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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में, राज्य जनजातीय महोत्सव में किया प्रतिभाग।
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तकनीकी शिक्षा के विस्तार को खुलेंगे 8 नये पाॅलीटेक्निक काॅलेज, डाॅ. धन सिंह रावत।   
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आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने दिए सख्त निर्देश, एम्पैनलमेंट प्रक्रिया में आएगी पारदर्शिता और तेजी।
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प्रदेश के संतुलित एवं समावेशी विकास के लिए, प्रदेश सरकार संकल्पित, मुख्यमंत्री।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से, बार एसोसिएशन देहरादून के प्रतिनिधिमंडल की शिष्टाचार भेंट।
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मुख्यमंत्री धामी ने प्रदेशवासियों को दी रामनवमी की शुभकामनाएं।
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प्राचीन माँ अम्बिका देवी मंदिर राजपुर में, नवरात्रि पर्व पर भव्य आयोजन 26 को माता का जागरण 27 को विशाल भण्डारा।
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सीएम धामी कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर लगी मुहर।
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चार धाम यात्रा-2026 की तैयारियां तेज, श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, मुख्यमंत्री पुष्कर धामी। 
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यूसीसी – महिलाओं और बच्चों को, मिली सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा।

यूसीसी – महिलाओं और बच्चों को, मिली सामाजिक- आर्थिक सुरक्षा।

देहरादून :- समान नागरिक संहिता, के लिए ड्राफ्ट तय करने वाली विशेषज्ञ कमेटी की सदस्य और दून विश्वविद्यालय की वीसी प्रो. सुरेखा डंगवाल के मुताबिक उत्तराखंड समान नागरिक संहिता के जरिए ना सिर्फ महिलाओं और बच्चों की सामाजिक आर्थिक सुरक्षा मजबूत हुई है। बल्कि इससे विवाह संस्था को भी मज़बूती मिलेगी । प्रो. सुरेखा डंगवाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता की भावना ही, लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करते हुए समता स्थापित करना है। उन्होने कहा कि अभी कई ऐसे मामले सामने आ रहे थे, जिसमें महिलाओं को पता ही नहीं होता था कि उनके पति की दूसरी शादी भी है। कुछ जगह धार्मिक पंरपराओं की आड़ में भी ऐसा किया जा रहा था। इस तरह अब शादी का पंजीकरण अनिवार्य किए जाने से, महिलाओं के साथ इस तरह का धोखे की सम्भावना न्यूनतम हो जाएगी। साथ ही इससे चोरी छिपे 18 साल से कम उम्र में लड़कियों की शादी की कुप्रथाओं पर रोक लग सकेगी। इससे बेटियां निश्चित होकर अपनी उच्च शिक्षा जारी रख सकती हैं।

बुजुर्गों और बच्चों को भी सुरक्षा
प्रो. सुरक्षा डंगवाल के मुताबिक उत्तराखंड समान नागरिक संहिता में व्यक्ति की मौत होने पर उनकी सम्पत्ति में पत्नी और बच्चों के साथ माता पिता को भी बराबर के अधिकार दिए गए हैं। इससे बुजुर्ग माता पिता के अधिकार भी सुरक्षित रह सकेंगे। इसी तरह लिव इन से पैदा बच्चे को भी विवाह से पैदा संतान की तरह माता और पिता की अर्जित सम्पत्ति में हक दिया गया है। इससे लिव इन रिलेशनशिप में जिम्मेदारी का भाव आएगा, साथ ही विवाह एक संस्था के रूप में और अधिक समृद्ध होगा साथ ही स्पष्ट गाइडलाइन होने से कोर्ट केस में भी कमी आएगी।

प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा भारत का संविधान दो वयस्क नागरिकों को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की अनुमति देता है। इसके लिए पहले से ही विशेष विवाह अधिनियम मौजूद है, इसमें भी आपत्तियां मांगी जाती है। अब इसी तरह कुछ मामलों में अभिभावकों को सूचना दी जाएगी। वहीं लव जिहाद की घटनाओं को रोकने के लिए पहले से ही धर्मांतरण कानून लागू है।

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