Breaking News
नंदा-सुनंदा की भक्ति में सराबोर हुआ नैनीताल, मुख्यमंत्री धामी ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना।
नंदा-सुनंदा की भक्ति में सराबोर हुआ नैनीताल, मुख्यमंत्री धामी ने की प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना।
मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी में, एसजीआरआरयू के योग विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन।
मुख्यमंत्री चैम्पियनशिप ट्रॉफी में, एसजीआरआरयू के योग विद्यार्थियों का शानदार प्रदर्शन।
प्रदेश के 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलेगी आउट ऑफ टर्न नियुक्ति, जारी हुआ शासनादेश, रेखा आर्या।
प्रदेश के 243 पदक विजेता खिलाड़ियों को मिलेगी आउट ऑफ टर्न नियुक्ति, जारी हुआ शासनादेश, रेखा आर्या।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की, विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए, ₹ 16.88 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की, विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए, ₹ 16.88 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति।
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत यूपीईएस में छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक, डीएम।
नशा मुक्त भारत अभियान के तहत यूपीईएस में छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक, डीएम।
टिहरी के 2017 आंगनबाड़ी केंद्रों में होगा “आंगन का मिलन कार्यक्रम, सफल आयोजन को लेकर मंत्री रेखा आर्या ने दिए दिशा निर्देश।
टिहरी के 2017 आंगनबाड़ी केंद्रों में होगा “आंगन का मिलन कार्यक्रम, सफल आयोजन को लेकर मंत्री रेखा आर्या ने दिए दिशा निर्देश।
अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर मिले न्याय, सुरक्षा और सम्मान, मुख्यमंत्री धामी।
अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर मिले न्याय, सुरक्षा और सम्मान, मुख्यमंत्री धामी।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में हुई पीएचडी प्रवेश परीक्षा,  21 विषयों में 74 अभ्यर्थियों ने कराया पंजीकरण, 51 ने दी परीक्षा।
श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में हुई पीएचडी प्रवेश परीक्षा,  21 विषयों में 74 अभ्यर्थियों ने कराया पंजीकरण, 51 ने दी परीक्षा।
डॉ. डी.आर. पुरोहित को ‘राज्य वाद्ययंत्र सम्मान’ से किया  सम्मानित, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।
डॉ. डी.आर. पुरोहित को ‘राज्य वाद्ययंत्र सम्मान’ से किया  सम्मानित, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी।

निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की दिशा में उचित कदम

निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की दिशा में उचित कदम

संध्‍या
लोकतंत्र में दलीय विचारधारा के आधार पर एक-दूसरे की नीतियों से असहमति हो सकती है लेकिन जब पार्टियों के समर्थक मामूली बात पर आमने-सामने होते दिखें तो चुनाव आयोग के सुरक्षा बंदोबस्तों की परीक्षा भी होती है। एक वक्त था जब लोकतांत्रिक देशों में भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना बड़ी चुनौती थी। भारत जैसे देश में भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की राह में कम चुनौतियां नहीं हैं। चुनाव आयोग अपनी तरफ से बाधा रहित चुनाव कराने के बंदोबस्त में जुटा है। अपने इन्हीं प्रयासों के तहत चुनाव आयोग ने ताजा निर्देशों के तहत छह राज्यों में गृह सचिवों व पश्चिम बंंगाल के पुलिस महानिदेशक को हटाने के लिए कहा है। चुनाव आयोग के स्थायी निर्देशों की पालना नहीं होने पर यह सख्ती की गई है। पहले से जारी व्यवस्था के अनुसार चुनाव कार्यों से जुड़े उन अफसरों को अन्यत्र स्थानांतरित करना होता है जो पदस्थापन के तीन साल एक ही जगह पर पूरे कर चुके हैं या जिनकी तैनाती गृह जिले में हैं। हैरत की बात यह है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद भी संबंधित राज्यों में इन अहम पदों पर अफसरों को तैनात किया हुआ था। महाराष्ट्र में कुछ नगरीय निकायों में भी आयोग ने निर्देशों की अनदेखी पर नाराजगी जाहिर की है।

भारत के आम चुनावों पर पूरी दुनिया की नजर इसलिए भी रहती है कि यहां के चुनाव दूसरे देशों के लिए नजीर भी बनते हैं। यह बात सही है कि बीते बरसों में हमारे यहां चुनावी हिंसा की घटनाओं में अपेक्षाकृत कमी आई है। लेकिन यह भी सही है कि कुछ राज्य अब भी मतदान पूर्व और इसके बाद होने वाली हिंसक घटनाओं के लिए बदनाम हैं। ऐसे में कई बार स्थानीय अफसरों की मिलीभगत अथवा लापरवाही भी सामने आती रही है। निष्पक्ष चुनावों की दिशा में सिर्फ आयोग का यह कदम ही पर्याप्त नहीं। बड़ी चुनौती कालेधन के प्रवाह को रोकने की भी है। हर बार आयोग की सतर्कता टीमें करोड़ों रुपए बरामद करती रही हैं, जिनका कहीं कोई हिसाब-किताब नहीं होता। इसी तरह चुनावों में प्रलोभन के रूप में मतदाताओं को शराब व अन्य सामग्री बांटे जाने की खबरें भी आती रहती हैं। रही-सही कसर प्रचार अभियान में नेताओं व उनके समर्थकों के बिगड़े बोल पूरी कर देते हैं। पहले से लेकर सातवें चरण तक के मतदान और इसके बाद मतगणना तक का लम्बा समय है।

लोकतंत्र में दलीय विचारधारा के आधार पर एक-दूसरे की नीतियों से असहमति हो सकती है लेकिन जब पार्टियों के समर्थक मामूली बात पर आमने-सामने होते दिखें तो चुनाव आयोग के सुरक्षा बंदोबस्तों की परीक्षा भी होती है। सबसे बड़ा सवाल चुनाव आयोग को और शक्तिमान बनाने का है। जितनी सख्ती अफसरों को हटाने के निर्देश देकर चुनाव आयोग ने दिखाई है, उससे ज्यादा सख्ती चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले राजनेताओं पर दिखानी होगी। ऐसा हुआ तो चुनाव शांतिपूर्ण होने की उम्मीदें ज्यादा रहेंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top