीक्षण, तत्काल पुनर्निर्माण के दिए निर्देश।
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मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय मानसून पूर्व मॉक ड्रिल में, अधिकारियों को दिए प्रभावी आपदा प्रबंधन के निर्देश।
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ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, अनधिकृत डंपिंग व मानकविहीन प्लांटों पर होगी कड़ी कार्रवाई, डीएम।
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औचक निरीक्षणः कोरोनेशन अस्पताल की बदहाली पर भड़के डीएम आशीष चौहान, व्यवस्थाएं सुधारने के दिए सख्त निर्देश।
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आपदा से निपटने की तैयारियों को परखा, देहरादून के 7 संवेदनशील स्थानों पर एक साथ हुई मॉकड्रिल।

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देहरादून :- मानसून सीजन के दौरान बाढ़, जलभराव, भूस्खलन और संभावित प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए गुरुवार को देहरादून जनपद के सात विभिन्न संवेदनशील स्थानों पर एक साथ व्यापक मॉक अभ्यास (मॉकड्रिल) किया गया। इस पूर्वाभ्यास का मुख्य उद्देश्य वास्तविक आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों की गति, तैयारियों और विभिन्न विभागों के आपसी तालमेल को परखना था।

गुरुवार सुबह ठीक 9ः30 बजे जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को सूचना मिली कि भारी बारिश के कारण जिले के सात अलग-अलग क्षेत्रों में भूस्खलन, बाढ़ और जलभराव हो गया है, जिसमें कई लोग फंस गए हैं। सूचना मिलते ही जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के निर्देश पर आईआरएस (इंसीडेंट रिस्पांस सिस्टम) के सभी नोडल अधिकारी तत्काल कंट्रोल रूम पहुंचे। सभी एसडीएम और इंसीडेंट कमांडर्स को अलर्ट कर रेस्क्यू टीमों को रवाना किया गया। ठीक 10ः10 बजे टीमें अपने-अपने मोर्चे पर पहुंच गईं और युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। अपर जिलाधिकारी के.के. मिश्रा कंट्रोल रूम से सातों घटनास्थलों की पल-पल की निगरानी कर रहे थे।

*सातों घटनास्थलों पर ऐसे चला मिशन रेस्क्यू*

*सहस्रधारा-कार्लीगाढ क्षेत्र* इन दो क्षेत्रों में नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टापू पर फंसे पर्यटकों को निकालने के लिए एसडीएम, एसडीआरएफ, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने मोर्चा संभाला। इस अभ्यास में 2 लोगों को मृत दर्शाते हुए 7 गंभीर और 3 सामान्य घायलों को सुरक्षित निकालकर कोरोनेशन अस्पताल भेजा गया।

*ऋषिकेश (गौहरीमाफी)* चंद्रभागा, सुसवा और सौंग नदियों में बाढ़ के कारण 60-70 परिवार फंस गए थे। रेस्क्यू टीमों ने नावों और राफ्ट के माध्यम से लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों तक पहुंचाया और 8 घायलों को अस्पताल भेजा।

*विकासनगर (जमनीपुर-सहसपुर)* आसन और स्वर्णा नदी के उफान से बस्तियां और कृषि भूमि जलमग्न हो गईं। प्रभावितों को रेस्क्यू कर राहत शिविरों में भेजा गया और 4 गंभीर घायलों को सीएचसी सहसपुर पहुंचाया गया।

*मसूरी (लंबीधार-किमाड़ी मार्ग)* भूस्खलन और भारी बोल्डर गिरने से रास्ता बंद हो गया था। जेसीबी मशीनों से मलबा साफ कराकर और ट्रैफिक पुलिस की मदद से फंसे यात्री वाहनों को निकाला गया।

*डोईवाला (दूधली क्षेत्र)* 150 मिमी से अधिक बारिश होने की काल्पनिक स्थिति पर सबसे पहले बिजली आपूर्ति रोकी गई। क्यूआरटी और रेस्क्यू टीमों ने जलभराव से 4 घायलों को निकालकर सीएचसी पहुंचाया और 4 परिवारों को राहत शिविर में शिफ्ट किया।

*चकराता (चकराता-त्यूनी मार्ग)* धारनधार के पास भूस्खलन से फंसे यात्रियों को पहले राहत सामग्री बांटी गई, फिर जेसीबी से मलबा हटाकर महज 1 घंटे के भीतर मार्ग को सुचारू कर दिया गया।

अपर जिलाधिकारी ने कहा कि मॉक अभ्यास सफल रहा। उन्होंने कहा अभ्यास मनुष्य को परिपूर्ण बनाता है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्याे का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन के लिए पूर्वाभ्यास आवश्यक है। इससे आपसी समन्वय कायम होने के साथ आपदा बचाव कार्याे के उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का इस्तेमाल की जानकारी भी मिलती है। उन्होंने नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि रेस्क्यू कार्याे के संचालन के दौरान जो भी खामियां परिलक्षित हुई है या किसी राहत सामग्री की आवश्यकता महसूस हुई है, तो उसको जुटा लिया जाए। ताकि रियल आपदा के समय प्रभावी तरीके से रेस्क्यू कार्य को संचालित कर आमजन को राहत पहुंचाई जा सके। मॉक अभ्यास के दौरान कंट्रोल रूम में आईआरएस से जुड़े सभी विभागों के नोडल अधिकारी मौजूद रहे।

 

 

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