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मुख्यमंत्री धामी की अध्यक्षता में, कौशल विकास व फॉरवर्ड लिंकेज पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक।
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क्वानू–मीनस मोटर मार्ग दुर्घटना में, घायल यात्रियों का हाल पूछने दून अस्पताल पहुँचे, मुख्यमंत्री धामी।
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मुख्यमंत्री धामी ने पंचमुखी बजरंग बली के सामने झुकाया सिर, किया बजरंग बली का उद्घोष।
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धामी सरकार ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का किया गठन।
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धामी सरकार के नाम एक और कीर्तिमान, उत्तराखण्ड में पर्यटकों की संख्या ने बनाया नया रिकॉर्ड।
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कोडीन युक्त कफ़ सिरप बिक्री पर, औषधि विभाग की सख्त कार्यवाही।
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मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला प्रशासन ने, विधवा शांति राणा की 8वीं में पढ रही बेटी की, कक्षा 12 तक की एकमुश्त 1.62 लाख फीस कराई स्कूल प्रबन्धन के खाते में जमा।  
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शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी के 2364 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू, आउटसोर्स के माध्यम से प्रत्येक विद्यालयों में होंगे तैनात।   
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केंद्रीय बजट, महिला सशक्तिकरण, युवा नेतृत्व और नवाचार को नई दिशा देने वाला दस्तावेज, रुचि भट्ट। 
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गर्मी से हाल बेहाल और जल संकट

गर्मी से हाल बेहाल और जल संकट

गर्मी के कारण हाल बेहाल है। समूचा उत्तर भारत तप रहा है। बुजुर्गों की स्मृति में भी नहीं है कि उन्होंने पहले कभी इतनी प्रचंड गर्मी की लगातार मार सही हो। दिल्ली और एनसीआर जैसे क्षेत्रों से लू के कारण मरने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। और दूसरी तरफ जब देश की राजधानी दिल्ली में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है तो देश के जलाभाव वाले क्षेत्रों में क्या स्थिति होगी, उसकी कल्पना करना कठिन नहीं है। जो हो रहा है, वह अनायास या अचानक नहीं हो रहा है। दुनिया भर के पर्यावरणविद् और जलवेत्ता वर्षो से इस स्थिति की आशंका के प्रति चेतावनी जारी करते रहे हैं। भारत में भी बदलते तापमान और तद्जन्य समस्याओं को लेकर लगातार अपनी बातें सामने रखते रहे हैं।

पानी के संकट को लेकर और देश भर में भूजल स्तर की डरावनी गिरावट को लेकर भी चेतावनियां जारी होती रही हैं। इसका कारण खोजने के लिए अतिरिक्त अन्वेषण की जरूरत नहीं है। असंतुलित विकास की भेंट चढ़े देश के वन जंगल, निर्ममता से नष्ट किए गए स्थानिक जल स्रेत और जल संसाधनों पर तीव्र गति से बढ़ती जनसंख्या के दबाव के कारण यह स्थिति पेश हुई है। देश भर में गांव-देहातों तक जिन छोटी-छोटी नदियों का जाल बिछा हुआ था और जो पोखर तालाब जल के संरक्षण के मुख्य वाहक होते थे, वे अब कहीं दिखाई नहीं देते। मनुष्य के अनियंत्रित लालच और हर स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार ने स्थितियों को कई गुना जटिल किया है तिस पर राजनीतिक दलों की बेहयाई समस्या की आग में घी डालती रहती है।

सबसे ज्यादा मौजूदा उदाहरण इस समय दिल्ली का है। दिल्ली में दिल्लीवासियों की कथित सेवा को समर्पित आम आदमी पार्टी की सरकार है, और केंद्र में देश हित के लिए जीने-मरने का दावा करने वाली भाजपा सरकार है और तमाशा यह है कि दोनों ही पार्टियों के प्रतिनिधि दिल्ली के जल संकट के लिए एक दूसरे पर पूरी बेशर्मी से हल्ला बोल रहे हैं। जब दिल्ली के लोग पानी के लिए त्राहि त्राहि कर रहे हैं उस समय दो जिम्मेदार पार्टियों और उनकी सरकारों के इस रवैये को शर्मनाक ही कहा जा सकता है।

कहने में कोई संकोच नहीं कि अगर वास्तविक समस्याओं के प्रति जिम्मेदारी राजनीतिक दलों को रुख इतना गैर-जिम्मेदार है, तो देश और इसकी राजधानी को आने वाले भयानक संकटों से कोई नहीं बचा पाएगा।

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