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केन्द्रीय बजट में शिक्षा, शोध, स्वास्थ्य व कौशल विकास पर फोकस, डॉ. धन सिंह रावत।
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जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, गंगा में प्रवाहित हो रहे 14 भवनों का ग्रे-वाटर किया गया बंद।
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राम नाम से कांग्रेस का विरोध पुराना, रेखा आर्या।
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केंद्रीय बजट 2026 से, उत्तराखंड पहाड़ों में खुलेगा पर्यटन का नया रास्ता, जानिए आम बजट से क्या मिला फायदा।
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बजट 2026-27 से देश और राज्यों के, विकास को मिलेगी नई दिशा, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।
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उत्तराखंड पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण है आम बजट, महाराज।
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कृषि मंत्री गणेश जोशी ने, केंद्रीय बजट 2026 को विकसित भारत की दिशा में, एक सर्वसमावेशी और विकासोन्मुखी बजट बताया।
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बिंदाल नदी के किनारे की बस्तियों को हटाने का आया ऑर्डर, 30 जून से पहले पूरी तरह से हटा लिया जाएगा अतिक्रमण।

बिंदाल नदी के किनारे की बस्तियों को हटाने का आया ऑर्डर, 30 जून से पहले पूरी तरह से हटा लिया जाएगा अतिक्रमण।

देहरादून :- हाईकोर्ट ने देहरादून में जल धाराओं,जल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने सभी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई की तिथि चार सप्ताह बाद तय की है। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि दो चिह्नित अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं, देहरादून जिला प्रशासन ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि बिंदाल नदी से 30 जून से पहले अतिक्रमण पूरी तरह से हटा लिया जाएगा।

आपको बता दें कि पूर्व में अदालत ने सरकार को निर्देश दिए थे कि राज्य में नदियों, नालों और गधेरों में जहां भी अतिक्रमण हुआ है, उन्हें चिह्नित कर हटाया जाए। इसके साथ ही उन स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं ताकि उचित निगरानी की जा सके। यह व्यवस्था ठीक उसी प्रकार होनी चाहिए, जैसे किसी सड़क पर दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में की जाती है।

अदालत ने पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया था कि संबंधित थाना प्रभारियों को आदेश जारी करें कि जहां-जहां ऐसे अतिक्रमण हो रहे हैं, वहां अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें। साथ ही, कोर्ट ने शहरी विकास विभाग के सचिव को भी आदेश दिए थे कि वे राज्य के नागरिकों को जागरूक करने को यह संदेश प्रकाशित कराएं कि नदियों, नालों एवं गधेरों में अतिक्रमण, मलबा फेंकना और अवैध खनन जैसी गतिविधियां न करें, ताकि मानसून सीजन में किसी भी तरह की आपदा से बचा जा सके।

नगर निगम और अन्य विभागों ने बिंदाल नदी के आसपास स्थित बस्तियों में 850 से ज्यादा मकान चिह्नित किए थे। यह 11 मार्च 2016 के बाद बने। यहां रहने वाले लोगों को नोटिस देने का काम पूरा हो गया है। अब जल्द कमेटी दर्ज आपत्तियों पर सुनवाई कर इनका निस्तारण करेगी। सोमवार को भी बस्ती के कई लोग दस्तावेज जमा करने नगर निगम पहुंचे। जो लोग अपना मकान तय तिथि से पूर्व बने होने का दावा कर रहे हैं उन्हें साक्ष्य उपलब्ध कराने के लिए कहा गया था। दूसरी ओर, नोटिस मिलने के पंद्रह दिन के भीतर सभी को दस्तावेज जमा करने हैं। कई लोगों ने बिजली और पानी के बिलों के अलावा, आधार, राशनकार्ड आदि जमा करते हुए कार्रवाई को लेकर आपत्ति दर्ज की है।

उप नगर आयुक्त की अध्यक्षता में कमेटी करेगी सुनवाई

देहरादून में उप नगर आयुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी आपत्तियों पर सुनवाई करेगी। ग्राउंड सर्वे करने वाली टीम में जल संस्थान, सिंचाई विभाग, राजस्व और एमडीडीए के अधिकारी भी शामिल रहे। नगर आयुक्त नमामी बंसल ने बताया कि सरकार के दिशा-निर्देश के तहत नगर निगम आगे कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि चिह्नित मकानों में रह रहे लोगों को पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया है।

बस्तियों के लोगों को मिले मुआवजा

बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश ने बताया कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के कारण गरीबों का उत्पीड़न नहीं हो, इसके लिए उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि आयोग को इस परियोजना के तहत की जा रही कार्रवाई से अवगत करवाया गया। उन्होंने अपील की है कि रिस्पना एवं बिंदाल के आसपास तभी विस्थापन हो,जब राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि प्रभावितों का पुनर्वास होगा और उचित मुआवजा मिलेगा।

नगर निगम देहरादून की ओर से दून शहर के विभिन्न इलाकों में सोमवार को अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया गया। इस दौरान 26 लोगों का चालान किया गया। करीब नौ हजार रुपये जुर्माना वसूल किया गया। नगर आयुक्त नमामी बंसल ने बताया कि अवैध रूप से फड़-ठेली लगाने वालों के खिलाफ दून नगर निगम चालान की कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने बताया कि नगर निगम के अधिकारियों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके लिए जेब्रा फोर्स गठित की गई है।

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