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त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग का बड़ा अभियान, देहरादून में 14 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए।
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कांग्रेस के बेशर्मी भरे दोगलापन और विकास विरोधी चेहरे से उठा पर्दा, महेंद्र भट्ट।
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सोंग नदी की सेहत का ‘बायो इंडिकेटर’ प्रोजेक्ट से लगेगा पता, सारा (SARRA) के तहत शोध शुरू। 
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स्वदेशी एलईडी लड़ियों की रोशनी और मिलेट्स उत्पादों का स्वाद बढ़ाएगा दीपावली की खुशियां।
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मुख्यमंत्री धामी ने 37वें अखिल भारतीय खेलकूद समारोह के, विजेता खिलाड़ियों को किया सम्मानित।
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श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में गोल्डन कार्ड पर मिल रहीं अनुमन्य चिकित्सा सुविधाएं।
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मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए, ₹22.15 करोड़ से अधिक की वित्तीय स्वीकृति का किया अनुमोदन।
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मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वन मंत्री से की भेंट, हल्द्वानी में उच्च न्यायालय के स्थायी परिसर निर्माण के प्रस्ताव पर की चर्चा।
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त्योहारों से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग का शिकंजा, मिठाई की दुकानों पर छापेमारी तेज।
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श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में, सीपीआर कार्डिय लाइफ सपोर्ट पर कार्यशाला आयोजित।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में, सीपीआर कार्डिय लाइफ सपोर्ट पर कार्यशाला आयोजित।

श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के विशेषज्ञों ने मेडिकल एवम् व्यावहारिक पक्ष को समझाया।

आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक तकनीकों की दी गई महत्वपूर्णं जानकारियां।

देहरादून :- श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज एवम् श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में गुरुवार को कार्डियक लाइफ सपोर्ट व सीपीआर पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों एवं पीजी विद्यार्थियों को आपातकालीन स्थितियों में जीवन रक्षक तकनीकों से प्रशिक्षित करना था।

कार्यशाला का शुभारंभ संस्थान के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मनोज गुप्ता, प्राचार्य डॉ. अशोक नायक, डाॅ पुनीत ओहरी एवं अन्य वरिष्ठ चिकित्सकों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। डॉ. अंजलि चौधरी ने बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किसी भी सार्वजनिक स्थल पर व्यक्ति के अचेत होने या हार्ट अटैक की स्थिति में किस प्रकार तुरन्त प्रतिक्रिया देकर उसे अस्पताल तक जीवित पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बीएलएस का प्रशिक्षण न केवल स्वास्थ्य कर्मियों बल्कि आम नागरिकों के लिए भी आवश्यक है।

डॉ. मनोज गुप्ता ने कहा कि आज के समय में एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (एसीएलएस) व बेसिक लाइफ सपोर्ट की जानकारी हर स्वास्थ्य कर्मी के लिए अनिवार्य है।

डॉ. अशोक नायक ने पीजी डॉक्टरों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. निशिथ गोविल, विभागाध्यक्ष (एनेस्थीसिया), ने मानव पुतले (मैनिक्विन) की सहायता से सीपीआरकी प्रक्रिया का डेमो देते हुए बताया कि चेस्ट कंप्रेशन, रेस्क्यू ब्रीदिंग, तथा ऑटोमैटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर (एईडी) का सही उपयोग कैसे किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को सीपीआर देने में बरती जाने वाली सावधानियों की विस्तृत जानकारी भी दी।

आपातकालीन चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. आशुतोष सिंह ने बताया कि यदि अस्पताल परिसर में किसी मरीज को अचानक हृदयाघात (हार्ट अटैक) होता है, तो ऐसे समय में प्रशिक्षित टीम द्वारा तुरंत एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट (एसीएलएस) प्रक्रिया अपनाकर उसकी जान बचाई जा सकती है। उन्होंने एसीएलएस की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह तकनीक अस्पताल में कार्यरत सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए अनिवार्य दक्षता है। डॉ. हरिओम खंडेलवाल ने प्रतिभागियों को ईसीजी पढ़ने की तकनीक समझाते हुए बताया कि कैसे हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों के आधार पर संभावित रोगों का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। डॉ. राहुल चैहान ने तीव्र हृदय गति (टैकीकार्डिया) से जुड़ी बीमारियों के लक्षणों, कारणों एवं उपचार विकल्पों पर विस्तार से जानकारी दी। वहीं डॉ. उमे मरियम ने हृदयाघात (हार्ट अटैक) से उबर चुके मरीजों की पुनर्वास प्रक्रिया, सतत देखभाल और मेडिकल मैनेजमेंट के महत्व को रेखांकित किया।

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