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शीतकालीन यात्राः आस्था के पथ पर नया अध्याय।
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मार्शल आर्ट में उत्तराखंड का भविष्य उज्जवल, रेखा आर्या।
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कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को मुख्यमंत्री धामी और, पूर्व मुख्यमंत्री कोश्यारी ने दी जन्मदिन की बधाई।
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सीएम धामी ने सिंचाई परियोजनाओं के अन्तर्गत, रिवर प्रोटक्शन कार्य एवं डीसिल्टिंग की प्रगति की समीक्षा की।
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निराश्रित, बेसहारा गोवंश संरक्षण के लिए, डीएम सविन बंसल ने स्वीकृत किए नए आश्रय। 
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से शिष्टाचार भेंट कर जाना कुशलक्षेम।
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सीएम पुष्कर धामी ने पद्म भूषण सम्मान हेतु चयनित होने पर, भगत सिंह कोश्यारी को उनके आवास पर पहुंच कर दी बधाई।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन को, ज़मीन पर उतारने में जुटा आवास विभाग।
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रूद्रपुर व पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज का शीघ्र शुरू होगा संचालन, डॉ. धन सिंह रावत। 
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कांग्रेस के लिए रामलला नहीं, बाबर की मजार रही आस्था का केन्द्र, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज। 

कांग्रेस के लिए रामलला नहीं, बाबर की मजार रही आस्था का केन्द्र, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज। 

देहरादून:- अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में निमंत्रण के बावजूद भी कांग्रेस के शामिल न होने का बड़ा कारण यह है कि उसके शीर्ष नेतृत्व के लिए हमेशा से ही काबूल स्थित बाबर की मजार ही आस्था एवं श्रृद्धा का प्रमुख केन्द्र रहा है  प्रेस को जारी अपने एक बयान में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने कही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में मंदिर ट्रस्ट के निमंत्रण के बावजूद भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का शामिल न होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का पीढ़ी दर पीढ़ी काबूल स्थित बाबर की मजार से आस्था एवं श्रृद्धा का अटूट रिश्ता रहा है। कांग्रेस सरकार में विदेश मंत्री रहे क़द्दावर नेता नटवर सिंह ने अपनी किताब ‘वन लाइफ़ इज नॉट एनफ़’ में स्पष्ट लिखा है कि 1959 में जवाहरलाल नेहरू, 1968 में इंदिरा गांधी, 1976 में राजीव गांधी और 2005 में राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह के साथ अफगानिस्तान में बाबर की कब्र का दौरा किया और कब्र पर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इसलिए सनातन विरोधी कांग्रेस ने आमंत्रण मिलने के बाद भी रामलला के दर्शन करना उचित नहीं समझा।

नटवर सिंह ने अपनी पुस्तक में यह भी लिखा है कि इंदिरा गांधी बाबर की कब्र पर फूल चढ़ाने काबुल गई थीं और अफगानिस्तान में बाबर की कब्र पर इंदिरा गांधी ने दावा किया था कि वह उनके उत्तराधिकारी हैं और देश उनके नियंत्रण में है। यही कारण है कि कांग्रेस अपने सहयोगियों द्वारा सनातन धर्म के अपमान पर चुप्पी साध लेती है। इसलिए आज हमें यह तय करना होगा कि देश की सत्ता को भगवान श्री राम में आस्था रखने वाले चलायेंगे या बाबर की मजार पर श्रृद्धा सुमन अर्पित करने वाले राम द्रोही।

 

 

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