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श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में, जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि, बागवानी और वानिकी पर मंथन।
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महिला संवाद में सशक्तिकरण की गूंज, महिलाओं ने स्वत: गाए स्फूर्त गीत।
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युवाओं को राज्य में ही मिलेंगे रोजगार और शिक्षा के अवसर, पलायन रोकने पर सरकार का जोर, मुख्यमंत्री धामी।
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सेवा संकल्प अभियान 25 सितंबर से 07 अक्टूबर तक होंगे आयोजित, सेवा सेतु सरकार आपके द्वार शिविर, सुबोध उनियाल।
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महिलाएं सकारात्मक होकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, सरकार देगी पूरा साथ, मुख्यमंत्री धामी।
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श्री गुरु राम राय जी महाराज का महानिर्वाण पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया गया।
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एक राष्ट्र एक चुनाव मोदी कैबिनेट से मिली मंजूरी, संसद के शीतकालीन सत्र में किया जाएगा पेश।

एक राष्ट्र एक चुनाव मोदी कैबिनेट से मिली मंजूरी, संसद के शीतकालीन सत्र में किया जाएगा पेश।

देहरादून :- बुधवार को मोदी कैबिनेट ने एक देश एक चुनाव  के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब संसद में इसे शीतकालीन सत्र में पेश किया जाएगा। आपको बता दें कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व वाली समिति ने वन नेशन वन इलेक्शन की संभावनाओं पर मार्च में अपनी रिपोर्ट सौंप दी थी. इस रिपोर्ट में जो सुझाव दिए गए हैं। उसके मुताबिक पहले कदम के रूप में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने चाहिए। समिति ने आगे सिफारिश की है कि लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनाव एक साथ संपन्न होने के 100 दिन के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव भी हो जाने चाहिए। इससे पूरे देश में एक निश्चित समयावधि में सभी स्तर के चुनाव संपन्न कराए जा सकेंगे। वर्तमान में, राज्य विधानसभाओं और लोकसभा के चुनाव अलग-अलग आयोजित किए जाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से एक राष्ट्र एक चुनाव (वन नेशन वन इलेक्शन) की वकालत करते आए हैं। पीएम मोदी ने कहा था, मैं सभी से एक राष्ट्र एक चुनाव के संकल्प को हासिल करने के लिए एक साथ आने का अनुरोध करता हूं। जो समय की मांग है। लोकसभा चुनाव से पहले आजतक से विशेष बातचीत में पीएम मोदी ने इस मुद्दे पर कहा था कि सरकारों के पूरे पांच साल के कार्यकाल के दौरान चुनाव ही नहीं होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा था, ‘मैं हमेशा कहता हूं कि चुनाव सिर्फ तीन या चार महीने के लिए होने चाहिए. पूरे 5 साल राजनीति नहीं होनी चाहिए. इससे चुनावों का प्रबंधन करने वाले खर्च में कटौती होगी।

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई में  बनी समिति ने 62 राजनीतिक पार्टियों से संपर्क किया था। इनमें से 32 ने एक देश, एक चुनाव का समर्थन किया था। जबकि 15 पार्टियां इसके विरोध में थीं। 15 ऐसी पार्टियां थीं जिन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

केंद्र की एनडीए सरकार में बीजेपी के अलावा चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी, नीतीश कुमार की जेडीयू और चिराग पासवान की एलजेपी (आर) बड़ी पार्टियां हैं। जेडीयू और एलजेपी (आर) तो एक देश, एक चुनाव के लिए राजी हैं। जबकि टीडीपी ने इस पर कोई जवाब नहीं दिया है। जेडीयू और एलजेपी (आर) ने एक देश, एक चुनाव का ये कहते हुए समर्थन किया था कि इससे समय और पैसे की बचत हो सकेगी। वहीं कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, सीपीएम और बसपा समेत 15 पार्टियों ने इसका विरोध किया था। जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा, टीडीपी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग समेत 15 पार्टियों ने कोई जवाब नहीं दिया था।

एक देश, एक चुनाव के लिए सबसे पहले सरकार को बिल लाना होगा। चूंकि ये बिल संविधान संशोधन करेंगे, इसके लिए ये तभी पास होंगे, जब इन्हें संसद के दो तिहाई सदस्यों का समर्थन मिलेगा। यानी, लोकसभा में इस बिल को पास कराने के लिए कम से कम 362 और राज्यसभा के लिए 163 सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। संसद से पास होने के बाद इस बिल को कम से कम 15 राज्यों की विधानसभा का अनुमोदन भी जरूरी होगा यानी, 15 राज्यों की विधानसभा से भी इस बिल को पास करवाना जरूरी है। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर  के बाद ही ये बिल कानून बन जाएगा।

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