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प्रधानमंत्री मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विज़न को, ज़मीन पर उतारने में हडको बनेगा उत्तराखंड का मजबूत साझेदार।
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Wings India 2026 में उत्तराखंड को, “Best State for Promotion of Aviation Ecosystem” सम्मान।
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सूबे के 544 नये विद्यालयों में संचालित होंगे व्यावसायिक पाठ्यक्रम।
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उत्तराखंड कांग्रेस का भ्रष्टाचार, अपराध और बेरोज़गारी के खिलाफ, 16 फरवरी को राजभवन घेराव का ऐलान। 
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राष्ट्रपति निकेतन देहरादून में, परिवहन विभाग द्वारा राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह, 2026 के अंतर्गत ऐतिहासिक जनजागरूकता कार्यक्रम सम्पन्न।
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मुख्यमंत्री धामी ने रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ी, विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, छात्र कौशल संवर्धन हेतु लैब ऑन व्हील्स, इंफोसिस स्प्रिंगबोर्ड का किया फ्लैग ऑफ।
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गौमाता में बसती है सनातन की आत्मा, महाराज।
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सेवा सप्ताह के तहत कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने, छात्र–छात्राओं को ब्लैंकेट किए वितरित, बच्चों ने एक स्वर में बोला थैंक्यू मंत्री जी।
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1 जुलाई से लागू होंगे तीन नए क्रिमिनल लॉ, केन्द्र सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

1 जुलाई से लागू होंगे तीन नए क्रिमिनल लॉ, केन्द्र सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

नई दिल्ली। तीन नए आपराधिक कानून एक जुलाई 2024 से प्रभावी हो जाएंगे। इसे लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शनिवार को अधिसूचना जारी कर दी गई है। जिसमें कहा गया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita 2023), भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita 2023) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1 जुलाई 2024 से लागू होंगे। इन तीन विधेयकों को पहली बार अगस्त 2023 में संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किया गया था। 21 दिसंबर को राज्यसभा द्वारा पारित होने से पहले तीनों कानूनों को 20 दिसंबर को लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 25 दिसंबर को इन्हें अपनी सहमति दे दी थी।

ये कानून क्रमशः औपनिवेशिक युग के भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। तीनों कानूनों का उद्देश्य इसे पूरी तरह से बदलना है। यह भारतीय दंड संहिता, 1860 का स्थान लेता है। इसमें राजद्रोह को हटा दिया गया है, लेकिन अलगाववाद, विद्रोह और भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता के खिलाफ कृत्यों को दंडित करने वाला एक और प्रावधान पेश किया गया है। नाबालिगों से सामूहिक बलात्कार और मॉब लिंचिंग के लिए मौत की सजा का प्रावधान है।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
यह सीआरपीसी, 1973 का स्थान लेता है. इसमें समयबद्ध जांच, सुनवाई और बहस पूरी होने के 30 दिनों के भीतर फैसला देने का प्रावधान है। यौन उत्पीड़न पीड़ितों के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य की गई है। अपराध की संपत्ति और आय की कुर्की के लिए एक नया प्रावधान पेश किया गया है।

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023
इसने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लिया है, अदालतों में पेश और स्वीकार्य साक्ष्य में इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड, ईमेल, सर्वर लॉग, कंप्यूटर, स्मार्टफोन, लैपटॉप, एसएमएस, वेबसाइट, स्थानीय साक्ष्य, मेल, उपकरणों पर संदेश शामिल होंगे. केस डायरी, एफआईआर, आरोप पत्र और फैसले सहित सभी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण होगा. इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड का कानूनी प्रभाव, वैधता और प्रवर्तनीयता कागजी रिकॉर्ड के समान ही होगा।

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