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भगवान बद्रीविशाल के दर पहुंचे राज्यपाल गुरमीत सिंह, प्रदेश की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
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रुड़की के नेहरू स्टेडियम के कायाकल्प का सपना साकार, कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा ने किया, ₹2.28 करोड़ की खेल परियोजना का भूमि पूजन।
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मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए, ₹ 256 करोड की वित्तीय स्वीकृति।
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जिला देहरादून में एक ही दिन में, राष्ट्रीय लोक अदालत में 9080 मामलों का हुआ निस्तारण।
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श्री गुरु राम राय विश्वविद्याल में भावुक माहौल में, फिजियोथेरेपी विद्यार्थियों को दी गई विदाई।
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स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने किया, गरमपानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण।
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पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा सरकार का गठन, शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर धामी।
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एनआईसी कार्यालय का आधुनिक स्वरूप में हुआ कायाकल्प, डीएम सविन बंसल ने किया उद्घाटन।
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डॉ. आर. राजेश कुमार सख्त, मुख्यमंत्री घोषणाओं में देरी बर्दाश्त नहीं, एक सप्ताह में मांगी लंबित पत्रावलियां।
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महाकुंभ 2025- नई पीढ़ी, सनातन संस्कृति और अध्यात्म की ओर हुई आकर्षित।

महाकुंभ 2025- नई पीढ़ी, सनातन संस्कृति और अध्यात्म की ओर हुई आकर्षित।

महाकुंभ में युवाओं की रही रिकॉर्ड भागीदारी

रील लाइफ में जी रहे युवाओं ने सांस्कृतिक दूत बनकर महाकुंभ के आयोजन को देश-दुनिया तक पहुंचाया

महाकुंभ ने युवाओं को सनातन परंपरा से जोड़ने में निभाई अहम भूमिका

देहरादून/उत्तर प्रदेश :- प्रयागराज में 45 दिन तक चले महाकुंभ में युवाओं की रिकॉर्ड भागीदारी रही। महाकुंभ ने रील लाइफ में जी रहे युवाओं को सनातन परंपरा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है। महाकुंभ के 45 दिनों में 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं में करीब आधे 25 वर्ष या इससे कम उम्र के थे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सनातन धर्म, वेद-पुराण और गीता से जुड़े विषयों की खोज 300 गुना तक बढ़ गई। साफ है कि नई पीढ़ी सनातन संस्कृति और अध्यात्म की ओर आकर्षित हुई है।

महाकुंभ के विराट आयोजन का असर बहुत गहराई तक पड़ा है। देश की स्वतंत्रता के बाद से हुए सभी कुंभ धर्मपरायण अधेड़ और वृद्ध श्रद्धालुओं के समागम का केंद्र रहे हैं। ‘कुंभ नहा लिए’ कहावत का मतलब ही था कि अपनी जिम्मेदारियों को निभा चुके लोग ही कुंभ स्नान को जाते थे।

महाकुंभ 2025 इस मामले में एकदम अलग रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के डिजिटल महाकुंभ को युवाओं ने हाथों हाथ लिया। एआई आधारित कुंभ सहायक ऐप और गूगल नेविगेशन से युवाओं को जोड़ने में सफलता मिली। तकनीक और संस्कृति के संगम में युवाओं ने श्रद्धा की डुबकी लगाने के रिकॉर्ड बनाए।

कुंभ ने ये झलक भी दिखा दी कि युवा पारंपरिक धर्म और आधुनिक राष्ट्रवाद के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रहे हैं। इनमें लाखों-करोड़ों की संख्या में डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, प्रबंधक, टीचर, प्रोफेसर, वैज्ञानिक, पत्रकार, खिलाड़ी, अभिनेता, मैन्यूफैक्चरर, ट्रेडर, सर्विस सेक्टर उद्यमी और कॉलेज की छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

33 करोड़ से ज्यादा युवाओं ने फोटो और वीडियो गर्व के साथ सोशल मीडिया पर साझा किए। महाकुंभ आकर उन्होंने देखा कि डिजिटल क्रांति केवल कागजों पर नहीं बल्कि हकीकत बन चुकी है।

कुंभ सहायक चैटबॉट, क्यूआर कोड आधारित जानकारियां, शौचालयों की साफ-सफाई के लिए सीआर कोड आधारित व्यवस्था, गूगल मैप पर महाकुंभ नगरी और वहां होने वाले आयोजनों की जानकारियां, इंटरनेट के बेहतरीन सिग्नल, ऑनलाइन बुकिंग्स, फ्लाइट कनेक्टिविटी, रेल और रोड नेटवर्क ने युवाओं को महाकुंभ से जोड़ दिया।

महाकुंभ में रामकथा, भागवत कथा और प्रवचनों में युवाओं की भीड़ उमड़ी। सत्संग और कीर्तन में करोड़ों युवा शामिल हुए। साफ है कि आधुनिक पीढ़ी जड़ों की ओर लौट रही है। यही युवा महाकुंभ से लौटते हुए दुनिया भर में संगम की मिट्टी और संगम का जल साथ ले गए।

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