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खेल विभाग में कॉन्ट्रैक्ट प्रशिक्षकों की निरंतरता बढ़ाने के निर्देश।
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मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिक सम्मान व, खेल समारोह में प्रतिभाग कर बुजुर्गों को बताया समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर।
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रेरा पोर्टल से जुड़ेगा मानचित्र स्वीकृति सिस्टम, अवैध निर्माण पर सख्ती के संकेत।
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मार्डन बनता आधुनिक इंटेसिंव केयर सेंटर मिली 41 सीटर बस की सौगात, डीएम सविन बंसल ने दिखाई हरी झण्डी।
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जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर फोकस, सीडीओ ने दिए समन्वित कार्ययोजना के निर्देश।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने, प्रदेशवासियों को दी बुद्ध पूर्णिमा की शुभकामनाएं।
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स्वच्छता ही सेवा- केदारनाथ में एक सप्ताह में, जमा किया एक हजार किलो प्लास्टिक वेस्ट।
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डीएम सविन बंसल की सख्ती से जिले में, 64 पूर्णतः निर्जीर्ण विद्यालय भवनों में से 56 ध्वस्त, शेष पर कार्रवाई जारी। 
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हूल दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का नमन: सिदो-कान्हू और वीर आदिवासियों को अर्पित की श्रद्धांजलि

हूल दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी का नमन: सिदो-कान्हू और वीर आदिवासियों को अर्पित की श्रद्धांजलि

हूल दिवस: आदिवासी संघर्ष की अनकही कहानी

नई दिल्ली – हूल दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को संथाल विद्रोह के महानायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने कहा कि सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो जैसे क्रांतिकारियों की बहादुरी और बलिदान औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ संघर्ष की अमर गाथा है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “हूल दिवस हमें हमारे आदिवासी समाज के साहस और बलिदान की याद दिलाता है। मैं सिदो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो समेत उन सभी वीर शहीदों को नमन करता हूं, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी गाथाएं देश को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी इस ऐतिहासिक दिवस पर श्रद्धांजलि दी और कहा, “सिदो और कान्हू के नेतृत्व में लड़ा गया यह आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अन्याय के खिलाफ एकजुटता की मिसाल बना। हजारों आदिवासी भाइयों-बहनों ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिनका बलिदान सदा स्मरणीय रहेगा।”

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिखा, “हूल दिवस के अवसर पर संथाल विद्रोह के अमर शहीदों को कोटि-कोटि नमन करता हूं। ‘अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो’ का नारा बुलंद कर विद्रोह का बिगुल फूंकने वालों की गौरवगाथा पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

हूल दिवस का इतिहास:

हर साल 30 जून को मनाया जाने वाला हूल दिवस 1855 में संथाल विद्रोह की स्मृति में मनाया जाता है। झारखंड के संथाल परगना क्षेत्र में सिदो और कान्हू मुर्मू के नेतृत्व में शुरू हुए इस आदिवासी आंदोलन ने ब्रिटिश सत्ता, जमींदारों और महाजनों के शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक अहम और साहसिक अध्याय माना जाता है।

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