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कृषि मंत्री गणेश जोशी से, भरसार विश्वविद्यालय के कुलपति ने की शिष्टाचार भेंट।   
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मुख्यमंत्री ने सामूहिक कन्या पूजन कार्यक्रम में किया प्रतिभाग।
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कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने वात्सल्य योजना के तहत, 3 करोड़ 2 लाख रुपए डीबीटी के माध्यम से खातों में किए ट्रांसफर।
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चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ कालिका मंदिर में की पूजा-अर्चना। 
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स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊंचाई देने के लिए, प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ और राज्य सरकार एकजुट।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने, चार वर्ष के कार्यकाल पर दी राज्य सरकार को बधाई।  
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शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में पदयात्रा का आयोजन।
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कृषि मंत्री गणेश जोशी के सख्त निर्देश, किसानों के खातों में ससमय मिले एप्पल मिशन का बजट।
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स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल ने किया, दून अस्पताल का निरीक्षण व्यवस्थाओं की ली जानकारी।
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सपा देश की तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर आई सामने, यूपी में जीती 37 सीटें

सपा देश की तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर आई सामने, यूपी में जीती 37 सीटें

जातीय गोलबंदी की रणनीति से सपा को मिली सफलता 

लखनऊ। सपा ने लोकसभा आम चुनाव में अब तक के अपने इतिहास में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। उसने कुल 37 सीटें जीतीं। इस तरह सपा देश की तीसरी बड़ी पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई है। धार्मिक मुद्दों के बजाय जातीय गोलबंदी और यादवों-मुस्लिमों पर कम दांव की रणनीति से सपा को यह सफलता मिली। सपा ने पिछला लोकसभा चुनाव बसपा के साथ लड़ा था। तब उसे महज पांच सीटें मिली थीं। राजनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण यूपी में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विपक्ष के अभियान का नेतृत्व किया। सपा ने गठबंधन के तहत 62 सीटों पर चुनाव लड़ा। 17 सीटें कांग्रेस और एक सीट तृणमूल कांग्रेस को दी। सीट शेयरिंग की यह रणनीति काफी कारगर साबित हुई। कांग्रेस के साथ साझेदारी करने के चलते सपा मतदाताओं को यह मनोवैज्ञानिक संदेश देने में सफल रही कि राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का विकल्प मौजूद है।

2019 के चुनाव में पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह ही सपा से अलग थे, लेकिन इस बार परिवार की एकजुटता से भी अच्छा संदेश गया। सपा ने प्रत्याशी तय करने में पीडीए फार्मूले का भी पूरा ध्यान रखा। अपना आधार वोट माने जाने वाले यादवों और मुस्लिमों से ज्यादा कुर्मी बिरादरी के प्रत्याशी उतारे। ब्राह्मण व ठाकुर समेत सामान्य जाति के प्रत्याशियों को भी प्रतिनिधित्व दिया। अखिलेश का यह दांव बिल्कुल सही बैठा और पार्टी को अप्रत्यशित सफलता मिली। अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयानों से खुद को और अपनी पार्टी को दूर रखा। बहुत ही सधे अंदाज में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पर सीधे कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

इतना ही नहीं इटावा में विशाल मंदिर का निर्माण प्रारंभ कराया। इससे भाजपा को धार्मिक मुद्दों पर उन्हें घेरने का मौका नहीं मिला। साथ ही जातीय गोलबंदी के लिए संविधान और आरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता दी। पेपर लीक और अग्निवीर के सहारे बेरोजगारी की समस्या से बड़ी चोट की। इस रणनीति ने उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचाया। 2004 में जीती थीं 35 सीटें सपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा आम चुनाव में 35 सीटें जीती थीं। इस लोकसभा चुनाव में सपा उससे भी अच्छा प्रदर्शन करने की ओर बढ़ रही है।
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के गढ़ में साइकिल पूरी गति से दौड़ी। यादवलैंड की छह सीटों में मैनपुरी का रुतबा बरकरार रहा, जबकि सपा ने भाजपा से चार सीटें छीन लीं। सभी सीटों पर वोटबैंक बढ़ाने में भी कामयाब रही, जबकि फर्रुखाबाद में भाजपा तीसरी बार जीत दर्ज कर हैट्रिक लगाने में कामयाब रही।

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