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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे को लेकर दून में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद।
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SGRRU में दीपोत्सव का उल्लास, हजारों दीपों की रोशनी से जगमगाया विश्वविद्यालय का हैलीपैड ग्राउंड।
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उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से की मुलाकात, राजीव महर्षि।
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एवरेस्ट से कारगिल तक विंग कमांडर विक्रांत उनियाल ने रचा गौरवशाली इतिहास।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत वृद्धि को दी मंजूरी।
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मुख्यमंत्री ने कुम्भ मेला-2027 के दृष्टिगत हरिद्वार के चिकित्सालयों के लिए चिकित्सा उपकरणों को दिखाई हरी झंडी।
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मुख्यमंत्री धामी ने विभिन्न जनपदों में विकास कार्यों के लिए दी ₹42.78 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
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मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड परिवहन निगम की 59 नई बसों को दिखाई हरी झंडी, नैनीताल को 19, टनकपुर और देहरादून 20-20 बसें आवंटित।
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विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, सदैव साथ-साथ चल सकते हैं, उपराष्ट्रपति।

विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, सदैव साथ-साथ चल सकते हैं, उपराष्ट्रपति।

आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और भारत के सभ्यतागत ज्ञान का समन्वय सतत भविष्य की कुंजी, उपराष्ट्रपति।

पीढ़ियों से वन क्षेत्रों के साथ रहने वाले समुदायों के पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करें, उपराष्ट्रपति।

वन, वन्यजीव और समुदायों की रक्षा को अपने करियर की सफलता का पैमाना बनाएं, उपराष्ट्रपति।

देहरादून :- उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज देहरादून स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2025-2027 बैच के परिवीक्षार्थियों तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया।

अधिकारी प्रशिक्षुओं को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत@2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए आने वाले महत्वपूर्ण दशकों में वे भारत के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि देश की पारिस्थितिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने में भारतीय वन सेवा का योगदान महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं और सदैव साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण और विकास, पारिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका तथा वर्तमान आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच संतुलन स्थापित करने का आग्रह किया। व्यक्तिगत उत्कृष्टता के बजाय टीम की उत्कृष्टता का आह्वान करते हुए सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही राष्ट्रों और संस्थानों का निर्माण करता है। उन्होंने पीढ़ियों से वनों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के साथ सामंजस्य में जीवन जीने वाले समुदायों द्वारा संचित पारंपरिक ज्ञान का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

लोक सेवा में सत्यनिष्ठा के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “सत्यनिष्ठा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता” और कठिन निर्णयों में संविधान, कानून, विज्ञान तथा व्यापक जनहित का मार्गदर्शन होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया।वानिकी में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के अधिकारियों से क्षेत्रीय अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और लोगों के प्रति संवेदनशीलता के साथ रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा-आधारित प्रणालियों को समन्वित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के सतत भविष्य के निर्माण में आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और भारत के सभ्यतागत ज्ञान को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा।

उपराष्ट्रपति ने वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत महिलाएं हैं और इसे एक उत्साहजनक बदलाव तथा नारी शक्ति का प्रमाण बताया। अधिकारियों को अपने करियर का आकलन केवल उनके द्वारा धारण किए गए पदों से न करने की सलाह देते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे अपने योगदान का आकलन पुनर्स्थापित किए गए वनों, संरक्षित किए गए वन्यजीवों, जिन समुदायों का विश्वास उन्होंने अर्जित किया है और भावी पीढ़ियों के लिए छोड़ी गई विरासत के आधार पर करने का आग्रह किया। उन्होंने अधिकारियों से सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान करते हुए कहा: “राष्ट्र प्रथम”।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक श्रीमती अजीता लोंगजाम तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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