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गृह मंत्री अमित शाह 6 नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस समारोह के मुख्य होंगे अतिथि, मुख्य सचिव ने लिया तैयारियों का जायजा।
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कैबिनेट मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत बने, भारत स्काउट गाइड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष।
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गृहमंत्री अमित शाह का आगामी 6 नवंबर को देहरादून प्रस्तावित दौरे को लेकर, बीजेपी ने संगठनात्मक तैयारियां की तेज।
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कृषि मंत्री गणेश जोशी ने सेब की अति सघन बागवानी का, प्रशिक्षण लेने 28 किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना।
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मुख्यमंत्री वात्सल्य योजना के माध्यम से, राज्य सरकार कर रही जरूरतमंद व प्रभावित बच्चों को आर्थिक संबल प्रदान, मंत्री रेखा आर्या।
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दीपावली पर अग्नि सुरक्षा को लेकर देहरादून अलर्ट, 41 स्थानों पर पानी के टैंकर तैयार।
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विधानसभा निर्वाचन 2027 देहरादून के, 12,500 दिव्यांग मतदाताओं की होगी मतदाता सूची में मैपिंग।
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मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा में, 14.97 करोड़ रुपये की सड़क चौड़ीकरण परियोजना का किया भूमि पूजन।
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मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा में 14वें दीपावली मेले में किया प्रतिभाग।
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यूसीसी पंजीकरण का, निवास प्रमाणपत्र से संबंध नहीं, प्रो. सुरेखा डंगवाल।  

यूसीसी पंजीकरण का, निवास प्रमाणपत्र से संबंध नहीं, प्रो. सुरेखा डंगवाल।  

पंजीकरण का उद्देश्य उत्तराखंड की डेमोग्राफी को संरक्षित करना मात्र, प्रो. सुरेखा डंगवाल। 

देहरादून :- उत्तराखंड समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट बनाने वाली विशेषज्ञ समिति की सदस्य और दून विश्वविद्यालय की वीसी प्रो. सुरेखा डंगवाल ने स्पष्ट किया है कि यूसीसी के तहत होने वाले वाले पंजीकरण का उत्तराखंड के मूल निवास या स्थायी निवास प्रमाणपत्र से कोई सरोकार नहीं है। उत्तराखंड में न्यूनतम एक साल से रहने वाले सभी लोगों को इसके दायरे में इसलिए लाया गया है ताकि इससे उत्तराखंड की डेमोग्राफी संरक्षित हो सके। 

यूसीसी प्रावधानों पर बयान जारी करते हुए प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि यूसीसी का सरोकार शादी, तलाक, लिव इन, वसीयत जैसी सेवाओं से है। इसे स्थायी निवास या मूल निवास से जोड़ना किसी भी रूप में संभव नहीं है। इसके अलावा यूसीसी पंजीकरण से कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलने हैं। उत्तराखंड में स्थायी निवास पूर्व की शर्तों के अनुसार ही तय होगा, समान नागरिक संहिता कमेटी के सामने यह विषय था भी नहीं। उन्होंने कहा कि यूसीसी के तहत होने वाले पंजीकरण ऐसा ही है, जैसे कोई व्यक्ति कहीं भी सामान्य निवास होने पर अपना वोटर कार्ड बना सकता है। इसके जरिए निजी कानूनों को रैग्यूलेट भर किया गया है। ताकि उत्तराखंड का समाज और यहां की संस्कृति संरक्षित रह सके, इससे उत्तराखंड की डेमोग्राफी का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा। साथ ही अपराधिक प्रवृत्ति के लोगों पर भी इससे अंकुश लग सकेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के लोग भी रहते हैं, ये लोग उत्तराखंड में सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं। ऐसे लोग अब पंजीकरण कराने पर ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे। यदि यह सिर्फ स्थायी निवासियों पर ही लागू होता तो, अन्य राज्यों से आने वाले बहुत सारे लोग इसके दायरे से छूट जाते, जबकि वो यहां की सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहते। दूसरी तरफ ऐसे लोगों के उत्तराखंड से मौजूद विवाह, तलाक, लिव इन जैसे रिश्तों का विवरण, उत्तराखंड के पास नहीं होता। इसका मकसद उत्तराखंड में रहने वाले सभी लोगों को यूसीसी के तहत पंजीकरण की सुविधा देने के साथ ही सरकार के डेटा बेस को ज्यादा समृद़ध बनाना है। प्रो सुरेखा डंगवाल के मुताबिक इससे विवाह नामक संस्था मजबूत ही होगी, जो हमारे समाज की समृद्धि का आधार रही है।

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